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सीएमओ कार्यालय में सीएचसी अधीक्षक की पत्नी का धरना:कानपुर देहात में बोली- पद से हटाने के लिए साजिश रची जा रही, CMO ने कहा- आरोप निराधार
कानपुर देहात35 मिनट पहले
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कानपुर देहात के स्वास्थ्य विभाग में मंगलवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब झींझक सीएचसी के अधीक्षक की पत्नी आकांक्षा त्रिपाठी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं। उन्होंने सीएमओ डॉ. जय गोविंद सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। वहीं, सीएमओ ने सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार बताया है।
आकांक्षा त्रिपाठी का आरोप है कि उनके पति डॉ. पीयूष त्रिपाठी को सीएचसी अधीक्षक के पद से हटाने के लिए सुनियोजित साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस मामले में पहले दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका था, उसी प्रकरण में दबाव बनाकर एफआईआर दर्ज कराई गई। उनका दावा है कि यह कार्रवाई सीएमओ के इशारे पर कराई गई है।

डीएम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग
उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमओ के पदभार संभालने के बाद से ही उनके पति को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, जो अधिकारी सीएमओ की मांगें पूरी करते हैं, वे वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात हैं, जबकि अन्य अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई की जाती है।
आकांक्षा त्रिपाठी ने बताया कि करीब दस दिन पहले उन्होंने जिलाधिकारी से भी मुलाकात की थी, जहां उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वासन मिला था। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज होने की सूचना मिलने के बाद उनके पति की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
भावुक होते हुए उन्होंने कहा, "अगर नाम के आगे 'त्रिपाठी' लिखने की यही सजा है तो नौकरी से निकाल दीजिए। हम सड़क पर ठेला लगाकर या घर-घर काम करके जीवनयापन कर लेंगे, लेकिन अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे।" उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।

क्या है पूरा मामला..
यह विवाद सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) मनीष कुमार की शिकायत से जुड़ा है। मनीष कुमार ने पुलिस अधीक्षक को दी तहरीर में आरोप लगाया कि 10 जुलाई को उनके पड़ोसी मनीष यादव ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी थी। अगले दिन बातचीत के लिए उन्हें झींझक सीएचसी बुलाया गया, जहां डॉ. पीयूष त्रिपाठी के कार्यालय में पहले से 10-12 लोग मौजूद थे।
शिकायत के अनुसार, वहां उनके साथ मारपीट की गई और मोबाइल फोन छीनकर उसमें चल रही रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने उनकी शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की। बाद में पुलिस अधीक्षक से शिकायत के बाद डॉ. पीयूष त्रिपाठी, मनीष यादव और 10-12 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।

सीएमओ ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. जय गोविंद सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि डॉ. पीयूष त्रिपाठी और एक सीएचओ के बीच हुए विवाद के संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।
उन्होंने कहा कि उन्हें कानपुर देहात आए अभी लगभग दो महीने ही हुए हैं। यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमों का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से कार्य कर रहा है और किसी प्रकार के पक्षपात का प्रश्न ही नहीं उठता।
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