Time Published: Thursday, September 3, 2026, 8:15 [IST]

Ram Temple CEO Jeetendra Mishra: अयोध्या के राम मंदिर की व्यवस्था अब नए दौर में प्रवेश कर रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया है। करीब छह साल पहले ट्रस्ट बनने के बाद यह मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव है। अब तक मंदिर की व्यवस्था ट्रस्ट के पदाधिकारियों, समितियों और अलग-अलग अधिकारियों के जरिए चलती थी। CEO की नियुक्ति के बाद रोजमर्रा के कामकाज के लिए एक स्पष्ट कमान होगी।

ट्रस्ट नीतियां तय करेगा और CEO उन फैसलों को जमीन पर लागू कराने की जिम्मेदारी संभालेंगे। लेकिन यहां सवाल सिर्फ नए CEO का नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट के पास आखिर कितने पैसे हैं? जीतेंद्र मिश्रा को CEO बनाने की जरूरत क्यों पड़ी और उनके सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारियां क्या होंगी? आइए पूरा मामला समझते हैं।

Ram Temple CEO Jeetendra Mishra

राम मंदिर ट्रस्ट के खाते में कितने पैसे हैं?

राम मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति का एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है। 21 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के बैंक खातों में करीब 1882 करोड़ रुपये मौजूद थे। यह जानकारी ट्रस्ट की बैठक में रखे गए वित्तीय विवरण में दी गई। वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रस्ट की करीब 237 करोड़ रुपये की आय बताई गई। इस दौरान लगभग 91 करोड़ रुपये खर्च हुए। वहीं मंदिर निर्माण और दूसरे कामों पर करीब 425 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

इतनी बड़ी रकम और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए वित्तीय निगरानी और रोजमर्रा के प्रशासन के लिए एक मजबूत कार्यकारी व्यवस्था की जरूरत लगातार महसूस की जा रही थी।

CEO की चर्चा अचानक शुरू नहीं हुई। चढ़ावे में गड़बड़ी और चोरी से जुड़े विवाद के बाद हुई एसआईटी जांच में मंदिर के गिनती कक्ष की निगरानी, सीसीटीवी और प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठे थे। यहीं से यह सवाल सामने आया कि इतने बड़े धार्मिक संस्थान का रोज का काम सिर्फ ट्रस्ट पदाधिकारियों और समितियों के भरोसे चले या इसके लिए एक पूर्णकालिक पेशेवर अधिकारी भी हो।

CEO व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा यही होगा कि धार्मिक फैसलों और प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी साफ-साफ अलग रहे। ट्रस्ट नीतिगत फैसले लेगा, जबकि सीईओ उनके अमल और रोजमर्रा के संचालन पर नजर रखेंगे।

Ram Temple CEO Jeetendra Mishra

जीतेंद्र मिश्रा के जिम्मे होंगे ये 5 बड़े काम

  • पहला काम: चढ़ावे और पैसों की निगरानी। मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की गिनती और हिसाब-किताब को ज्यादा व्यवस्थित करना सीईओ की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके लिए अकाउंटिंग सिस्टम, चार्टर्ड अकाउंटेंट और वित्तीय विशेषज्ञों की मदद ली जा सकती है।
  • दूसरा काम: करीब 1500 से 2000 कर्मचारियों का प्रबंधन। मंदिर की सुरक्षा, सफाई और दूसरे प्रबंधन कार्यों में बड़ी संख्या में कर्मचारी तैनात होंगे। इनकी व्यवस्था और काम की निगरानी भी सीईओ के स्तर पर होगी।
  • तीसरा काम: निर्माण और बुनियादी ढांचे की निगरानी। राम मंदिर परिसर में बचे हुए निर्माण कार्यों को समय पर पूरा कराना, सीसीटीवी नेटवर्क को व्यवस्थित रखना और ट्रस्ट के फैसलों को जमीन पर उतारना उनकी जिम्मेदारी होगी।
  • चौथा काम: श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन। अयोध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। त्योहारों और खास मौकों पर संख्या और बढ़ जाती है। ऐसे समय पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर श्रद्धालुओं की आवाजाही का प्लान तैयार करना जरूरी होगा।
  • पांचवां काम: ट्रस्ट और सरकार के बीच तालमेल। सीईओ ट्रस्ट बोर्ड और उसके अध्यक्ष के अधीन काम करेंगे। साथ ही राज्य सरकार, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाए रखना भी उनके काम का हिस्सा होगा।

