चंडीगढ़ में एफआईआर दर्ज करने के बदले 5 लाख रुपये रिश्वत मांगने के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किए गए बापूधाम पुलिस चौकी प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश कुमार और एएसआई भगत सिंह को सीबीआई अदालत में पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों को न्यायिक हिरासत में

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एफआईआर के अनुसार इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने एक ज्वेलरी कारोबारी से एफआईआर दर्ज करने के बदले 5 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। साथ ही चोरी का सामान बरामद होने पर उसकी कीमत का 20 प्रतिशत हिस्सा भी मांगा गया था। शिकायत की जांच में आरोप सही मिलने के बाद सीबीआई ने इंस्पेक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

इससे पहले सीबीआई ने सेक्टर-39 थाने में तैनात एएसआई हितेश को 40 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद डीजीपी ने सख्त कार्रवाई करते हुए सेक्टर-39 थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राजीव कुमार को लाइन हाजिर कर दिया था। अब देखना होगा कि इस मामले में भी प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कोई बड़ी कार्रवाई करते हैं या नहीं।

ज्वेलरी दुकान में सोने-चांदी और नकदी चोरी

शिकायतकर्ता सुखजीत सिंह सेक्टर-26 स्थित बापूधाम कॉलोनी में ज्वेलरी की दुकान चलाते हैं। उनके पिता निर्मल सिंह इस दुकान के मालिक थे, जिनका अप्रैल 2026 में निधन हो गया। पिता की मौत के बाद जब सुखजीत सिंह ने कारोबार संभाला तो खातों और स्टॉक की जांच में गड़बड़ी मिली। सीसीटीवी फुटेज देखने पर दुकान की मैनेजर रेशमा उर्फ रानी पर कई बार नकदी चोरी करने का आरोप सामने आया। भौतिक जांच में करीब 250 ग्राम सोना, 10 किलो चांदी और बड़ी मात्रा में नकदी गायब मिली।

रिश्वत लेने के बाद सीबीआई आरोपी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले जाती हुई।

रिश्वत लेने के बाद सीबीआई आरोपी को गिरफ्तार कर अपने साथ ले जाती हुई।

27 मई को शिकायत FIR नहीं हुई दर्ज

शिकायतकर्ता ने 27 मई 2026 को चोरी की शिकायत चंडीगढ़ पुलिस के पोर्टल पर दर्ज कराई थी। यह शिकायत जांच के लिए बापूधाम पुलिस चौकी भेजी गई, जहां एएसआई भगत सिंह को जांच सौंपी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कई बार चक्कर लगाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। बाद में एएसआई ने उन्हें चौकी प्रभारी इंस्पेक्टर सुरेश कुमार से मिलने के लिए कहा।

उसके बाद 18 जुलाई, 2026 को जब शिकायतकर्ता इंस्पेक्टर सुरेश कुमार से मिला और एफआईआर दर्ज करने की मांग की, तब इंस्पेक्टर ने 5 लाख रुपये रिश्वत मांगी। आरोप है कि उन्होंने कहा कि 2.50 लाख रुपये एफआईआर दर्ज होने से पहले और 2.50 लाख रुपये एफआईआर दर्ज होने के बाद देने होंगे। इसके अलावा चोरी का सामान बरामद होने पर उसकी कीमत का 20 फीसदी हिस्सा भी देने की मांग की गई।

बयान लेने के बाद फिर रिश्वत की मांग

शिकायत के अनुसार जुलाई के अंतिम सप्ताह में इंस्पेक्टर सुरेश कुमार ने शिकायतकर्ता को फिर पुलिस चौकी बुलाया। वहां उसका बयान दर्ज किया गया और शिकायत से जुड़े दस्तावेज भी लिए गए। इसके बाद भी इंस्पेक्टर ने कथित रूप से 5 लाख रुपये रिश्वत की मांग दोहराई और पहले 2.50 लाख रुपये देने की शर्त रखी। शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने से इनकार करते हुए सीबीआई से कार्रवाई की मांग की।

शिकायतकर्ता और इंस्पेक्टर के बीच हुई रिकॉर्डेड बातचीत भी सुनी

सीबीआई को शिकायत मिलने के बाद 1 अगस्त को पूरे मामले की जांच की गई। इस दौरान शिकायतकर्ता और इंस्पेक्टर के बीच हुई रिकॉर्डेड बातचीत भी सुनी गई। जांच में सामने आया कि इंस्पेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने के लिए 5 लाख रुपये रिश्वत मांगी थी। इसमें 2.50 लाख रुपये पहले और 2.50 लाख रुपये बाद में देने की बात कही गई थी। इसके बाद 3 अगस्त को सीबीआई ने इंस्पेक्टर सुरेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज कर दिया और मामले की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर पवन लांबा को सौंप दी। सीबीआई अब इस मामले में एएसआई भगत सिंह की भूमिका की भी जांच कर रही है।