Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि भारत की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी शुरुआती शिक्षा ऐसे ही संस्थानों में हासिल की.

Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि भारत की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी शुरुआती शिक्षा ऐसे ही संस्थानों में हासिल की.

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Asaduddin Owaisi on Keshav Prasad Maurya

असदुद्दीन ओवैसी, AIMIM प्रमुख Photograph: (X@asadowaisi)

Asaduddin Owaisi: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को इस्लामिक संस्थानों के राजनीतिक आलोचकों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की उस बयानबाजी की आलोचना की जो मदरसों के खिलाफ की गई थी. ओवैसी ने आलोचकों पर कोई ठोस राजनीतिक आधार न होने का भी आरोप लगाया.

  • ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने मदरसों की ऐतिहासिक और संवैधानिक वैधता का बचाव किया. उन्होंने मदरसों को भारत की आजादी की लड़ाई और विविध संस्कृति वाली विरासत का भी जिक्र किया.

ओवैसी का केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर पलटवार

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा, "केशव मौर्य सिर्फ मदरसों पर हमला कर सकते हैं क्योंकि उनकी कुर्सी असल में बस एक स्टूल है. जो लोग अंग्रेजों से प्यार करते हैं, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आ सकते हैं? मदरसे अंग्रेजों के खिलाफ साजिशों और आजादी की लड़ाई के केंद्र थे. उन्होंने आजादी के लिए अनगिनत मुजाहिदीन तैयार किए, जबकि सावरकर अंग्रेजों को दया याचिकाएं लिख रहे थे."

'कई जानी-मानी हस्तियों ने मदरसों में की शुरुआती पढ़ाई'

मदरसों के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए ओवैसी ने कहा कि भारत की कई जानी-मानी हस्तियों ने अपनी शुरुआती शिक्षा ऐसे ही संस्थानों में हासिल की थी. उन्होंने कहा, "भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मदरसे में पढ़ाई की थी. मुंशी प्रेमचंद और राजा राम मोहन राय ने भी मदरसों में ही शिक्षा पाई थी. संविधान का अनुच्छेद 30 हर अल्पसंख्यक समुदाय को अपने खुद के शिक्षण संस्थान स्थापित करने और उन्हें चलाने का अधिकार देता है."

केशव मौर्य सिर्फ़ मदरसों पर हमला कर सकते हैं, क्योंकि उनकी कुर्सी दरअसल एक स्टूल है।

जिन्हें अंग्रेज़ों से मोहब्बत हो, उन्हें मदरसे कैसे पसंद आएँगे? मदरसे अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ साज़िशों और आज़ादी की जद्दोजहद के मरकज़ थे। उन्होंने बेशुमार मुजाहिदीन-ए-आज़ादी पैदा किए, जबकि सावरकर…

— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) August 5, 2026

आजादी की लड़ाई में इस्लामिक शिक्षण संस्थानों ने निभाई अहम भूमिका

बता दें कि ऐतिहासिक रूप से, कई प्रमुख इस्लामी शिक्षण संस्थानों और मदरसों के नेटवर्क जैसे 1866 में स्थापित दारुल उलूम देवबंद ने भारत की आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई थी. इन नेटवर्कों से जुड़े कई विद्वानों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का विरोध किया और खिलाफत आंदोलन और व्यापक आजादी की लड़ाई जैसे आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

प्रथम राष्ट्रपति ने अपनी आत्मकथा में किया था मदरसे का जिक्र 

भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अपनी आत्मकथा ('एन ऑटोबायोग्राफी') में लिखा है कि बचपन में अपने गांव में उन्हें एक स्थानीय मकतब में भेजा गया था, जहां उन्होंने एक "मौलवी साहब" की देखरेख में फारसी सीखी थी.

  • इसके साथ ही ऐतिहासिक रिकॉर्ड और साहित्य में मौजूद जीवन-वृत्तांत अक्सर बताते हैं कि 19वीं सदी के ग्रामीण भारत में आधुनिक प्राइमरी स्कूल सिस्टम के बड़े पैमाने पर न होने के कारण, कई बच्चे- चाहे वे किसी भी समुदाय के हों अपनी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय शिक्षकों या पारंपरिक कम्युनिटी स्कूलों में फारसी, उर्दू या अरबी सीखकर शुरू करते थे. ऐतिहासिक संदर्भों में इन स्कूलों को अक्सर मदरसा या मकतब कहा जाता था.

आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा अंतर बताते हुए, AIMIM प्रमुख ओवैसी ने महात्मा गांधी के हत्यारे का जिक्र किया. ओवैसी ने कहा, "आजाद भारत का पहला आतंकवादी, गोडसे, किसी मदरसे का तालिब-ए-इल्म (छात्र) नहीं था."

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  • उन्होंने संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ऐसी भाषा के इस्तेमाल की भी निंदा की. उन्होंने अपनी पोस्ट में आगे कहा गया, "यह बेहद शर्मनाक है कि संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसी भाषा का इस्तेमाल करे. लेकिन जब कुर्सियां कम हों, तो स्टूल वालों के पास अपनी राजनीतिक अहमियत बनाए रखने के लिए जहर उगलने के अलावा कोई चारा नहीं बचता."

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