कौन हैं जीतेंद्र मिश्रा? (Who Is Jitendra Mishra?)

जीतेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव से आते हैं। अयोध्या से उनका गांव करीब 225 किलोमीटर दूर है। उन्होंने भारतीय वायुसेना में करीब 39 साल काम किया। वह 6 दिसंबर 1986 को लड़ाकू विमान पायलट अधिकारी के तौर पर वायुसेना में शामिल हुए थे। इसी साल 30 अप्रैल को वह सेवानिवृत्त हुए और करीब 125 दिन के भीतर उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में नई जिम्मेदारी मिल गई।

जीतेंद्र मिश्रा के पास 3000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव है। वह 18 से ज्यादा तरह के लड़ाकू और परिवहन विमानों के साथ हेलिकॉप्टर भी उड़ा चुके हैं। उन्होंने मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरफोर्स टेस्ट पायलट स्कूल के प्रशिक्षक और पठानकोट-बरेली जैसे अहम एयरबेस की कमान संभाली है।

उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, बेंगलुरु, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज में प्रशिक्षण लिया है।

ऑपरेशन सिंदूर से राम मंदिर तक कैसे पहुंचा सफर?

जीतेंद्र मिश्रा की सबसे चर्चित हालिया जिम्मेदारी ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी रही। वह उस दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। उन्हें उनकी सेवा के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल और पहले विशिष्ट सेवा मेडल से भी सम्मानित किया जा चुका है।

कारगिल युद्ध की शुरुआत में भी उन्होंने मिराज-2000 विमानों से जुड़े लेजर निर्देशित बम अभियान में अहम भूमिका निभाई थी। जून 2010 में उन्होंने फ्रांस में हुए गरुड़ हवाई अभ्यास में भारतीय वायुसेना की टीम का नेतृत्व किया था। वह पुणे में सुखोई-30 एमकेआई संचालन वाले एयरबेस के मुख्य संचालन अधिकारी भी रह चुके हैं।

जीतेंद्र मिश्रा को कितनी सैलरी मिलेगी?

राम मंदिर ट्रस्ट ने CEO पद के लिए आवेदन मंगाते समय वेतन को लेकर एक बात साफ की थी। चयनित अधिकारी का वेतन और भत्ते आपसी सहमति से तय किए जाने थे। अधिकारी के अनुभव और योग्यता को देखते हुए मासिक वेतन तय होगा।

जीतेंद्र मिश्रा को तीन साल के अनुबंध पर जिम्मेदारी दी जाएगी। उन्हें रहने के लिए आवास, सरकारी वाहन, सुरक्षा और दूसरी वीआईपी सुविधाएं भी ट्रस्ट के फंड से उपलब्ध कराई जाएंगी। यानी राम मंदिर में सीईओ का पद सिर्फ एक नया प्रशासनिक पद नहीं है।

इसके साथ मंदिर के बढ़ते कामकाज को एक केंद्रीकृत व्यवस्था में लाने की कोशिश भी जुड़ी है। अब यह देखना अहम होगा कि एयरफोर्स में लंबे समय तक बड़े ऑपरेशनल सिस्टम संभाल चुके जीतेंद्र मिश्रा राम मंदिर जैसे विशाल धार्मिक परिसर के प्रशासन, वित्त, भीड़ प्रबंधन और कर्मचारी व्यवस्था को किस तरह नया ढांचा देते हैं।