MP Fast Track Court: केंद्रीय कैबिनेट में सार्वजनिक परीक्षा कानून में संशोधन को मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मध्यप्रदेश में भी छात्रों के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान कर दिया है।
पन्ना जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम मोहन यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में हम अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएंगे। जहां छात्रों की समस्याओं को तेजी से सुलझाए जाएंगे। यह विशेष कोर्ट भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में बनाए जाएंगे।
क्या होता है फास्ट ट्रैक कोर्ट
फास्ट ट्रैक कोर्ट ऐसी विशेष अदालत होती हैं, जहां सामान्य अदालतों की तुलना में मामलों की सुनवाई और फैसला जल्दी किया जाता है। इन अदालतों का मकसद लंबे समय तक लंबित रहने वाले मामलों का तेजी से निपटारा करना होता है। छात्रों से जुड़े मामलों में भी सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर होगी, ताकि उन्हें समय पर न्याय मिल सके।
इन मामलों की होगी सुनवाई
बता दें, फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेपर लीक, परीक्षा में नकल, फर्जी अभ्यर्थियों (सॉल्वर गैंग), भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी, रिजल्ट विवाद और शिक्षा व रोजगार से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई की जा सकेगी। इससे छात्रों के मामलों का जल्दी निपटारा होगा और दोषियों के खिलाफ समय पर कार्रवाई संभव हो सकेगी।
क्यों पड़ी फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत
दरअसल, बीते कुछ सालों में देशभर में पेपर लीक, भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी के कई मामले सामने आए। इन मामलों की जांच और सुनवाई में देरी से लाखों कैंडिडेट्स का भविष्य प्रभावित हुआ। इसी मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों ने प्रदर्शन किए।
हाल के दिनों में नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद देशभर में पेपर लीक के खिलाफ छात्रों ने अपनी आवाज उठाई थी। 28 जून को CJP के नेतृत्व में दिल्ली समेत कई शहरों में बड़े प्रदर्शन शुरू हुए, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी 26 दिन तक भूख हड़ताल की।
बढ़ते छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई देर रात वीडियो जारी कर पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की। इसके बाद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राज्य के चार बड़े शहरों में ऐसे विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का ऐलान किया।
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एमपी में इन परीक्षाओं में सामने आए थे गड़बड़ी के मामले
मध्यप्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई भर्ती परीक्षाएं विवादों में रहीं। पटवारी भर्ती परीक्षा, पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, NHM स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा, कृषि विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा और नर्सिंग एवं पैरामेडिकल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, डमी कैंडीडेट और अन्य अनियमितताओं के आरोप सामने आए। इनमें कुछ परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जबकि कई मामलों में जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की। इन घटनाओं ने प्रदेश की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
इन मामलों की जांच और सुनवाई अब भी जारी
पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, पटवारी भर्ती परीक्षा समेत कई मामलों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी भी पूरी नहीं हुई है। कुछ मामलों में एसआईटी और पुलिस की जांच जारी है, जबकि कई केस अदालतों में लंबित हैं। लंबे समय से कार्रवाई पूरी नहीं होने के कारण हजारों कैंडीडेट्स नियुक्ति और न्याय का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे मामलों के जल्द निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट को अहम कदम माना जा रहा है।
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