Umar Khalid Documentary: मामला है बेंगलुरु की नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी यानी NLSIU का, यहां लॉ एंड सोसाइटी कमिटी यानी LawSoc की तरफ से Prisoner No. 626710 is Present नाम की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग होनी थी।
पढ़ें :- दिल्ली छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी FIR होगी रद्द! केंद्र सरकार ने SC में दाखिल की अर्जीडॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर ललित वचानी ने इसे उमर खालिद की जेल की सजा पर बनाया है। स्क्रीनिंग सोमवार यानी 14 सितंबर को होनी थी, जिसके बाद इसी मुद्दे से जुड़े कानूनी और लोकतांत्रिक सवालों पर चर्चा का भी कार्यक्रम था। लेकिन कार्यक्रम से ठीक पहले ही इसे टाल दिया गया।

LawSoc की तरफ से छात्रों को ई-मेल भेजकर बताया गया कि लॉजिस्टिकल और सुरक्षा कारणों के चलते स्क्रीनिंग को आगे बढ़ाया जा रहा है। हालांकि कमिटी ने ये भी साफ कर दिया कि कार्यक्रम रद्द नहीं हुआ है और इसी ट्राइमेस्टर में नई तारीख पर आयोजित किया जाएगा। लेकिन विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ क्योंकि इस स्क्रीनिंग का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP ने खुलकर विरोध किया।
पढ़ें :- TMC के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस, कोर्ट ने बागियों से अपना जवाब देने को कहाABVP ने NLSIU के वाइस चांसलर को पत्र लिखकर मांग की कि कैंपस का इस्तेमाल राजनीतिक या वैचारिक प्रचार के लिए नहीं होना चाहिए। ABVP का कहना है कि यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक माहौल को राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचाया जाना चाहिए और प्रशासन को इस स्क्रीनिंग की अनुमति नहीं देनी चाहिए। वहीं LawSoc का कहना है कि आयोजन किसी दबाव में नहीं टाला गया है। कमिटी ने कहा कि स्क्रीनिंग को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से कराने के लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं। अब इस पूरे विवाद का सबसे अहम पहलू समझिए।
इस यूनिवर्सिटी का नाम पहले भी CJI सूर्य कांत को लेकर हुए विवाद में सामने आ चुका है। बता दे कि हैदराबाद के नालसर विधि विश्वविद्यालय के बाद NLSIU के छात्रों और पूर्व छात्रों के एक समूह ने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्य कांत और BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को बुलाए जाने का विरोध किया था। विरोध के बाद 12 सितंबर को होने वाला दीक्षांत समारोह 17 अक्टूबर तक टाल दिया गया।
अब सवाल उठता है – क्या देश की प्रतिष्ठित लॉ यूनिवर्सिटीज में कानूनी और लोकतांत्रिक मुद्दों पर बहस होनी चाहिए या ऐसे आयोजनों के जरिए कैंपस के राजनीतिक ध्रुवीकरण का खतरा बढ़ रहा है? फिलहाल, NLSIU एक बार फिर कैंपस की राजनीति और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चर्चा के केंद्र में है।