बस्ती जिले के वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। हनीट्रैप और एक करोड़ रुपये की ब्लैकमेलिंग से तंग आकर पुलिस अधिकारी ने खुदकुशी की थी। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी महिला, उसके पिता और वसूली करने वाले वकील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

Honeytrap gang exposed in the suicide case of Walterganj police station chief Surya Prakash Singh in

बस्ती में वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की आत्महत्या मामले में हनीट्रैप गैंग का खुलासा (फाइल फोटो।)

  • Published: 06 Sep 2026, 06:08 PM IST
  • Last Updated: 06 Sep 2026, 06:08 PM IST

बस्ती : बस्ती जिले के वाल्टरगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह द्वारा की गई आत्महत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। सूर्य प्रकाश सिंह ने किसी अवसाद में नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हनीट्रैप और एक करोड़ रुपये की भारी-भरकम ब्लैकमेलिंग से तंग आकर जान दी थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रविवार दोपहर मुख्य आरोपी महिला प्रियंका चौधरी, उसके पिता रामनयन चौधरी और वसूली में शामिल वकील विजय प्रकाश यादव को सदर अस्पताल के सामने से गिरफ्तार कर लिया है।

​प्रेमजाल में फंसाकर बनाए संबंध, फिर शुरू की ₹1 करोड़ की मांग

डीआईजी संजीव त्यागी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि वाल्टरगंज के गांधार निवासी 32 वर्षीय प्रियंका चौधरी मुंबई में ब्यूटी पार्लर व स्पा सेंटरों में काम कर चुकी थी और पिछले 10 वर्षों से अपने पति से अलग रह रही थी। वाल्टरगंज क्षेत्र में तैनाती के दौरान उसकी पहचान थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह से हुई। नजदीकियों के बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध बने।

​इसके बाद प्रियंका ने थानाध्यक्ष के आपत्तिजनक वीडियो व ऑडियो रिकॉर्ड कर लिए। वह व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें लगातार ब्लैकमेल करने लगी और 1 करोड़ रुपये की मांग पर अड़ गई। बात न मानने पर वह वीडियो कॉल पर हाथ की नस काटकर खून निकालने का ड्रामा करती थी और झूठे केस में फंसाकर खुदकुशी करने की धमकी देती थी।

​वकील वसूलता था रकम, पिता भी था सिंडिकेट में शामिल

जांच में सामने आया कि प्रियंका के इस आपराधिक कृत्य में उसका पिता रामनयन चौधरी और वकील विजय प्रकाश यादव पूरी तरह साझेदार थे। वकील विजय प्रकाश पीड़ितों से सौदेबाजी और रकम की वसूली का काम करता था, जिसमें तीनों का तय हिस्सा होता था। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने पूर्व में एक प्रतिष्ठित डॉक्टर सहित तीन अन्य संभ्रांत लोगों से भी 24 लाख रुपये की अवैध वसूली की थी। थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह इस गिरोह का चौथा शिकार बने थे।

​29 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे आई थी आखिरी कॉल

सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड सीडीआर की जांच से पता चला कि 29 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे वकील विजय प्रकाश ने सूर्य प्रकाश सिंह को फोन कर तुरंत 1 करोड़ रुपये देने का भारी दबाव बनाया था। इतनी बड़ी रकम का इंतजाम न कर पाने और सामाजिक बदनामी के भय से आहत होकर थानाध्यक्ष ने कलेक्ट्रेट के पास स्थित अपने सरकारी आवास में फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली।

​खुदकुशी से पहले उन्होंने व्हाट्सएप पर एक भावुक स्टेटस लगाया था, जिसमें लिखा था— "धन-संपदा भी आवश्यक है, परंतु शांति और प्रेम से बढ़कर कुछ भी नहीं है।"

​आजमगढ़ के रहने वाले थे थानाध्यक्ष, 4 साल बाद होना था रिटायरमेंट

मूल रूप से आजमगढ़ जिले के भीलमपुर छपरा गांव निवासी सूर्य प्रकाश सिंह सिद्धार्थनगर से स्थानांतरित होकर बस्ती आए थे। 18 अप्रैल 2026 को उन्हें वाल्टरगंज थाने की कमान सौंपी गई थी। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बड़ा बेटा संदीप सिंह 30 और दो बेटियां हैं। चार साल बाद उनका रिटायरमेंट होना था।

​पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक बोलेरो गाड़ी और तीन मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनमें ब्लैकमेलिंग से जुड़े अहम डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं। विधिक कार्रवाई पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।