By Oneindia Staff

Time Published: Thursday, October 1, 2026, 21:38 [IST]

Adani Sri Lanka Port: श्रीलंका में Adani ग्रुप की पोर्ट कंपनी Adani पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने अपने कारोबार का विस्तार किया है। कंपनी के कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल (CWIT) के दूसरे चरण का उद्घाटन हो गया है। इस विस्तार पर करीब 750 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 75 करोड़ डॉलर) का निवेश किया गया है। इससे टर्मिनल की सालाना कंटेनर हैंडलिंग क्षमता 16 लाख TEU से बढ़कर 32 लाख TEU हो गई है। यानी अब यह पहले के मुकाबले दोगुने कंटेनर संभाल सकेगा।

श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या ने नए विस्तार का उद्घाटन किया। इस सुविधा के बाद टर्मिनल एक साथ तीन बेहद बड़े कंटेनर जहाजों को खड़ा करने में सक्षम होगा। यह विस्तार ऐसे समय में हुआ है, जब हिंद महासागर में समुद्री व्यापार और ट्रांसशिपमेंट की अहमियत लगातार बढ़ रही है। कोलंबो पोर्ट भारत सहित एशिया और यूरोप के बीच माल ढुलाई के महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर स्थित है।

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पहले समझिए, TEU क्या होता है?

TEU यानी ट्वेंटी फुट इक्विवेलेंट यूनिट (Twenty-foot Equivalent Unit)। यह कंटेनर परिवहन में इस्तेमाल होने वाली माप की एक मानक इकाई है।

इसका इस्तेमाल बंदरगाहों पर कंटेनरों की क्षमता और माल ढुलाई की मात्रा बताने के लिए किया जाता है।

  • 1 TEU = 20 फुट का एक मानक कंटेनर।
  • 2 TEU = 40 फुट का एक कंटेनर।
  • 32 लाख TEU = सालाना 32 लाख 20 फुट के मानक कंटेनरों के बराबर क्षमता।

इसका मतलब है कि CWIT अब अपनी नई क्षमता के साथ पहले से दोगुना कंटेनर कारोबार संभाल सकता है।

विस्तार से क्या-क्या बदला?

पहले की स्थिति विस्तार के बाद
क्षमता: 16 लाख TEU क्षमता: 32 लाख TEU
सीमित जहाज बर्थ क्षमता एक साथ 3 विशाल जहाजों को बर्थ
चरण-I का संचालन चरण-II का विस्तार पूरा
750 मिलियन डॉलर का नया निवेश कुल क्षमता दोगुनी

2028 तक कोलंबो पोर्ट का 25% कार्गो संभालने का लक्ष्य

CWIT का लक्ष्य 2028 तक कोलंबो बंदरगाह की कुल लक्षित 1.3 करोड़ TEU क्षमता का करीब 25% हिस्सा संभालना है। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो टर्मिनल कोलंबो पोर्ट के प्रमुख कंटेनर हैंडलिंग केंद्रों में शामिल हो जाएगा। कंपनी के मुताबिक, CWIT ने अपने उद्घाटन वर्ष 2024 में ही 10 लाख TEU कंटेनर संभाल लिए थे। इसके बाद संचालन शुरू होने के महज 18 महीनों के भीतर इसने 20 लाख TEU का आंकड़ा भी पार कर लिया। यह कोलंबो बंदरगाह के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताई गई है।

श्रीलंका के लिए क्यों अहम है यह टर्मिनल?

कोलंबो पोर्ट हिंद महासागर के प्रमुख पूर्व-पश्चिम समुद्री व्यापार मार्ग पर स्थित है। इस मार्ग से एशिया, यूरोप और दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच बड़ी मात्रा में सामान का परिवहन होता है। ट्रांसशिपमेंट का मतलब है कि एक जहाज से माल उतारकर दूसरे जहाज में लोड करना, ताकि उसे आगे किसी अन्य देश या बंदरगाह तक पहुंचाया जा सके। उदाहरण के तौर पर, भारत के किसी बंदरगाह से भेजा गया कंटेनर कोलंबो पहुंच सकता है। वहां से उसे बड़े अंतरराष्ट्रीय जहाज में लोड करके यूरोप या दूसरे देशों तक भेजा जा सकता है। ऐसे में कोलंबो की क्षमता बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को ज्यादा कंटेनर संभालने और बड़े जहाजों को ठहराने की सुविधा मिलेगी। श्रीलंका सरकार का मानना है कि इस तरह के निवेश से रोजगार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और देश की लॉजिस्टिक्स क्षमता को बढ़ावा मिलेगा।

श्रीलंका का पहला पूरी तरह ऑटोमेटेड डीप-वॉटर टर्मिनल

CWIT श्रीलंका का पहला पूरी तरह स्वचालित गहरे पानी वाला कंटेनर टर्मिनल है। इसे तीन साझेदारों ने मिलकर विकसित किया है...

