सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल के रिहायशी इलाकों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार की 10 सदस्यीय समीक्षा समिति भंग कर दी है। हाईकोर्ट की अंतरिम राहत भी समाप्त कर दी गई है।
भोपाल के रिहायशी इलाकों में अवैध दुकानों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
- Published: 06 Aug 2026, 09:39 AM IST
- Last Updated: 06 Aug 2026, 09:39 AM IST
भोपाल: आवासीय क्षेत्रों में बिना अनुमति संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च अदालत ने राज्य सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय समीक्षा समिति को भंग करते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब मामले की निगरानी स्वयं सुप्रीम कोर्ट कर रहा है, तब समानांतर समिति बनाकर कार्रवाई को प्रभावित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा दुकान संचालकों को दी गई अंतरिम राहत (स्टे) भी समाप्त कर दी गई है।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान भोपाल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि कानून का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
नगर निगम की रिपोर्ट पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान नगर निगम की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े हुए। निगम ने अदालत को बताया था कि उसने 100 अवैध दुकानों को सील कर दिया है, लेकिन सुनवाई में सामने आया कि वास्तव में केवल दो दुकानों पर ही ताले लगाए गए थे। वहीं करीब 1,000 दुकान संचालकों को नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी दी गई।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता और नगर निगम के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि गलत या भ्रामक जानकारी स्वीकार नहीं की जाएगी।
पांच सप्ताह में कार्रवाई के निर्देश
नगर निगम ने अदालत में कार्रवाई में आ रही दिक्कतों का हवाला दिया, लेकिन कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को पांच सप्ताह के भीतर वास्तविक स्थिति सुधारने और नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
रहवासियों में खुशी, व्यापारियों ने जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़ियाकलां जैसे इलाकों के रहवासियों ने इसे बड़ी राहत बताया है। रहवासी संगठनों का कहना है कि रिहायशी क्षेत्रों में दुकानों और कार्यालयों के कारण ट्रैफिक जाम, पार्किंग और सुरक्षा संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही थीं।
वहीं व्यापारी संगठनों ने इस स्थिति के लिए प्रशासनिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पिछले 21 वर्षों से शहर का मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके, जिससे व्यापारियों को मजबूरी में आवासीय क्षेत्रों से कारोबार करना पड़ा।
भोपाल नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि निगम सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन करेगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।