सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) और री-इवैल्यूएशन पोर्टल से जुड़ी शिकायतों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। करीब 1.68 लाख छात्रों की आपत्तियों के बीच चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अध्यक्षता वाली पीठ ने इसे छात्रों के करियर से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला बताया।

 Supreme Court Order

सुप्रीम कोर्ट

  • Published: 21 Aug 2026, 04:15 PM IST
  • Last Updated: 21 Aug 2026, 04:15 PM IST

सीबीएसई द्वारा 12वीं बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों की जांच के लिए लागू किए गए नए डिजिटल ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के बाद से देशभर के छात्रों में भारी असंतोष देखने को मिल रहा है। अंकों में विसंगतियों, अनचेक्ड उत्तरों और री-इवैल्यूएशन पोर्टल के तकनीकी ग्लिच के चलते लाखों छात्रों का उच्च शिक्षण संस्थानों व राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में दाखिला अधर में लटक गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी स्तर पर खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

1.68 लाख छात्रों की आपत्तियां और पोर्टल की समयसीमा पर सवाल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को जानकारी दी कि छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए एक-एक सदस्यीय समिति गठित की गई थी और पोर्टल को एक सप्ताह के लिए खोला गया था, जिसमें 1.68 लाख छात्रों ने आवेदन किया। इसके जवाब में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि प्रभावित छात्रों की तादाद बहुत बड़ी थी और केवल एक हफ्ते की अवधि बेहद कम थी।

कई ऐसे छात्र भी हैं जिन्होंने निर्धारित समय पर फीस देकर आवेदन किया, लेकिन उन्हें अब तक न तो उत्तर पुस्तिका की कॉपी मिली और न ही पुनर्मूल्यांकन का कोई परिणाम जारी हुआ।

ग्रेस मार्क्स देने से केंद्र का इनकार, प्रवेश परीक्षाओं के शेड्यूल का हवाला
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा में ओएसएम विसंगतियों का सामना करने वाले छात्रों को ग्रेस मार्क्स देना संभव नहीं होगा। उन्होंने तर्क दिया कि आईआईटी और विश्वविद्यालयों की प्रवेश काउंसलिंग सीबीएसई नतीजों से जुड़ी होती है, इसलिए पूरी प्रक्रिया को अनिश्चितकाल के लिए नहीं खींचा जा सकता था।

हालांकि, पीठ ने सवाल उठाया कि जिन छात्रों को पोर्टल क्रैश या तकनीकी गड़बड़ी के कारण समय पर अवसर नहीं मिला, उनके अधिकारों का संरक्षण कैसे किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी प्रभावित छात्रों की विस्तृत लिस्ट, सोमवार तक हलफनामे का आदेश
चीफ जस्टिस की पीठ ने मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए याचिकाकर्ता को एक विस्तृत तालिका के साथ रिजॉइंडर दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसमें दो श्रेणियों का ब्योरा मांगा गया है- पहले वो छात्र जिन्होंने आवेदन किया मगर कोई जवाब नहीं मिला, और दूसरे वो जो इंटरनेट या बुनियादी ढांचे की खामी की वजह से आवेदन करने से वंचित रह गए।

अदालत ने केंद्र और सीबीएसई को सोमवार तक अपना आधिकारिक हलफनामा रिकॉर्ड पर रखने को कहा है, जिसके बाद मंगलवार को इस संवेदनशील मुद्दे पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।