Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चलाई जा रही 'मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना' राज्य में हरित क्रांति के साथ-साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार का भी अहम जरिया बन गई है.

Uttarakhand News: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चलाई जा रही 'मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना' राज्य में हरित क्रांति के साथ-साथ युवाओं के लिए स्वरोजगार का भी अहम जरिया बन गई है.

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UK CM Pushkar Singh Dhami

पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

Uttarakhand News:  उत्तराखंड की धामी सरकार की ओर से चलाई जा रही 'मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना' (MSSY) राज्य के युवाओं के लिए स्वरोजगार की एक महत्वपूर्ण पहल बन गई है. इस योजना से राज्य में सैकड़ों युवाओं को स्वरोजगार मिला है. साथ ही ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी इस योनजा से क्रांति आई है.

सीएम पुष्कर सिंह धामी की इस योजना का मकसद राज्य के मूल निवासियों को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ना है. जो अपने मकसद में कामयाब हो रही है. जिससे न सिर्फ युवाओं को स्वरोजगार मिल रहा है बल्कि ये योजना हरित ऊर्जा को भी बढ़ावा दे रही है. इस योजना के तहत जून 2026 तक 210 मेगावाट क्षमता के प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं. साथ ही 3500 से अधिक लोगों को रोजगार भी मिला है.

250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य

बता दें कि सीएम धामी ने विभाग को मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 250 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है. जिसके तहत स्थानीय लोगों द्वारा 20, 25, 50, 100 और 200 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाए जा रहे हैं. जिसके लिए आवेदकों को एमएसएमई नीति-2023 के तहत सभी लाभ दिए जा रहे हैं. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इसी साल जून तक राज्य में कुल 1132 सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना हो चुकी है. जिनकी कुल क्षमता 2,10,420 किलोवाट यानी करीब 210 मेगावाट है. बाकी परियोजनाओं पर स्थापना का काम जारी है.

टिहरी में सबसे ज्यादा लगे सोलर प्लांट

अगर राज्य में जिले के हिसाब से आंकड़ा देखा जाए तो इसमें टिहरी सबसे आगे है. जहां अब तक 369 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं. जिनकी सम्मिलित क्षमता 69,050 किलोवाट है. वहीं उत्तरकाशी में 227 संयंत्र लग चुके हैं जिनकी कुल क्षमता 43,660 किलोवाट है जबकि चंपावत में 144 संयंत्रों से 28,200 किलोवाट क्षमता स्थापित हुई है.

उधर हरिद्वार में 86 संयंत्रों की क्षमता 16,900 किलोवाट है. जबकि पौड़ी में 88 संयंत्रों की क्षमता 15,440 किलोवाट और चमोली में 72 संयंत्रों से कुल 11,725 किलोवाट ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है. जबकि अल्मोड़ा में 32 संयंत्रों की क्षमता 5,600 किलोवाट दर्ज की गई है. इनके अलावा देहरादून, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर में भी इस योजना के तहत सौर परियोजनाएं स्थापित की गई हैं.

ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बना स्वरोजगार का जरिया

सीएम सौर स्वरोजगार योजना सिर्फ सौर ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं रही है बल्कि ये ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने का माध्यम भी बन गई है. क्योंकि इस योजना के तहत स्थापित परियोजनाओं से करीब 3500 लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है. इससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों भी तेज हुई हैं.  जिससे पलायन में भी कमी आने की उम्मीद है.

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बता दें कि सीएम धामी की ये योजना उत्तराखंड के युवाओं और राज्य के निवासियों को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है. सीएम धामी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ें. इससे हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को मजबूती और पलायन को रोकने में भी मदद मिल रही है.

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