Updated On: Jul 29, 2026 | 10:33 AM IST

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सार

Ashadha Purnima Parv: आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर छड़ी मुबारक पहलगाम पहुंची। देशभर में शांति, समृद्धि और सफल अमरनाथ यात्रा के लिए विशेष प्रार्थनाएं की गई।

Amarnath Yatra 2026: Big news for the devotees of Baba Barfani; Chhadi Mubarak reached Pahalgam on Ashadh Purnima

आषाढ़ पूर्णिमा (सोर्स सोशल मीडिया)

विस्तार

Amarnath Yatra 2026: आषाढ़ पूर्णिमा के शुभ अवसर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पवित्र छड़ी मुबारक को श्रीनगर स्थित दशनामी अखाड़े से पारंपरिक भूमि पूजन और नवग्रह पूजन की रस्मों के लिए पहलगाम ले जाया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई है।

जानिए महंत दीपेंद्र गिरी ने क्या कहा ?

महंत दीपेंद्र गिरी ने कहा कि मुख्य यात्रा के दौरान देश और जम्मू-कश्मीर में शांति, समृद्धि और सभी लोगों के सुख-समृद्ध जीवन की कामना की जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि बाबा अमरनाथ का आशीर्वाद सभी श्रद्धालुओं पर बना रहेगा। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का सालाना उत्सव धार्मिक उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक हवन व पूजा की रस्मों में हिस्सा लिया।

लाखों श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

पवित्र छड़ी के संरक्षक महंत दीपेंद्र गिरी ने मीडिया को बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी पूजा-अर्चना और यात्रा सुचारु रूप से जारी है। उन्होंने तो यह भी कहा कि अब तक करीब 4.25 लाख श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर सुरक्षित अपने घर लौट चुके हैं। प्रतिकूल मौसम के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और यात्रा का सफल संचालन बेहद संतोषजनक रहा है।

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कल्याण और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश

उन्होंने ने बताया कि प्रतिदिन कम से कम  17 से 18 हजार श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सावन माह की शुरुआत के साथ आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी के कल्याण और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी संदेश देती है। उनके अनुसार, सनातन परंपरा में ईश्वर के साथ-साथ प्रकृति के हर स्वरूप—नदियों, पर्वतों, झरनों, समुद्र और जीव-जंतुओं—की भी श्रद्धा के साथ पूजा की जाती है।

सांस्कृतिक विरासत की सदियों पुरानी परंपरा

इस महत्वपूर्ण अवसर पर आपसी भाईचारे की भावना देखने को मिलती है, इसके साथ ही हिंदू और मुसलमान दोनों ने मिलकर इस मौके को बड़े ही प्रेमपूर्वक भाव से मनाया है। इसमें शामिल होने वाले लोगों ने इस आयोजन को जम्मू-कश्मीर की भाईचारे, मिल-जुलकर रहने और साझा सांस्कृतिक विरासत की सदियों पुरानी परंपरा का प्रतीक माना है।

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श्रद्धालुओं ने मंदिर में की पूजा-अर्चना

उन्होंने विश्वास जताया कि बाबा अमरनाथ का आशीर्वाद सभी श्रद्धालुओं पर बना रहेगा। इससे पहले, जम्मू-कश्मीर के पंपोर में माता ज्वाला जी का सालाना उत्सव धार्मिक उत्साह और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारंपरिक हवन व पूजा की रस्मों में हिस्सा लिया।

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