Time Published: Thursday, September 10, 2026, 11:51 [IST]

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अब बसपा से पूरी तरह बाहर कर दिया है। कुछ दिन पहले ही उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटाया गया था। अब उनकी पार्टी सदस्यता और संगठन में किसी भी भूमिका का रास्ता भी बंद कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे वक्त आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज होनी है।

दिलचस्प बात यह है कि आकाश आनंद पर कार्रवाई के बीच उनके ससुर और बसपा के पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। यानी एक तरफ मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर किया, तो दूसरी तरफ अशोक सिद्धार्थ ने खुद राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी। अब सवाल यही है कि आखिर बसपा में ऐसा क्या हुआ कि बात आकाश आनंद से निकलकर उनके ससुर के राजनीतिक भविष्य तक पहुंच गई?

Mayawati Akash Anand

आकाश आनंद पर मायावती का बड़ा फैसला क्या है?

मायावती ने 3 सितंबर को ही आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था। तब उन्होंने आकाश को राजनीतिक जिम्मेदारियों के लिए अभी और परिपक्व होने की जरूरत बताई थी। अब ताजा फैसले में मायावती ने उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह मुक्त कर दिया। यानी फिलहाल आकाश आनंद बसपा के संगठन में कोई पद या जिम्मेदारी नहीं संभालेंगे। मायावती के ताजा बयान से साफ है कि यह फैसला अचानक नहीं आया।

इसके पीछे लंबे समय से चल रहा पारिवारिक और राजनीतिक टकराव है। विवाद के केंद्र में आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ भी हैं। मायावती का आरोप है कि निजी रिश्ते और पार्टी की राजनीति के बीच आकाश उस तरह का फैसला नहीं ले पा रहे थे, जिसकी उनसे उम्मीद थी।

अशोक सिद्धार्थ ने क्यों लिया राजनीति से संन्यास?

मायावती ने 09 सितंबर को ही अशोक सिद्धार्थ को राजनीति से पूरी तरह हटने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि अगर अशोक सिद्धार्थ पहले ही राजनीति से दूरी बना लेते, तो आकाश आनंद के लिए भी पार्टी में काम करना आसान होता। मायावती ने यह भी संकेत दिया था कि अशोक सिद्धार्थ के सक्रिय राजनीति में रहने से आकाश के राजनीतिक सफर पर असर पड़ रहा है।

इसके करीब 24 घंटे के भीतर अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि वह सक्रिय राजनीति के साथ सामाजिक जीवन से भी दूरी बना रहे हैं। अपने संदेश में उन्होंने मायावती और बसपा के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। उन्होंने यहां तक कहा कि उनके लिए मायावती का आदेश किसी भी व्यक्तिगत रिश्ते से ऊपर है और अगर बहुजन मिशन के लिए उन्हें कोई बड़ा त्याग करना पड़े तो वह उसे भी खुशी से स्वीकार करेंगे।

मायावती ने फिर भी क्यों साधा निशाना?

यहीं से कहानी और दिलचस्प हो जाती है। अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद भी मायावती ने इसे पूरी तरह संतोषजनक फैसला नहीं माना। उन्होंने कहा कि यह कदम सही है लेकिन बहुत देर से उठाया गया है। उनके मुताबिक, अगर अशोक सिद्धार्थ पहले ही राजनीति से हट जाते तो बसपा, बहुजन आंदोलन और खुद आकाश आनंद को बार-बार मुश्किल दौर से नहीं गुजरना पड़ता।

मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक मंशा पर भी सवाल उठाए। उनका तर्क था कि अगर उन्हें वास्तव में आकाश के राजनीतिक भविष्य और बसपा के हित की चिंता होती तो वह पहले ही राजनीति छोड़ देते। मायावती ने यह तक कहा कि संन्यास के बाद भी उनकी महत्वाकांक्षा को लेकर सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।

आकाश ने मायावती की पोस्ट क्यों नहीं की रिपोस्ट?

