UP News: पूरे देश से कई जातियों-जनजातियों के हजारों सैंपल लेने और दस साल के रिसर्च के बाद जो सामने आया है वो विदेशी साजिश को तो खारिज करता ही है. देश में साझी संस्कृति और साझी विरासत को वैज्ञानिक आधार पर भी मजबूत करता है. डीएनए साईंटिस्ट और बीएचयू में जूलॉजी के सीनियर प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे और उनकी टीम ने दस साल के रिसर्च के बाद ये बताया है, ‘भारत में दलित से लेकर ब्राह्मण तक सभी के पूर्वज एक ही हैं’.
ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि दो हजार साल पहले ब्राह्मण और क्षत्रीय एक ही व्यक्ति थे. इन्हीं लोगों का गुजरात के पटेल समुदाय के साथ आनुवंशिक जुड़ाव लगभग 3500 साल पुराना पाया गया. 3500 साल पहले ब्राह्मण-क्षत्रिय और ओबीसी एक ही व्यक्ति थे, जबकि आठ हजार साल पहले ‘ब्राह्मण-क्षत्रिय और दलित सबके पूर्वज एक ही थे’. भारत की प्राचीन संथाल जनजाति के साथ यह आनुवंशिक और डीएनए कनेक्शन 8000 साल पुराना है.
विदेशी सिद्धांत यूरोसेनट्रिक दावों को किया खारिज
ज्ञानेश्वर चौबे ने विदेशी सिद्धांत यूरोसेनट्रिक दावों को खारिज कर कहा कि भारत के लोगों को खांचे में बांटना हार्वर्ड की एक सोची-समझी साजिश है. हजारों डीएनए सैंपल के अध्ययन से यह समझ आया है कि आनुवंशिक रूप से ऐसी कोई भी दो अलग-अलग नस्लें भारत में कभी नहीं रहीं. प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने भारतीयों को उत्तर-दक्षिण या आर्य-द्रविड़ के आधार पर बांटने वाली हार्वर्ड की थ्योरी को भ्रामक बताया.
उन्होंने कहा कि भारत में ब्राह्मण से लेकर दलित तक के लोगों के पूर्वज एक हैं. प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि आज तकनीकी सुविधा की वजह से आप जिनोम को इन डेप्थ जाकर उसके कई हज़ार साल का इनफार्मेशन ले सकते हैं. उसमें कई हजार साल की इंप्रिंटिंग होती है और जब आप जिनोम को पढ़ते हैं तो फिर सारी चीजें स्पष्ट हो जाती हैं.
दो अलग-अलग नस्लें भारत में कभी नहीं रहीं- ज्ञानेश्वर चौबे
प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि भारत के लोगों को जानबूझकर दो अलग अलग खांचे एंसेस्ट्रल नॉर्थ इंडियन और एंसेस्ट्रल साउथ इंडियन (एएनआइ-एएसआइ) में बांटना हावर्ड की एक सोची-समझी साजिश है, जिसका उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना है. हजारों डीएनए सैंपल के अध्ययन से पता चला कि आनुवंशिक रूप से ऐसी कोई भी दो अलग-अलग नस्लें भारत में कभी नहीं रहीं. एक समय तक ब्राह्मण और दलित दोनों के पूर्वज एक ही थें.
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अमित कुमार सिंह
पिछले 15 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय, 2008 सितम्बर में नई दुनियां अख़बार दिल्ली से पत्रकारिता शुरू की. अप्रैल 2009 में ज़ी मीडिया जॉइन किया. दिसंबर 2018 तक ज़ी मीडिया में बतौर ब्यूरो चीफ बनारस रहा. जनवरी 2019 से जनतंत्र टीवी में गए और 2021 तक जिम्मेदारी निभाई. रोमिंग जर्नलिस्ट के तौर पर जनतंत्र टीवी के लिए स्पेशल करेस्पोंडेंट की हैसियत से दिल्ली, बिहार-झारखंड और लखनऊ में अपनी सेवाएं दीं. टीवी 9 यूपी का हिस्सा बनने से पहले न्यूज़ नेशन गोरखपुर में बतौर ब्यूरो चीफ़ की भूमिका में रहे. फिलहाल टीवी 9 यूपी (डिजिटल) के लिए बनारस से सेवाएं दे रहे हैं.
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