CG Corruption: अंबिकापुर में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में अदालत ने तत्कालीन सहायक ग्रेड-3 ऋषि सिंह को दोषी ठहराते हुए 4 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। ऋषि सिंह अंबिकापुर की भू-अभिलेख शाखा में पदस्थ थे।

विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ममता पटेल की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी लिपिक पर 5 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है।

1049 गुना अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप

मामले की जांच में ऋषि सिंह के खिलाफ 5 जुलाई 1984 से 18 जून 2013 के बीच आय से 1049 गुना अधिक अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का आरोप प्रमाणित हुआ।

जांच के दौरान उनकी संपत्ति और आय के स्रोतों की पड़ताल की गई थी। जांच में सामने आई अनुपातहीन संपत्ति को लेकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला चलाया गया।

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सोना-चांदी और नकदी जब्त

जांच के दौरान बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण और नकद रकम भी जब्त की गई थी। मामले में 1091 ग्राम सोने के आभूषण, 1319.91 ग्राम चांदी और 14.95 लाख रुपए नकद जब्त किए गए थे। इन संपत्तियों को मामले की जांच में अनुपातहीन संपत्ति के तौर पर शामिल किया गया था।

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अदालत ने राजसात करने का दिया आदेश

मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ममता पटेल की अदालत ने ऋषि सिंह को दोषी माना। अदालत ने उन्हें 4 साल के कठोर कारावास के साथ 5 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके साथ ही न्यायालय ने निर्धारित अनुपातहीन संपत्ति को राजसात करने का आदेश भी दिया है।

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शासन की ओर से हुई पैरवी

इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक गौरांगो सिंह ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले से जुड़े तथ्यों और जांच में सामने आई संपत्ति को अदालत के समक्ष रखा गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोषी लिपिक को सजा सुनाई और अनुपातहीन संपत्ति को राजसात करने का आदेश दिया।

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