अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी विवाद और इस्तीफों के बाद बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी है। चंपत राय के इस्तीफे के बाद खाली हुए महासचिव पद और अन्य दो रिक्त ट्रस्टी पदों को भरने के लिए आज राम मंदिर परिसर और मणिराम छावनी में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

Champat Rai Replacement, Ram Mandir Trust Posts

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नई SIT जांच और नए पदाधिकारियों के चयन से ट्रस्ट की साख को दोबारा बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

  • Published: 22 Jul 2026, 10:41 AM IST
  • Last Updated: 22 Jul 2026, 10:41 AM IST

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) जांच और सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बीच ट्रस्ट में भारी उथल-पुथल मची है। दान में हेराफेरी के आरोपों और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। इसके अलावा, ट्रस्टी बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा का निधन हो जाने के कारण कुल तीन महत्वपूर्ण पद खाली हो चुके हैं।

वर्तमान में चंपत राय के स्थान पर कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है। आज होने वाली बैठक से पहले एक बार फिर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय महामंत्री बीएल बागड़ा का नाम सबसे तेजी से उभरा है। वे ट्रस्टी के साथ-साथ नए महासचिव पद के भी प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले 6 जुलाई को हुई बैठक में भी बीएल बागड़ा और बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक नीरज दानोदिया के नामों पर विचार किया गया था, और दोनों उस समय अयोध्या में ही मौजूद थे।

हालांकि, तब आंतरिक मतभेदों के चलते नए नामों पर आम सहमति नहीं बन पाई थी और प्रस्ताव को टाल दिया गया था। अब एक बार फिर बीएल बागड़ा के नाम की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आज की इस महत्वपूर्ण बैठक में नए स्थाई महासचिव, दो ट्रस्टियों की नियुक्ति और मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

महासचिव पद के इन नाम पर चर्चा।

बीएल बागड़ा (बजरंग लाल बागड़ा): बीएल बागड़ा वर्तमान में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के केंद्रीय राष्ट्रीय महामंत्री हैं। वे संघ (RSS) और वीएचपी के प्रमुख रणनीतिकारों में गिने जाते हैं। लंबे समय तक संगठनात्मक जिम्मेदारियों और सेवा विभागों का संचालन करने के कारण उनका प्रशासनिक अनुभव बेहद मजबूत है। चंपत राय के इस्तीफे के बाद संगठन और प्रशासनिक दक्षता के लिहाज से उनका नाम सबसे आगे चल रहा है।

कृष्ण मोहन: ​कृष्ण मोहन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य हैं। चंपत राय के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्हें अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नीरज दानोदिया: ​नीरज दानोदिया बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक हैं। वे युवाओं को संगठनात्मक ढांचे से जोड़ने और विश्व हिंदू परिषद के युवा विंग का नेतृत्व करने के लिए जाने जाते हैं। ट्रस्ट के पुनर्गठन में युवाओं और नए नेतृत्व को मौका देने के विचार के तहत उनके नाम की चर्चा है।

ट्रस्टी (सदस्य) पद के इन नाम पर हो सकती है चर्चा।

यतींद्र मोहन मिश्र: अयोध्या राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले यतींद्र मोहन मिश्र देश के जाने-माने साहित्यकार, कवि, संगीत-समीक्षक और सांस्कृतिक चिंतक हैं। उनके पिता स्व. बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। पिता के निधन के बाद अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत और राजपरिवार का प्रतिनिधित्व बनाए रखने के लिए उनका नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है।

महंत कमलनयन दास: ​महंत कमलनयन दास अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ 'मणिरामदास जी की छावनी' के उत्तराधिकारी हैं और ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास जी के शिष्य व उत्तराधिकारी हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अयोध्या के संत समाज में उनका विशेष प्रभाव है।

महंत आचार्य मिथिलेषनंदिनीशरण: ​सिद्धपीठ हनुमाननिवास के महंत आचार्य मिथिलेषनंदिनीशरण रामनगरी के युवा व प्रखर विद्वान संत हैं। वे रामचरितमानस, शास्त्रों और वैष्णव परंपरा के ज्ञाता माने जाते हैं। स्थानीय संतों और श्रद्धालुओं के बीच उनकी अच्छी पैठ है।

महंत राजकुमार दास: ​श्रीरामवल्लभकुंज के अधिकारी महंत राजकुमार दास रामानंद संप्रदाय के वरिष्ठ संत हैं। वे अयोध्या के धार्मिक अनुष्ठानों और संत परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

महंत रामशरणदास: ​अयोध्या के प्रसिद्ध रंगमहल पीठ के पीठाधीश्वर महंत रामशरणदास रामानंदी वैष्णव परंपरा के प्रमुख संत हैं। संत समाज में संतुलन बनाने के लिए उनके नाम पर विचार किया जा रहा है।

डॉ. रामानंददास: ​रामकथा कुंज के पीठाधीश्वर डॉ. रामानंददास धार्मिक विद्वान हैं। वे रामकथा वाचन और शास्त्रीय ज्ञान के लिए जाने जाते हैं।

स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर: ​कौशलेश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर संप्रदाय के स्थापित धर्माचार्य हैं। वैदिक परंपरा और धार्मिक अनुष्ठानों में महारत के कारण उनका नाम ट्रस्टी पद की सूची में शामिल है।

राम मंदिर में चढ़ावे की नोटों की गिनती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को दोबारा पटरी पर लाने के लिए आज की बैठक बेहद निर्णायक है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत नई एसआईटी (SIT) जांच और नए पदाधिकारियों के चयन से ट्रस्ट की साख को दोबारा बहाल करने की कोशिश की जा रही है।