नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच पूरी दुनिया की नजर भारत पर टिकी हुई है। वैश्विक संघर्ष, अमेरिकी टैरिफ का दबाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वैश्विक मीडिया ने ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका, भारत की कूटनीतिक स्थिति और संगठन के सामने मौजूद चुनौतियों को प्रमुखता से जगह दी है।

कई देशों के अमेरिका और चीन के साथ बदलते संबंधों के बीच ब्रिक्स को एक ऐसे मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां सदस्य देश पश्चिमी देशों के प्रभाव से अलग आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

बीबीसी ने भारत की कूटनीतिक सफलता को रेखांकित किया

ब्रिटिश मीडिया संस्थान BBC ने BRICS को वैश्विक राजनीति और कूटनीति में विरोधाभासों से भरा संगठन बताया। रिपोर्ट में सम्मेलन के घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा और पहलगाम हमले के उल्लेख को भारत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा गया।

पहलगाम हमले का विशेष उल्लेख भारत के लिए इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है।

वाशिंगटन पोस्ट ने बताया कठिन कूटनीतिक संतुलन

अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने ब्रिक्स की मेजबानी को भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन की चुनौती बताया। भारत के अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ मजबूत संबंध हैं, वहीं वह रूस और ईरान जैसे देशों के साथ भी इसी मंच पर काम कर रहा है।

ऐसे में भारत के सामने अलग-अलग देशों के हितों के बीच संतुलन कायम रखने की चुनौती है। सम्मेलन को नई दिल्ली की बहुपक्षीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सीएनएस: डॉलर के दबदबे को चुनौती देता ब्रिक्स

सीएनएन ने ब्रिक्स को पश्चिमी प्रभुत्व और अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभाव के लिए संभावित चुनौती के रूप में पेश किया। रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली में हो रहा सम्मेलन भारत के लिए अपनी कूटनीतिक और रणनीतिक भूमिका को प्रदर्शित करने का अहम मौका है।

ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था जैसे मुद्दे भी लंबे समय से चर्चा में हैं।

ईरान और पाकिस्तान के मीडिया ने भी बताई चुनौतियां

ईरान के तेहरान टाइम्स ने ब्रिक्स को अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान के लिए आर्थिक अवसरों वाला मंच बताया। रिपोर्ट में सदस्य देशों की साझा सुरक्षा और रणनीतिक चिंताओं पर सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

वहीं पाकिस्तानी अखबार डान ने ब्रिक्स को पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने वाला संगठन बताते हुए उसकी आंतरिक चुनौतियों को भी रेखांकित किया। रिपोर्ट में ईरान पर हमलों के बाद सदस्य देशों के बीच सामने आए मतभेदों का जिक्र किया गया।

कुल मिलाकर वैश्विक मीडिया की रिपोर्टों में ब्रिक्स की बढ़ती ताकत को स्वीकार किया गया है, लेकिन सदस्य देशों के अलग-अलग रणनीतिक हित और आपसी मतभेद इसके सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।