CG CSML Scam: छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के 172 करोड़ रुपये से अधिक के कथित ओवरटाइम भुगतान घोटाले में गिरफ्तार पूर्व प्रबंध संचालक (MD) अरुणपति त्रिपाठी की तीन दिन की पुलिस रिमांड सोमवार को समाप्त हो रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) उन्हें आज दोपहर करीब 3 बजे ACB/EOW की विशेष अदालत में पेश करेगी। इस दौरान जांच एजेंसी अदालत से आगे की कार्रवाई को लेकर अनुमति मांगेगी।

17 जुलाई को मिली थी तीन दिन की रिमांड

EOW ने 17 जुलाई को अरुणपति त्रिपाठी को विशेष अदालत में पेश कर तीन दिन की पुलिस रिमांड हासिल की थी। रिमांड अवधि के दौरान अधिकारियों ने उनसे ओवरटाइम भुगतान, वित्तीय स्वीकृतियों और संबंधित दस्तावेजों को लेकर पूछताछ की। अब रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।

172 करोड़ से अधिक के अवैध भुगतान का आरोप

जांच एजेंसी के अनुसार CSMCL में कर्मचारियों के ओवरटाइम भुगतान के नाम पर 172 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का कथित रूप से अवैध भुगतान किया गया। आरोप है कि नियमों के विपरीत भुगतान कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया और इसमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं। इसी मामले में EOW ने पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है।

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कोर्ट के फैसले पर रहेगी नजर

सोमवार को विशेष अदालत में पेशी के दौरान EOW अदालत से पुलिस रिमांड बढ़ाने की मांग कर सकती है। यदि एजेंसी को आगे पूछताछ की आवश्यकता नहीं होती है तो अदालत उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने पर भी फैसला ले सकती है। मामले की अगली दिशा अदालत के आदेश के बाद तय होगी।

ED की कार्रवाई के बाद दर्ज हुई थी FIR

जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से हुई। रायपुर स्थित ED के क्षेत्रीय कार्यालय ने 29 नवंबर 2023 को तीन लोगों के पास से 28.80 लाख रुपए नकद जब्त किए थे। इस कार्रवाई की जानकारी राज्य शासन को भेजी गई, जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने FIR दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू की।

2019 से 2024 के बीच हुआ कथित फर्जी भुगतान

जांच में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2023-24 के दौरान कर्मचारियों के ओवरटाइम, चार अतिरिक्त कार्यदिवस, बोनस और सर्विस चार्ज के नाम पर विभिन्न मैनपावर एजेंसियों को 172 करोड़ रुपए से अधिक का कथित अवैध भुगतान किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस राशि का बड़ा हिस्सा कथित सिंडिकेट के जरिए नकद कमीशन के रूप में वापस लिया गया।

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पहले ही दाखिल हो चुका है आरोप पत्र

इस मामले में ईओडब्ल्यू-एसीबी पहले ही 12 आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश कर चुकी है। अब अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को उम्मीद है कि पूछताछ में घोटाले से जुड़े अन्य लोगों, वित्तीय लेनदेन और कथित कमीशन नेटवर्क के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

क्या है CSMCL ओवरटाइम भुगतान घोटाला?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, शराब दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों को ओवरटाइम और अन्य भत्तों का भुगतान किया जाना था। आरोप है कि इसी व्यवस्था का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिल, बढ़े हुए भुगतान और कथित कमीशन सिस्टम के माध्यम से करोड़ों रुपए का भुगतान मैनपावर एजेंसियों को किया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि भुगतान की राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

चार प्रमुख एजेंसियों की भूमिका जांच के दायरे में

जांच के दौरान सुमित फैसिलिटीज, प्राइमवन वर्कफोर्स, ए-टू-जेड इंफ्रासर्विसेज, अलर्ट कमांडोज और ईगल हंटर सॉल्यूशंस जैसी मैनपावर एजेंसियों की भूमिका भी सामने आई है। एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच इन कंपनियों को कर्मचारियों के नाम पर बड़े पैमाने पर अतिरिक्त भुगतान किया गया।

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किस मद में कितना भुगतान?

जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार कथित अतिरिक्त भुगतान में

ओवरटाइम के नाम पर लगभग 101.20 करोड़ रुपए
बोनस भुगतान के रूप में 12.21 करोड़ रुपए
चार अतिरिक्त कार्यदिवसों के भुगतान के तौर पर 54.46 करोड़ रुपए
सर्विस चार्ज के रूप में करीब 15.11 करोड़ रुपए

का भुगतान शामिल है। इस प्रकार कुल लगभग 182.98 करोड़ रुपए विभिन्न मैनपावर एजेंसियों को दिए जाने की बात जांच में सामने आई है। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले को बड़े वित्तीय अनियमितता और कथित कमीशन नेटवर्क से जोड़कर देख रही हैं।

जांच अभी जारी

ईओडब्ल्यू-एसीबी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। अरुणपति त्रिपाठी से पूछताछ के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां या नई कार्रवाई हो सकती है। एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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