CBI Bank Fraud Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 212.34 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के मामले में IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी और उसके निदेशकों पर मुकदमा दर्ज किया है.

Google Search

CBI Bank Fraud Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 212.34 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी के मामले में IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी और उसके निदेशकों पर मुकदमा दर्ज किया है.

author-image

New Update

CBI

रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ CBI ने दायर की चार्जशीट

CBI Bank Fraud Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ₹212.34 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड के मामले में मुंबई स्थित IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और उसके प्रबंध निदेशकों व निदेशकों के खिलाफ केस दर्ज किया है. यह मामला केनरा बैंक की मुंबई के बांद्रा ईस्ट स्थित सर्किल ऑफिस की शिकायत पर दर्ज किया गया है. CBI ने मामले में 21 अक्टूबर 2026 को केस दर्ज करने के बाद मुंबई, दिल्ली और नोएडा समेत कई जगहों पर छापेमारी की. इस दौरान बैंक खातों, संपत्तियों, म्यूचुअल फंड निवेश और कंपनी के वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए.

100 करोड़ रुपये और 5 करोड़ डॉलर के कर्ज का मामला

CBI के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि IL&FS एनर्जी डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड ने अपने प्रबंध निदेशकों, निदेशकों और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर कथित आपराधिक साजिश रची. आरोप है कि कंपनी ने तत्कालीन सिंडिकेट बैंक, जो अब केनरा बैंक है, की मुंबई स्थित LCB शाखा से 100 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था. इसके अलावा बैंक की लंदन शाखा से 5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का कर्ज भी लिया गया था.

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि कर्ज के रूप में मिली रकम का इस्तेमाल उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया, जिनके लिए बैंक ने इसे मंजूरी दी थी. इसके बजाय, कथित तौर पर रकम को कंपनी से जुड़ी अन्य सहयोगी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह भेजा गया. इससे शिकायतकर्ता बैंक को 212.34 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है.

CBI ने इस मामले में धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराधों से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की है.

कंपनी के इन अधिकारियों के खिलाफ मामला

CBI की ओर से दर्ज मामले में कंपनी के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों के रूप में निम्नलिखित लोगों के नाम शामिल हैं:

  • सुनील वाधवा
  • अनूप सेठ
  • हरि शंकरन
  • रमेश चंद्र बावा
  • अरुण कुमार साहा

इनके अलावा अज्ञात सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों को भी मामले में शामिल किया गया है. आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है. जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित वित्तीय अनियमितताओं में उनकी भागीदारी का पता लगाया जाएगा.

मुंबई, दिल्ली और नोएडा में छापेमारी

मामला दर्ज करने के बाद CBI ने कंपनी के प्रबंध निदेशकों और निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया. ये तलाशी मुंबई, दिल्ली और नोएडा समेत विभिन्न स्थानों पर की गई.

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए. इनमें बैंक से जुड़े दस्तावेज, जमा पर्चियां, म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो के रिकॉर्ड, निदेशकों के बैंक खातों और संपत्तियों का विवरण तथा कंपनी के लेजर शामिल हैं. इन दस्तावेजों की जांच से कर्ज की रकम के इस्तेमाल और कथित तौर पर उसे दूसरी कंपनियों के जरिए भेजे जाने के संबंध में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है.

अब कहां तक पहुंची जांच?

CBI मामले की आगे जांच कर रही है. जांच एजेंसी का उद्देश्य कथित साजिश की पूरी कड़ी का पता लगाना, इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका की पहचान करना और कर्ज के रूप में मिली रकम के अंतिम इस्तेमाल का पता लगाना है.

जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं में किसी सरकारी अधिकारी या अन्य निजी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं. फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है.

यह भी पढ़ें: परविंदर सिंह झोटा की हत्या मामले में CBI ने दर्ज की एफआईआर, पंजाब पहुंचकर शुरू की जांच