
रोशिबिना ने जीता सिल्वर (Photo: PTI)
Roshibina Devi, Asian Games 2026: एशियन गेम्स 2026 में रोशिबिना देवी ने भारत की चांदी कराई है. उन्होंने सिल्वर मेडल जीता है. रोशिबिना देवी ने वुशू में महिलाओं की 60 किलो इवेंट में ये मेडल भारत के लिए जीता. फाइनल में मणिपुर की रहने वाली 25 साल की भारतीय वुशू खिलाड़ी का सामना चीन की झांग जियाऊ से था. फाइनल में रोशिबिना को 0-2 से हार का सामना करना पड़ा. फाइनल के नतीजे के साथ ही सिल्वर मेडल पर रोशिबिना देवी का कब्जा हो गया.
हैट्रिक के साथ रचा इतिहास
रोशिबिना देवी फाइनल जीतकर सिल्वर की जगह गोल्ड मेडल जीतने में भले ही नाकाम रहीं, लेकिन उन्होंने एशियन गेम्स में हैट्रिक लगाते हुए इतिहास जरूर रचा. वो एशियन गेम्स में वुशू में मेडल की हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं. 2026 एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली रोशिबिना देवी ने 2022 के एशियन गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीता था. वहीं उससे पहले 2018 एशियन गेम्स में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था.
हर बार चीनी चुनौती बनी बाधा
बड़ी बात ये है कि एशियन गेम्स में रोशिबिना देवी और गोल्ड मेडल के बीच हर बार बाधा चीनी खिलाड़ी ही बनी है. जैसे आइचा नगोया एशियन गेम्स में उन्हें फाइनल में चीनी विरोधी से हार मिली. ठीक वैसे ही पिछले दो एशियन गेम्स में भी रोशिबिना के लिए रुकावट चीनी चुनौती ही बनी थी.
टीम में नहीं था रोशिबिना का नाम, अब रचा इतिहास
आइचा नगोया एशियन गेम्स 2026 में भारत की झोली में सिल्वर मेडल डालने वाली रोशिबिना देवी मणिपुर की दूसरी खिलाड़ी हैं. उनसे पहले मीराबाई चानू ने भी सिल्वर मेडल जीता था. हालांकि, रोशिबिना के लिए ऐसा कर पाना आसान नहीं होता अगर उन्हें किस्मत ने चांस ना दिया होता.
2026 एशियन गेम्स के लिए जो वुशू की टीम का जो सबसे पहले सेलेक्शन हुआ था, उसमें रोशिबिना का नाम नहीं था. उन्हें मौका तब मिला जब दिव्यांशु चौधरी इंजरी के चलते बाहर हो गई. रोशिबिना ने किस्मत से मिले उस मौके को जापान के आइची नगोया में ना सिर्फ भुनाया बल्कि मेडल की हैट्रिक लगाते हुए इतिहास भी रचा.

साकेत शर्मा
'कौन बनेगा करोड़पति' गेम शो से शुरू हुआ सफर न्यूज नेशन, इंडिया न्यूज, इंडिया डॉट कॉम और Editorji जैसे पड़ावों से गुजरा. इसी कड़ी में पिछले 5 सालों से मैं TV9 हिंदी के साथ जुड़ा हूं. यहां भी खेल की खबरों को बताना मेरा काम है. TV, डिजिटल और प्रोडक्शन हाउस, तीनों ही दुनिया की समझ और कुल मिलाकर एक दशक से भी ज्यादा का मेरे पास अनुभव है. हर रोज कुछ नया सीखने और नई क्रिएटिव चीज करने की कोशिश करता हूं. असफलता से घबराता नहीं और सफलता पर इतराता नहीं. बस कोशिश यही करता हूं कि हमेशा अपना बेस्ट दे सकूं. आज तक यही करता आया हूं और आगे भी इरादा ऐसा ही है. फिर चाहे काम डेस्क पर बैठकर खेल की खबरों को अपने शब्दों में पिरोने का हो या फिर फील्ड में उतरकर उसे कैमरे पर उतारने का. सीधी भाषा में कहें तो मैं खेल के मैदान पर होने वाली हर हलचल को आपतक पहुंचाने वाला एक खिलाड़ी हूं.
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