Updated On: Jul 30, 2026 | 10:49 AM IST

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सार

Student Protest Leader: CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार से प्रदर्शनकारी छात्रों को परेशान न करने की अपील की। उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं व उनकी मांगों का समाधान संवाद से होना चाहिए।

Protesting students are not terrorists but the future of the country; CJP founder Abhijit Dipke lashed out at the government.

अभिजीत दिपके, छात्र आंदोलन (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)

विस्तार

NEET Protest Abhijit Dipke: छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्र आंदोलनों को लेकर केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों को परेशान करना तुरंत बंद करना चाहिए, क्योंकि छात्र आतंकवादी नहीं बल्कि देश का भविष्य हैं।

यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो देश का युवा लोकतांत्रिक तरीके से सरकार बदलने की ताकत रखता है। दिल्ली में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर करीब एक महीने तक चले आंदोलन का नेतृत्व करने के बाद अपने गृह नगर लौटे दिपके ने छत्रपति संभाजीनगर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत की।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू किया गया आंदोलन अपने उद्देश्य में सफल रहा और मंत्री के इस्तीफे के बाद ही आंदोलन समाप्त किया गया।

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40 दिन बाद घर लौटे दिपके बोले…

दिपके ने कहा कि लंबे आंदोलन के बाद अपने घर लौटकर उन्हें सबसे अधिक खुशी अपने माता-पिता से मिलने की है। उन्होंने बताया कि वह लगभग 40 दिनों बाद घर लौट रहे हैं। “जब से मैं भारत आया, तभी से आंदोलन में व्यस्त था।

इसके बाद करीब 36 दिनों तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार आंदोलन चला। यह आंदोलन सफल रहा और इसे देशभर के छात्रों की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। अब घर लौटकर अपने माता-पिता से मिलना मेरे लिए सबसे बड़ी खुशी है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने के बाद भी कई राज्यों में प्रदर्शन में शामिल छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उनके अनुसार, विभिन्न राज्यों की पुलिस छात्रों के घरों तक पहुंच रही है और उन्हें गिरफ्तार करने की धमकियां दी जा रही हैं, जो लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है।

छात्रों की आवाज दबाने के बजाय संवाद करे सरकार

अभिजीत दिपके ने कहा कि 20 जुलाई को आंदोलन के दौरान सड़कों पर छात्रों का खून बहा था, जो बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी घटनाओं के बाद भी यदि छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

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उन्होंने सरकार से अपील की कि वह छात्रों के साथ टकराव का रास्ता छोड़कर संवाद और संवेदनशीलता का परिचय दे। उनका कहना था कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है, तो देश का युवा आने वाले समय में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से इसका जवाब देगा।

दिपके ने कहा कि छात्र आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेगी और ऐसे विवाद दोबारा उत्पन्न नहीं होंगे।

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