Published: Wednesday, September 9, 2026, 18:47 [IST]
UP Chunav 2027 Akash Anand BSP Return Mayawati Conditions: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। तमाम राजनीतिक दल चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती भी पहले ही ऐलान कर चुकी हैं कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। इसी बीच मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने BSP की अंदरूनी राजनीति को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
3 सितंबर को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाए जाने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे। अब 9 सितंबर को मायावती ने उनके लिए वापसी की एक संभावित राह जरूर बताई है। हालांकि, यह रास्ता उनके ससुर और BSP के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक भूमिका से जुड़ा है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आकाश की वापसी की क्या शर्त?
आकाश की वापसी के लिए मायावती की क्या शर्त?
मायावती ने साफ कहा है कि आकाश आनंद की पार्टी में सक्रिय भूमिका बहाल करने पर तभी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जा सकता है, जब अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर पूरी तरह राजनीति से रिटायर हो जाएं। मायावती ने बुधवार, 9 सितंबर को 'एक्स' पर पोस्ट कर अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी के मिशन की तुलना में निजी और पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, सिद्धार्थ को कई बार अपना रवैया सुधारने का मौका दिया गया, लेकिन उन्होंने पार्टी नेतृत्व की अपेक्षाओं के अनुरूप बदलाव नहीं किया।
मायावती ने सिद्धार्थ पर क्या आरोप लगाए?
BSP प्रमुख के मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ ने अपने निजी और पारिवारिक हितों को पार्टी के मिशन से ऊपर रखा। मायावती ने कहा कि इसका खामियाजा सिद्धार्थ के साथ-साथ उनके दामाद आकाश आनंद को भी भुगतना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिद्धार्थ ने अपने निजी हितों के कारण आकाश आनंद और बहुजन आंदोलन के हितों की पर्याप्त चिंता नहीं की। मायावती ने कहा कि इसके बजाय उन्हें पार्टी और समाज के प्रति त्याग और समर्पण का उदाहरण पेश करना चाहिए था।
राजनीति से रिटायरमेंट से आकाश को क्या फायदा होगा?
मायावती के बयान का सबसे अहम हिस्सा आकाश आनंद की राजनीतिक वापसी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर BSP और बहुजन आंदोलन के हित में पूरी तरह राजनीति से अलग होने का विकल्प है। मायावती के मुताबिक, अगर सिद्धार्थ ऐसा करते हैं तो आकाश आनंद के लिए पार्टी में खुलकर काम करने का रास्ता साफ हो सकता है। इसके बाद पार्टी उनकी पहले की जिम्मेदारियों को बहाल करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर सकती है। यानी फिलहाल आकाश आनंद की पार्टी में सक्रिय वापसी सीधे तौर पर अशोक सिद्धार्थ के राजनीतिक रुख से जुड़ी दिखाई दे रही है।
3 सितंबर को छिनी थी बड़ी जिम्मेदारी
मायावती का यह बयान उस घटनाक्रम के कुछ दिन बाद आया है, जब 3 सितंबर को लखनऊ में हुई BSP की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया गया था। बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को लेकर कहा था कि उन्हें अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है। साथ ही, फिलहाल उन्हें संगठन की बड़ी जिम्मेदारियां नहीं सौंपने की बात कही गई थी। इस फैसले के बाद आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। अब मायावती के ताजा बयान से संकेत मिला है कि उनकी पार्टी में वापसी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
2 अगस्त को अशोक सिद्धार्थ पर हुई थी कार्रवाई
आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य की यह कहानी उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ के घटनाक्रम से भी जुड़ी हुई है। BSP ने 2 अगस्त को अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उन पर बार-बार अनुशासनहीनता करने, पार्टी विरोधी रुख अपनाने और अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से निर्वहन नहीं करने जैसे आरोप लगाए गए थे। अब मायावती ने अपने ताजा बयान में एक कदम आगे बढ़ते हुए उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और आकाश आनंद की संभावित वापसी के बीच सीधा संबंध स्थापित किया है।
UP, उत्तराखंड और पंजाब पर मायावती की नजर
मायावती ने अपने संदेश में पार्टी कार्यकर्ताओं और बहुजन समाज के लोगों से निजी या पारिवारिक हितों से ऊपर उठकर BSP के राजनीतिक अभियान को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों को BSP और बहुजन आंदोलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, समर्थकों और शुभचिंतकों से उन्होंने इन राज्यों में BSP की जीत के लिए पूरी ताकत से काम करने को कहा।
मायावती ने सभी वर्गों से BSP को समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि पार्टी को विपक्षी दलों के साथ-साथ 'जातिवादी तत्वों' की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरक्षण जैसे मुद्दों को लेकर भी पार्टी के राजनीतिक अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया।
आकाश आनंद के लिए फिलहाल क्या संकेत?
मायावती के ताजा बयान से इतना साफ है कि आकाश आनंद के लिए BSP के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। लेकिन उनकी सक्रिय राजनीतिक वापसी फिलहाल अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से पूरी तरह अलग होने की शर्त से जुड़ी हुई है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद की भूमिका क्या होगी और क्या वह फिर से BSP के संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी संभालेंगे, यह आने वाले समय में पार्टी के फैसलों पर निर्भर करेगा।