पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी पूरी ताकत से जुटी हुई है। सबसे पहले संगठन पर फोकस किया जा रहा है। बीजेपी ने 36 जिलों में जिला प्रभारी व सह-प्रभारी की नियुक्ति की है। इसमें 10 से अधिक पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और पूर्व विध
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दूसरी पार्टियों से आए इन नेताओं को कमान
पार्टी ने अपने पुराने बीजेपी कैडर के साथ-साथ हाल के वर्षों में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल से बीजेपी में शामिल हुए वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक अनुभव व जमीनी जनाधार का इस्तेमाल पूरे राज्य में संगठन खड़ा करने के लिए किया है। कांग्रेस से बीजेपी आए पूर्व मंत्री अश्विनी सेखड़ी को अमृतसर रूरल का प्रभारी बनाया गया है।
वहीं, आम आदमी पार्टी छोड़कर आए पूर्व सांसद सुशील रिंकू को मलेरकोटला जिले का प्रभारी नियुक्त किया गया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) से आए दिग्गजों और राजनीतिक घरानों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. निर्मल सिंह काहलों के बेटे रविकरण सिंह काहलों को बटाला का प्रभारी बनाया गया है, जबकि अकाली दल के पूर्व मुख्य सचेतक चरणजीत सिंह बराड़ को मोगा की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, कांग्रेस से बीजेपी में आईं जालंधर की पूर्व सांसद संतोख चौधरी की पत्नी करमजीत कौर चौधरी को जालंधर रूरल (साउथ) का प्रभारी बनाया गया है।

गठबंधन टूटने से दोनों पार्टियों का नुकसान
माना जा रहा है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल व बीजेपी इकट्ठे लड़ सकते हैं। सुखबीर बादल की पीएम नरेंद्र मोदी से दिल्ली में हुई मुलाकात को भी इस चीज से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, 2020 में किसान आंदोलन की वजह से दोनों की राहें अलग हुई थीं। उस समय से दोनों पार्टियां नुकसान उठा रही हैं। 2017 तक लगातार दस साल दोनों पार्टियां सत्ता में रही हैं।
बीजेपी ने 2022 विधानसभा में 73 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2 सीटें जीतीं। करीब 6.6% वोट शेयर रहा था। 2024 लोकसभा में 0 सीट मिली। लेकिन वोट शेयर बढ़कर 18.56% हो गया। यानी BJP का वोट आधार बढ़ा, लेकिन वह इसे लोकसभा सीटों में तब्दील नहीं कर सकी।
इसी तरह 2022 विधानसभा चुनाव में अकाली दल को 3 सीटें, जबकि 2017 में गठबंधन के दौरान 15 सीटें मिली थीं। 2024 लोकसभा चुनाव में 1 सीट, बठिंडा से हरसिमरत कौर बादल। यानी SAD के लिए अलग चुनाव लड़ने का सबसे बड़ा नुकसान सीटों में साफ दिखाई देता है।