Fri, 31 Jul 2026 10:55 AM IST

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Fri, 31 Jul 2026 10:55 AM IST

सार

लोकसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026 में सड़क हादसों की संख्या में करीब 1.3% बढ़ोतरी का अनुमान है। लेकिन सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में करीब 3.2% की कमी आ सकती है।

भारत में सड़क सुरक्षा और सड़क हादसों को लेकर संसद में पेश सरकारी आंकड़ों से एक मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां साल 2026 में कुल हादसों की संख्या में मामूली बढ़त का अनुमान है। वहीं दूसरी तरफ हादसों में होने वाली मौतों में 3.2 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना जताई गई है।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा लोकसभा में सांसदों नवीन जिंदल और गोवाल कागड़ा पाडवी के सवालों के जवाब में यह जानकारी दी गई। आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सड़क हादसों में होने वाली मौतों के मामले में देश भर में शीर्ष पर बना हुआ है। 

India Road Accidents 2026: Fatalities Expected to Drop by 3.2%, UP Reports Highest Deaths; Govt Data

Road Accidents - फोटो : संवाद

2026 में सड़क हादसों और मौतों को लेकर क्या अनुमान हैं?

27 जुलाई तक उपलब्ध दैनिक औसत आंकड़ों के आधार पर वर्ष 2026 के लिए निम्नलिखित अनुमान पेश किए गए हैं:

  • हादसों में मौतों की कमी:
    2026 में सड़क दुर्घटनाओं के कारण लगभग 1,77,500 मौतों का अनुमान है, जो 2025 में दर्ज 1,83,434 मौतों की तुलना में 3.2 प्रतिशत कम है।

  • कुल हादसों में वृद्धि:
    मौतों में गिरावट के बावजूद, देश में कुल सड़क दुर्घटनाएं 1.3 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5,20,200 होने का अनुमान है (जो 2025 में 5,13,474 थीं)।

  • बीते एक दशक का रुख:
    पिछले 10 वर्षों (2015 से 2025 तक) में सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा 25.5 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2015 की 1,46,133 मौतों से बढ़कर यह 2025 में 1,83,382 तक पहुंच गया था।

  • 27 जुलाई तक की स्थिति:
    इस साल 27 जुलाई तक देश में कुल 2,96,447 सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें 1,01,139 लोगों की जान गई है।

  • आंकड़ों का जरिया:
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि 2025 और 2026 के आंकड़े इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट (e-DAR) पोर्टल से लिए गए हैं। जहां राज्य पुलिस और हाईवे अधिकारी रियल-टाइम जानकारी दर्ज करते हैं।

India Road Accidents 2026: Fatalities Expected to Drop by 3.2%, UP Reports Highest Deaths; Govt Data

Kanpur Road Accident - फोटो : Amar Ujala

सड़क हादसों और मौतों में कौन-से राज्य सबसे आगे हैं?

27 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार राज्यों की स्थिति ये है:

  • सबसे अधिक मौतों वाले राज्य:

    1. उत्तर प्रदेश: 14,794 मौतें (देश में सबसे ज्यादा)

    2. तमिलनाडु: 10,298 मौतें

    3. महाराष्ट्र: 9,279 मौतें

    4. मध्य प्रदेश: 8,098 मौतें

  • सबसे अधिक हादसों वाले राज्य:

    1. तमिलनाडु: 39,666 दुर्घटनाएं (देश में सबसे ज्यादा)

    2. मध्य प्रदेश: 34,947 दुर्घटनाएं

    3. उत्तर प्रदेश: 26,718 दुर्घटनाएं

    4. कर्नाटक: 24,929 दुर्घटनाएं

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India Road Accidents 2026: Fatalities Expected to Drop by 3.2%, UP Reports Highest Deaths; Govt Data

Road Accidents - फोटो : संवाद

राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर हादसों की क्या स्थिति है?

संसद में पेश आंकड़ों के अनुसार देश के प्रमुख हाईवे नेटवर्क पर दुर्घटनाओं का बड़ा हिस्सा दर्ज किया गया:

  • हादसे और मौतें:
    एक्सप्रेसवे समेत नेशनल हाईवे पर 27 जुलाई तक कुल 77,234 हादसे हुए, जिनमें 62,122 लोगों की जान गई (जो कुल मौतों का लगभग 35 प्रतिशत है)।

  • राजमार्गों पर मौतों में यूपी शीर्ष पर:
    नेशनल हाईवे पर सबसे ज्यादा 7,573 मौतें उत्तर प्रदेश में हुईं। इसके बाद कर्नाटक (4,372), महाराष्ट्र (3,894) और तमिलनाडु (3,520) का नंबर आता है।


सड़क हादसों के मुख्य कारण और उल्लंघन कौन-से रहे हैं?

सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और लापरवाही सबसे बड़ी वजहें बनी हुई हैं:

  • ओवर-स्पीडिंग (तेज रफ्तार): 2026 में हादसों की सबसे बड़ी एकल वजह ओवर-स्पीडिंग रही, जिससे जुड़े 46,075 मामले सामने आए।

  • अन्य प्रमुख ट्रैफिक उल्लंघन:

    • गलत दिशा में गाड़ी चलाना / लेन अनुशासन न पालना: 2,397 हादसे

    • शराब पीकर गाड़ी चलाना: 1,443 हादसे

    • रेड लाइट जंप करना: 193 हादसे

    • ड्राइविंग के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल: 84 हादसे

  • पैदल यात्रियों की मौतें: 27 जुलाई तक 24,446 पैदल यात्रियों की हादसों में जान गई। इस मामले में बिहार 2,423 मौतों के साथ शीर्ष पर रहा, जिसके बाद तमिलनाडु (2,328) और महाराष्ट्र (2,002) का स्थान है।

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India Road Accidents 2026: Fatalities Expected to Drop by 3.2%, UP Reports Highest Deaths; Govt Data

Road accident - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का इन आंकड़ों पर क्या कहना है?

सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के पूर्व सड़क सुरक्षा वैज्ञानिक और NCAER के वरिष्ठ सलाहकार एस. वेलमुरुगन ने आंकड़ों के विश्लेषण पर सावधानी बरतने की सलाह दी है:

  • कोहरे के मौसम का जोखिम:
    उन्होंने आगाह किया कि खासकर दिसंबर का सर्दियों का मौसम कोहरे के कारण घातक हादसों का भारी बोझ लाता है। जो गर्मियों के महीनों में हासिल की गई प्रगति या गिरावट को बेअसर कर सकता है।

  • लगातार रुझान देखना जरूरी:
    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंकड़ा साल के अंत तक सही रहता भी है। तो भी हमें अगले कुछ वर्षों तक लगातार गिरावट को देखना होगा ताकि इसे एक स्थायी रुझान माना जा सके।

  • हाईवे और पैदल यात्रियों की चिंता:
    एक्सप्रेसवे और हाईवे पर अत्यधिक मौतें और पैदल यात्रियों की उच्च हताहत दर यह इशारा करती है कि स्पीड लिमिट (गति सीमा) नियंत्रण और नियमों के क्रियान्वयन में कमियां हैं।