CG Atithi Shikshak Protest: छत्तीसगढ़ में संविलियन और समान वेतन की मांग को लेकर अतिथि शिक्षक बीते 20 दिनों से धरने पर बैठे हैं। सोमवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने पहुंचे थे। यहीं सड़कों पर सभी ने रात बिताई। शिक्षकों का कहना है कि बीते 11 सालों से सभी नक्सल प्रभावित स्कूलों में पढ़ा रहे हैं लेकिन अभी भी उनका जिंदगी केवल मानदेय के भरोस चल रही है।
दुर्ग: शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर अड़े रहे अतिथि शिक्षक, बारिश के बीच सड़क पर गुजारी रात
छत्तीसगढ़ के दुर्ग में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे 1,000 से अधिक अतिथि शिक्षकों ने सोमवार की रात शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर गुजारी। पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे ये… pic.twitter.com/d10ViZYRNH
— Bansal News Official (@BansalNews_) July 21, 2026
बारिश के बीच निकली रैली, जलाई फ्लैशलाइट
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हजारों शिक्षकों ने सोमवारको भारी बारिश के बीच रैली निकाली। इसके बाद शाम को फ्लैशलाइट जलाकर विरोध जताया। इसके बाद भी शिक्षा मंत्री उनकी बात सुनने नहीं आए। देर रात शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर ही सड़कों पर अतिथि शिक्षकों ने रात बिताई। आपको बता दें अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे बीते 11 साल से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, पर आज तक केवल मानदेय के भरोसे काम करते जा रहे हैं।
कम पैसे में घर चलाना मुश्किल
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राज्य अतिथि शिक्षक संघ के हड़ताल प्रमुख और मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव का कहना है कि उन्हें हर महीने मात्र 20 हजार रुपए का मानदेय मिलता है। इतनी कम राशि में घर का किराया, बिजली-पानी के साथ साथ आने-जाने का खर्च और परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। इसमें गुजारा करना मुश्किल होता है। इसी बीच अगर कोई इमरजेंसी या मुसीबत आ जाए तो परेशानी और अधिक बढ़ जाती है
अतिथि शिक्षकों की क्या हैं मांगें
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संविलियन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
समायोजन पर सरकार ठोस और स्पष्ट फैसला ले।
समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।
सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वर्षों से कार्यरत विद्यालयीन शिक्षकों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए।
मानदेय में वृद्धि की जाए, क्योंकि वर्तमान मानदेय करीब 20 हजार रुपए ही है।
आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों की तर्ज पर बेहतर वेतन और सुविधाएं दी जाएं।
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