इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बैंकिंग कानून और व्यक्तिगत ऋण की वसूली को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर पेश करने वाला निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पति द्वारा लिए गए पर्सनल लोन की देनदारी के लिए उसकी पत्नी या विधवा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाई कोर्ट

  • Published: 19 Sep 2026, 12:48 PM IST
  • Last Updated: 19 Sep 2026, 12:48 PM IST

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए देश भर के बैंक ग्राहकों और उनके परिवारों के अधिकारों को लेकर बड़ा संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके द्वारा लिए गए असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण की भरपाई मृतक की पत्नी या उसके कानूनी उत्तराधिकारियों की निजी संपत्ति या एफडी से नहीं की जा सकती।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जोहरी की पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक की कार्रवाई को मनमाना और बैंकिंग लोकपाल और आरबीआई के नियमों का खुला उल्लंघन माना है।

पति के निधन के बाद बैंक ने भेजा था वसूली नोटिस
यह पूरा मामला लखनऊ की निवासी नेहा मिश्रा से जुड़ा हुआ है। उनके पति रिंग रोड स्थित मेडिसिन अस्पताल में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया था। दुर्भाग्यवश, मई 2021 में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान उनके पति का निधन हो गया। पति की आकस्मिक मृत्यु के बाद बैंक ने बकाया लोन की वसूली का दबाव बनाना शुरू कर दिया और सितंबर 2025 में उनकी पत्नी नेहा मिश्रा को कानूनी नोटिस जारी कर दिया।

सैलरी अकाउंट फ्रीज और एफडी से जबरन काटे 19.90 लाख रुपये
वसूली की प्रक्रिया के तहत बैंक ने सबसे पहले नेहा मिश्रा का सैलरी अकाउंट पूरी तरह से फ्रीज कर दिया। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद बैंक ने सैलरी अकाउंट को तो अनफ्रीज कर दिया, लेकिन उसके बाद बैंक ने उनकी 19.90 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को तुड़वाकर पूरी रकम लोन चुकता करने के नाम पर काट ली। बैंक की इस एकतरफा और अन्यायपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ पीड़िता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी और ब्याज के साथ रकम लौटाने का आदेश
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने एसबीआई की कार्रवाई को पूरी तरह से अवैध और असंवैधानिक करार दिया। अदालत ने कहा कि जब तक पत्नी लोन में सह-आवेदक या गारंटर न हो, तब तक उससे लोन की वसूली नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने एसबीआई को निर्देश दिया कि वह महिला की एफडी से काटी गई पूरी रकम 19.90 लाख रुपये 6 फीसदी वार्षिक ब्याज के साथ 4 हफ्ते के भीतर वापस करे। इसके साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक केवल मृतक के नाम पर छोड़ी गई संपत्ति से ही लोन की वसूली कर सकता है, न कि उसकी विधवा की व्यक्तिगत जमा पूंजी से।