Updated On: Aug 04, 2026 | 05:09 PM IST
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सार
Ravindra Shukla Viral Post: बांकीपुर और दतिया जैसे सीटों पर मिली करारी शिकस्त की समीक्षा में जुटी भाजपा को उनके ही पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक डॉ रविंद्र शुक्ल ने तंज भरे लहजे में आईना दिखाया है।

पूर्व मंत्री रविंद्र शुक्ला, (सोर्स- सोशल मीडिया)
विस्तार
Former UP Minister Ravindra Shukla: बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे सोमवार को सामने आए। जहां भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। बिहार के बांकीपुर सीट से जनसुराज के प्रशांत किशोर की जीत हुई है। वहीं, मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह बीजेपी के आशुतोष तिवारी को हराकर विजयी हुए। हालांकि, राहत की बात रही कि गुजरात के मंजालपुर से बीजेपी उम्मीदवार सतीश पटेल चुनाव जीत गए।
बांकीपुर और दतिया जैसे सीटों पर मिली करारी शिकस्त की समीक्षा में जुटी भाजपा को उनके ही पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक डॉ रविंद्र शुक्ल ने तंज भरे लहजे में आईना दिखाया है। दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ‘देवता जब जब मदमस्त हुए… तब तब असुरों ने उनको धूल चटाई है। भारतीय शास्त्रों में यही प्रमाण है’। उनके इस पोस्ट के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।
पूर्व मंत्री के पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया
भाजपा के पूर्व विधायक के इस पोस्ट पर कई तरह की प्रक्रिया भी देखने को मिल रही हैं। इस पोस्ट पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा कि हर समय कोई भी पक्ष सही नहीं हो सकता। अति का परिणाम अंततः क्षति ही होता है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। चाहे दतिया का चुनाव हो या दिल्ली का जंतर-मंतर आंदोलन- हर घटना एक संदेश देती है। लोकतंत्र में जनभावनाओं को समझना, समय रहते आत्ममंथन करना और उनसे सीख लेना ही सशक्त नेतृत्व की पहचान है। यदि आप चाहें, तो इसे और अधिक तीखा, तटस्थ या काव्यात्मक शैली में भी तैयार किया जा सकता है।
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एक अन्य यूजर ने लिखा कि सर जी देवता से आपका आशय बीजेपी के लोगों से है, वो भी मदमस्त है और यही कारण होगा 2027 में उलटफेर का। क्योकि समस्त सरकारी डिपार्टमेंट योगी जी को हराने वाले कार्य कर रहे हैं। चाहे बिजली के बिल मीटर हो या गरीब जनता की गाड़ियों के चालान हो।
भाजपा नेतृत्व पर उठ रहे कई सवाल
वहीं, एक अन्य कमेंट लिखा गया कि भाजपा का कोर वोटर और कार्यकर्त्ता सरकार और भाजपा से नाराज जरूर था, लेकिन वोट उसने विरोधी पार्टी को भी नही दिया। न ही पाटी के खिलाफ विरोधी पार्टी का प्रचार किया। इसका साक्षात प्रमाण है कि बिहार चुनाव में वोटिंग प्रतिशत 34-35% रहा, और पार्टी चुनाव हार गई। ये इसलिए हुआ क्योंकि जमीनी मूल कार्यकर्त्ता को संगठन में सम्मान नही दिया जा रहा है, जो घर घर वोटर निकालने का काम करते थे और जो चाटूकार, दल-बदलू पदाधिकारी थे वो केवल सोशल मीडिया पर फोटो सेशन करते रहे।
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मेरी तो संगठन को यही सलाह है मूल कार्यकर्ता के घर जाओ, उसे उचित सम्मान दो, दलबदलुओं पर भरोशा कतई नकरो,क्योंकि दल बदलू सरकार से लेने आये हैं, संगठन को कुछ भी देने नही आये हैं। पार्टी विरोधी पार्टियों की सक्रीयता से नही वल्कि पार्टी के जमीनी मूल कार्यकर्त्ताओं की निष्क्रियता से दोनों चुनाव हारी है।
