नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में शनिवार को अंगदान और ऊतक दान करने वाले 38 परिवारों को सम्मानित किया गया. यह कार्यक्रम AIIMS के ऑर्गन रिट्रीवल बैंकिंग ऑर्गेनाइजेशन (ORBO) की ओर से आयोजित किया गया. समारोह में अंगदाताओं, त्वचा, हृदय वाल्व और कॉर्निया दान करने वाले परिवारों के साथ-साथ संपूर्ण शरीर दान करने वाले लोगों के परिजनों को भी सम्मानित किया गया. इस मौके पर अंग प्रत्यारोपण से नया जीवन पाने वाले मरीज, डॉक्टर, सरकारी अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
गहरे दुख के बीच अंगदान का फैसला
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि AIIMS के निदेशक प्रो. निखिल टंडन ने कहा कि अंगदान किसी भी व्यक्ति द्वारा मानवता के लिए किया जाने वाला सबसे बड़ा योगदान है. उन्होंने कहा कि हर साल देश में हजारों मरीज ऐसे होते हैं जिन्हें किडनी, लिवर, हार्ट या अन्य अंगों की जरूरत होती है. समय पर अंग नहीं मिलने के कारण कई मरीज अपनी जान गंवा देते हैं. ऐसे में अगर लोग अंगदान के लिए आगे आएं तो अनेक लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है. उन्होंने कहा कि किसी अपने को खोने के गहरे दुख के बीच अंगदान का फैसला लेना बेहद साहस और संवेदनशीलता का परिचायक है. ऐसे परिवार समाज के लिए प्रेरणा हैं और उनका यह निर्णय कई लोगों को नया जीवन देता है.
डॉक्टरों और नर्सों को नियमित प्रशिक्षण
ORBO की प्रभारी प्रो. डॉ. आरती विज ने बताया कि AIIMS में होने वाली हर मृत्यु की जानकारी ORBO को दी जाती है. इसके बाद संस्था के प्रशिक्षित समन्वय अधिकारी 24 घंटे इस प्रक्रिया पर काम करते हैं और यदि परिवार की सहमति मिलती है तो अंगदान की पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से पूरा कराया जाता है. उन्होंने बताया कि ORBO डॉक्टरों और नर्सों को नियमित प्रशिक्षण देता है और स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों तथा आम लोगों के बीच लगातार जागरूकता अभियान भी चलाता है. उन्होंने कहा कि अंगदान की पूरी प्रक्रिया में दाता परिवार, डॉक्टर, ट्रांसप्लांट टीम, फॉरेंसिक विशेषज्ञ, प्रयोगशाला, पुलिस, स्वयंसेवी संस्थाओं और मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
खेल प्रतियोगिताएं और जनजागरूकता कार्यक्रम
AIIMS ने 14 जुलाई से 1 अगस्त तक "अंगदान जीवन संजीवनी अभियान" भी चलाया. इस दौरान डॉक्टरों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए. स्कूलों में पोस्टर, पेंटिंग और जागरूकता प्रतियोगिताएं कराई गईं ताकि बच्चे भविष्य में अंगदान के संदेशवाहक बन सकें. अस्पताल परिसर में नुक्कड़ प्रस्तुतियां, खेल प्रतियोगिताएं और जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए. बड़ी संख्या में लोगों ने अंगदान और ऊतक दान का संकल्प भी लिया.
4 मार्च 2026 को ब्रेन डेड घोषित
समारोह के दौरान कुछ ऐसे परिवारों की कहानियां भी साझा की गईं जिन्होंने अपने सबसे कठिन समय में मानवता की मिसाल पेश की. गाजियाबाद की 26 वर्षीय प्रियंका यादव एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गई थीं और उन्हें 4 मार्च 2026 को ब्रेन डेड घोषित किया गया. प्रियंका अपने परिवार की इकलौती कमाने वाली थीं और अपनी बीमार मां तथा दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी संभाल रही थीं. गहरे दुख के बावजूद उनके परिवार ने उनके दोनों गुर्दे, लिवर, हार्ट वाल्व और दोनों कॉर्निया दान कर दिए. इस फैसले से कई मरीजों को नया जीवन मिला.
सागर के अंगों से कई गंभीर मरीजों को जीवन
23 वर्षीय सागर की भी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी और 19 जुलाई 2026 को उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया. परिवार ने उनके दोनों गुर्दे, लिवर, हार्ट वाल्व और दोनों कॉर्निया दान करने का फैसला लिया. डॉक्टरों के अनुसार सागर के अंगों से कई गंभीर मरीजों को जीवन मिला.
कई मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगाई
दिल्ली के 37 वर्षीय घनश्याम कश्यप घर में दुर्घटनावश गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें 13 फरवरी 2026 को ब्रेन डेड घोषित किया गया. उनके परिवार ने उनके दोनों फेफड़े, दोनों किडनी, लिवर, हार्ट वाल्व और दोनों कॉर्निया दान करने का निर्णय लिया. इस फैसले ने कई मरीजों के जीवन में नई उम्मीद जगाई.
ORBO में पंजीकरण कराया था
AIIMS ने उन लोगों को भी सम्मानित किया जिन्होंने अपने जीवनकाल में ही शरीरदान का संकल्प लिया था. इनमें ईश्वर कौर, सरदारी लाल खुराना, जैमाला गुप्ता और एन.पी. दत्ता शामिल हैं. इन सभी ने पहले से ORBO में पंजीकरण कराया था और निधन के बाद उनका संपूर्ण शरीर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए दान किया गया. कुछ ने कॉर्निया और त्वचा का भी दान किया. AIIMS का कहना है कि ऐसे लोग समाज के लिए प्रेरणा हैं क्योंकि उनके इस निर्णय से भविष्य के डॉक्टरों की पढ़ाई और चिकित्सा अनुसंधान को भी नई दिशा मिलती है.
AIIMS ने देशवासियों से अपील की है कि वे अंगदान और शरीरदान को लेकर आगे आएं. अस्पताल का कहना है कि एक व्यक्ति का अंगदान कई लोगों को नया जीवन दे सकता है और मृत्यु के बाद भी इंसान अपने अंगों के माध्यम से कई परिवारों की उम्मीद बन सकता है.