Time Published: Friday, July 17, 2026, 20:25 [IST]

Anand Mohan Singh Supreme Court verdict: क्या पूर्व सांसद आनंद मोहन को फिर जेल जाना पड़ सकता है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि उनकी समय से पहले हुई रिहाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान कई सख्त सवाल पूछे।

कोर्ट ने साफ कहा कि ड्यूटी पर तैनात किसी सरकारी अधिकारी की हत्या जैसे मामले में राहत का संदेश जाना समाज के लिए ठीक नहीं है। फिलहाल अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

Anand Mohan Singh Supreme Court verdict

'सरकारी अफसर की हत्या को हल्के में कैसे ले सकते हैं?'

सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने पूछा कि ड्यूटी निभा रहे एक लोकसेवक की हत्या को 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में क्यों नहीं माना गया। कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे मामलों में दोषियों को राहत मिलती है तो इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है। अदालत ने इस पर गंभीर चिंता जताई।

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16 साल बाद जेल में हुई थी रिहाई

आनंद मोहन को 2007 में ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी। बाद में पटना हाईकोर्ट ने इसे उम्रकैद में बदल दिया और 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उसी फैसले को बरकरार रखा। लेकिन 2023 में बिहार सरकार ने जेल नियमों में बदलाव किया, जिसके बाद करीब 16 साल जेल में रहने के बाद 27 अप्रैल 2023 को उन्हें रिहा कर दिया गया।

अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर

आनंद मोहन की रिहाई को जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने याचिकाकर्ता, बिहार सरकार, आनंद मोहन और राज्य सजा माफी बोर्ड की दलीलें सुन ली हैं। अब फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। अगर कोर्ट रिहाई को गलत ठहराता है तो आनंद मोहन को दोबारा जेल जाना पड़ सकता है। हालांकि अंतिम तस्वीर अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही साफ होगी।

क्या था वो मामला? जिसमें आनंद मोहन को हुई थी सजा

दरअसल, आनंद मोहन को 1994 में तत्कालीन गोपालगंज के जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। 5 दिसंबर 1994 को मुजफ्फरपुर में एक गैंगस्टर के अंतिम संस्कार के दौरान उग्र भीड़ ने डीएम जी. कृष्णैया की गाड़ी रोक ली और उन पर हमला कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई। इस मामले में आनंद मोहन पर भीड़ को उकसाने और हिंसा के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगा। 2007 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया।

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बिहार सरकार का वो नियम जो बना आनंद मोहन की रिहाई की वजह?

वर्ष 2023 में बिहार सरकार ने जेल मैनुअल, 2012 के नियम 481(i)(a) में संशोधन किया। पहले ड्यूटी पर तैनात लोकसेवक की हत्या के दोषियों को समयपूर्व रिहाई का लाभ नहीं मिल सकता था। संशोधन के बाद यह प्रतिबंध हटा दिया गया, जिससे ऐसे कैदियों को भी सजा माफी और समयपूर्व रिहाई के लिए पात्र बना दिया गया। इसी बदलाव के आधार पर आनंद मोहन समेत 27 दोषियों को समय से पहले रिहा किया गया। बाद में इसी संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।