राजधानी लखनऊ के निगोहां इलाके से किश्त वसूली और अमानवीयता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक युवक द्वारा 21,500 रुपये के मोबाइल फोन की किश्त न चुका पाने पर दुकानदारों ने उसे अगवा कर लिया। आरोपियों ने युवक को ब्लड बैंक ले जाकर जबरन उसका खून निकलवाया, सदर इलाके में बंधक बनाकर मजदूरी कराई और जान से मारने की धमकी दी।
परिजनों का आरोप है कि घटना की शिकायत निगोहां थाने में करने के बाद भी पुलिस ने सुनवाई नहीं की।
- Published: 15 Sep 2026, 12:31 PM IST
- Last Updated: 15 Sep 2026, 12:31 PM IST
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र के राजारामखेड़ा गांव निवासी नेवल नाम के युवक के साथ मोबाइल फाइनेंस किश्त वसूली को लेकर गंभीर प्रताड़ना का मामला सामने आया है। पीड़िता बुजुर्ग मां जदूराई और परिवार के बयानों के आधार पर, दुकानदारों ने न केवल युवक को बंधक बनाया बल्कि किश्त की भरपाई के लिए उसका एक यूनिट खून भी निकलवा लिया। मामला डीसीपी दक्षिणी तक पहुंचने के बाद अब निगोहां पुलिस की भूमिका की जांच के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए गए हैं।
21,500 रुपये का फोन और किश्त विवाद की शुरुआत
पीड़ित के भाई राजकुमार और मां जदूराई के अनुसार, लगभग एक साल पहले नेवल ने निगोहां कस्बे की गीता मोबाइल शॉप से 21,500 रुपये का सैमसंग फोन जीरो डाउन पेमेंट पर खरीदा था। इसकी 2,799 रुपये प्रति माह की 12 किश्तें तय हुई थीं। पहली किश्त बकाया होने पर दुकान के लोग उनके घर पहुंचे और फोन छीनकर ले गए। फोन वापस ले जाने के बावजूद करीब एक साल बाद आरोपियों ने दोबारा परिजनों पर पैसे देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया।
अपहरण, जबरन खून निकलवाना और बंधक बनाकर मजदूरी
आरोप है कि 8 सितंबर को दो आरोपी स्कूटी से गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए। आरोपी उसे लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले गए, जहां उसका जबरन एक यूनिट खून निकलवाया गया। इसके बाद नेवल को सदर इलाके के एक मकान में कई दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया और उससे जबरन मजदूरी कराई गई।
इस दौरान आरोपियों ने पीड़ित के भाई राजकुमार को फोन कर किश्त के नाम पर 2,799 रुपये की और मांग की तथा पैसे न देने पर नेवल को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी दी।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल और डीसीपी का कड़ा एक्शन
परिजनों का आरोप है कि घटना की शिकायत निगोहां थाने में करने के बाद भी पुलिस ने सुनवाई नहीं की। आरोप है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पांचवें दिन नेवल को रैपिडो कैब से थाने भेजा गया और उसका किराया भी भाई से भरवाया गया। थाने पहुंचने पर जब बदहवास नेवल के परिवार ने कार्रवाई की मांग की तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें ही फंसाने की धमकी देकर भगा दिया।
इसके बाद पीड़ित की बुजुर्ग मां डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचीं। डीसीपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी और स्थानीय पुलिस की लापरवाही की जांच के आदेश दिए हैं।