CGPSC Chairman: छत्तीसगढ़ (Chattisgarh News) लोक सेवा आयोग यानी CGPSC अध्यक्ष (CGPSC Chairman) रीता शांडिल्य का कार्यकाल अब खत्म हो गया है। उन्होंने 8 सितंबर को 62 साल की उम्र पूरी की।

संवैधानिक नियम के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की अधिकतम उम्र 62 साल होती है। उम्र पूरी होते ही उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई। अब आयोग को नए अध्यक्ष का इंतजार है। नए अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद आयोग का कामकाज आगे बढ़ेगा।

पहली महिला अध्यक्ष बनने का रिकॉर्ड

रीता शांडिल्य की नियुक्ति CGPSC अध्यक्ष (CGPSC Chairman) के तौर पर खास रही। वह आयोग की पहली महिला अध्यक्ष बनी थीं। 2002 बैच की IAS अधिकारी (IAS Officer) रहीं शांडिल्य को प्रशासन में लंबे अनुभव का लाभ मिला। 

उन्होंने राजस्व और तकनीकी शिक्षा जैसे विभागों में भी जिम्मेदारियां संभाली थीं। उनके प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें आयोग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं पर उनकी निगरानी रही।

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आयोग की साख लौटाना बड़ी चुनौती

रीता शांडिल्य ने जब CGPSC अध्यक्ष (CGPSC Chairman) की जिम्मेदारी संभाली, तब आयोग की परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे थे। ऐसे समय में आयोग की विश्वसनीयता और पारदर्शिता वापस लाना बड़ी चुनौती थी।

उनके कार्यकाल में परीक्षाओं को समय पर कराने और भर्ती प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। अब नए अध्यक्ष के सामने भी आयोग की साख मजबूत करने और अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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सदस्य से अध्यक्ष तक का सफर

रीता शांडिल्य 13 अक्टूबर 2024 को आयोग की सदस्य बनी थीं। इसके बाद उन्हें जल्द ही CGPSC अध्यक्ष (CGPSC Chairman) की जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला। करीब एक साल के भीतर वह आयोग की स्थायी अध्यक्ष बन गईं।

30 अगस्त 2025 को उन्होंने पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर काम संभाला था। इससे पहले सदस्य के रूप में भी उन्होंने आयोग के कामकाज को करीब से समझा। उनके प्रशासनिक अनुभव ने इस जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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अब नए अध्यक्ष के नाम पर नजर

रीता शांडिल्य के जाने के बाद अब सरकार और राजभवन के सामने CGPSC अध्यक्ष (CGPSC Chairman) के नए नाम पर फैसला लेने की चुनौती है। आयोग प्रदेश में राज्य सेवा समेत कई महत्वपूर्ण सरकारी भर्तियों की परीक्षाएं आयोजित करता है।

ऐसे में नए अध्यक्ष का चयन काफी अहम माना जा रहा है। अभ्यर्थियों की नजर भी इस नियुक्ति पर रहेगी। नए अध्यक्ष से आयोग की पारदर्शिता, परीक्षा प्रक्रिया और भर्ती व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद होगी।

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