  • Adani पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ)
  • जॉन कील्स होल्डिंग्स
  • श्रीलंका पोर्ट्स अथॉरिटी

इस परियोजना को 35 साल की बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (BOT) रियायत के तहत विकसित किया गया है। BOT मॉडल में कंपनी को एक निश्चित अवधि के लिए परियोजना बनाने और उसका संचालन करने की जिम्मेदारी मिलती है। तय अवधि पूरी होने पर परियोजना संबंधित प्राधिकरण को सौंप दी जाती है। कंपनी के मुताबिक, टर्मिनल के निर्माण और संचालन से 3,000 से ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं। इसमें पूरी तरह विद्युतीकृत संचालन की व्यवस्था की गई है। कंपनी का दावा है कि टर्मिनल को शून्य उत्सर्जन के साथ बड़े कंटेनर जहाजों को संभालने के लिए तैयार किया गया है। अब तक यहां 1.7 करोड़ सुरक्षित कार्य घंटे दर्ज किए गए हैं।

प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या ने क्या कहा?

उद्घाटन समारोह में श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी अमरसूर्या ने कहा कि टर्मिनल की सफलता दिखाती है कि साहसिक सोच, भरोसेमंद साझेदारी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के मेल से देश क्या हासिल कर सकता है। उन्होंने कहा कि महज 18 महीनों में 20 लाख TEU का आंकड़ा पार करना और दूसरे चरण की शुरुआत करना सिर्फ कोलंबो पोर्ट की उपलब्धि नहीं, बल्कि श्रीलंका के आर्थिक भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, इस तरह के निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होंगे, अंतरराष्ट्रीय व्यापार आकर्षित होगा और श्रीलंका की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

Adani पोर्ट्स के CEO ने क्या बताया?

APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक और CEO अश्वनी गुप्ता ने कहा कि यह विस्तार कंपनी और वैश्विक शिपिंग कंपनियों के बीच भरोसे का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि बढ़ी हुई क्षमता, पूरी तरह स्वचालित संचालन और गहरे पानी की सुविधा के साथ CWIT को कोलंबो का प्रमुख ट्रांसशिपमेंट गेटवे बनाने की दिशा में काम किया गया है। वहीं, जॉन कील्स ग्रुप के चेयरमैन कृष्णा बलेंद्र ने कहा कि 18 महीनों में 20 लाख TEU का आंकड़ा हासिल करना साझेदारी की सफलता को दिखाता है।

APSEZ का कितना बड़ा है अंतरराष्ट्रीय कारोबार?

Adani पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) Adani ग्रुप की कंपनी है। यह भारत की प्रमुख एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में शामिल है। कंपनी के कारोबार में बंदरगाह संचालन से लेकर रेल परिवहन, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग और सड़क के जरिए माल की अंतिम डिलीवरी तक शामिल है। कंपनी के मुताबिक...

भारत के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तट पर 16 बंदरगाहों और टर्मिनलों का संचालन।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑस्ट्रेलिया, कोलंबो, इजराइल और तंजानिया में 4 बंदरगाहों का संचालन।

  • 136 जहाजों का समुद्री बेड़ा।
  • 12 मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क।
  • 31 लाख वर्ग फुट वेयरहाउसिंग क्षमता।
  • अपने प्लेटफॉर्म पर 25 हजार से ज्यादा ट्रक।
  • सालाना 653 मिलियन टन कार्गो हैंडलिंग क्षमता।

कंपनी ने 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता बढ़ाकर 1 अरब टन करने का लक्ष्य रखा है।

भारत के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है कोलंबो पोर्ट?

कोलंबो भारत के लिए भी एक अहम समुद्री ट्रांसशिपमेंट केंद्र है। भारतीय बंदरगाहों से निकलने वाले कई कंटेनर अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों तक पहुंचने के लिए कोलंबो जैसे ट्रांसशिपमेंट हब का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कोलंबो की क्षमता बढ़ने का असर क्षेत्रीय समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर पड़ सकता है। हालांकि, इस विस्तार का भारत के बंदरगाहों पर कितना सीधा प्रभाव पड़ेगा, यह शिपिंग कंपनियों के फैसलों, माल ढुलाई की लागत और क्षेत्र में उपलब्ध वैकल्पिक बंदरगाह सुविधाओं पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, CWIT का दूसरा चरण श्रीलंका के समुद्री बुनियादी ढांचे में बड़ा विस्तार है। 750 मिलियन डॉलर के निवेश से क्षमता दोगुनी होने के बाद अब कोलंबो पोर्ट बड़े कंटेनर जहाजों और अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट कारोबार को संभालने के लिए पहले से अधिक सक्षम होगा।