मायावती के ताजा बयान में एक और बात खास रही। उन्होंने आकाश आनंद के सोशल मीडिया व्यवहार को भी निशाने पर लिया। मायावती ने कहा कि आकाश पहले उनके एक्स पोस्ट को लगातार रिपोस्ट करते थे। लेकिन जब अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा उनका संदेश आया, तो आकाश ने उसे आगे नहीं बढ़ाया।

मायावती ने इसे सिर्फ सोशल मीडिया का मामला नहीं माना। उनके मुताबिक, इससे यह संकेत मिलता है कि आकाश पार्टी से ज्यादा पारिवारिक रिश्तों को तवज्जो दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति पार्टी और परिवार के बीच इस तरह उलझा हुआ है, तो वह बहुजन आंदोलन के लिए पूरी तरह समर्पित होकर कैसे काम करेगा।

अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को क्या जवाब दिया?

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संन्यास संदेश में मायावती के प्रति बेहद भावुक अंदाज अपनाया। उन्होंने अपने करीब 35 साल के बसपा सफर का जिक्र किया। उनका कहना था कि कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के मिशन से जुड़े रहने और मायावती के नेतृत्व की वजह से ही एक सामान्य कार्यकर्ता को संसद और विधानमंडल तक पहुंचने का मौका मिला।

उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि वह बसपा पर प्रभाव जमाने या आकाश आनंद को अपने हिसाब से चलाने की कोशिश कर रहे हैं। अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि पिछले कई महीनों में आकाश से उनकी मुलाकात भी बेहद सीमित रही है और वह उन्हें राजनीतिक दिशा देने की स्थिति में नहीं रहे।

उन्होंने एक अहम बात और कही। उनके मुताबिक, आकाश उनके दामाद होने से पहले मायावती के भतीजे हैं और बहुजन आंदोलन से जुड़े परिवार में पले हैं। इसलिए उन्हें यह मानना ही गलत है कि कोई मामूली कार्यकर्ता उन्हें आसानी से प्रभावित कर सकता है।

क्या आकाश आनंद फिर बसपा में वापसी कर सकते हैं?

यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। अशोक सिद्धार्थ ने संन्यास ले लिया है। लेकिन मायावती ने इसके बाद आकाश आनंद को वापस जिम्मेदारी देने का फैसला नहीं किया। उल्टा उन्हें पार्टी से ही पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अशोक सिद्धार्थ के संन्यास से आकाश की बसपा में वापसी तय हो गई है। ताजा घटनाक्रम इसका उल्टा संकेत देता है।

दरअसल, आकाश आनंद का बसपा के भीतर सफर पहले भी कई उतार-चढ़ाव देख चुका है। उन्हें मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था। बाद में उन्हें जिम्मेदारियों से हटाया गया और फिर पार्टी में वापस लाया गया। अब सितंबर 2026 में एक बार फिर उनका राजनीतिक भविष्य सवालों के घेरे में है।

आकाश आनंद पर फैसला लेने के साथ मायावती ने बसपा के कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य भी दे दिया है। उन्होंने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से कहा है कि विरोधियों के हर राजनीतिक दांव का मजबूती से मुकाबला किया जाए। खासकर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने पूरी ताकत लगाने की अपील की है।

मायावती का लक्ष्य साफ है। वह फिर से उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का दावा कर रही हैं। इसके लिए उन्होंने पार्टी की पुरानी लाइन 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' को आगे रखा है। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि मायावती फिलहाल पार्टी के भीतर किसी भी तरह के पारिवारिक प्रभाव को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रही हैं।

आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ का मामला सिर्फ दो नेताओं के राजनीतिक भविष्य का सवाल नहीं है। यह उस नेतृत्व मॉडल का भी संकेत है, जिसे मायावती 2027 के चुनाव से पहले बसपा में लागू करना चाहती हैं।