Datia By Election: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद वरिष्ठ नेता अवधेश नायक अचानक पूरे चुनाव के सबसे चर्चित चेहरे बन गए हैं। हालात ऐसे हैं कि उन्हें मनाने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों के बड़े नेता लगातार संपर्क में हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अवधेश नायक दोनों पार्टियों के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं और उनका फैसला दतिया उपचुनाव की तस्वीर कैसे बदल सकता है?
टिकट कटते ही बढ़ी सियासी हलचल
कांग्रेस ने दतिया उपचुनाव के लिए घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिसके बाद अवधेश नायक और उनके समर्थकों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस के इस फैसले से क्षेत्र का चुनावी समीकरण बदल सकता है।
बंद कमरे की बैठक से तेज हुई अटकलें
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टिकट विवाद के बीच मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री राकेश शुक्ला अवधेश नायक के घर पहुंचे और दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक बंद कमरे में चर्चा हुई। इससे पहले बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी भी उनसे मुलाकात कर चुके है। इन बैठकों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि अवधेश नायक बीजेपी में वापसी कर सकते हैं। हालांकि, किसी भी पक्ष ने इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
कांग्रेस भी डैमेज कंट्रोल में जुटी
अवधेश नायक की नाराजगी को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं उनके निवास पहुंचे और उनसे लंबी बातचीत की। कांग्रेस की कोशिश है कि नायक और उनके समर्थकों की नाराजगी दूर कर चुनाव में किसी तरह का नुकसान होने से बचा जा सके।
अवधेश नायक ने लगाया वादाखिलाफी का आरोप
मीडिया से बातचीत में अवधेश नायक ने कांग्रेस नेतृत्व पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि 2023 विधानसभा चुनाव में टिकट कटने के बाद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ और पार्टी प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि अगला दतिया चुनाव वही लड़ेंगे। लेकिन इस बार भी टिकट नहीं मिलने से वे और उनके समर्थक खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
कौन हैं अवधेश नायक?
अवधेश नायक की राजनीतिक शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से हुई थी। वर्ष 1993 में वे बीजेपी की सक्रिय राजनीति में आए। दतिया नगर पालिका में पार्षद रहे और बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। साल 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। शुरुआत में कांग्रेस ने उन्हें उम्मीदवार भी घोषित किया, लेकिन बाद में टिकट बदलकर राजेंद्र भारती को दे दिया गया। अब 2026 के उपचुनाव में दूसरी बार टिकट नहीं मिलने से उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ गई है।
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क्यों अहम हैं अवधेश नायक?
दतिया में अवधेश नायक की व्यक्तिगत पकड़ और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत संगठनात्मक नेटवर्क माना जाता है। यही वजह है कि उनका अगला राजनीतिक कदम चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। यदि वे कांग्रेस के साथ बने रहते हैं, बीजेपी में लौटते हैं या कोई अलग फैसला लेते हैं, तो इसका सीधा असर उपचुनाव की दिशा पर पड़ सकता है। दतिया में ब्राह्मण और ठाकुर मतदाताओं पर उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। यही वजह है कि दोनों प्रमुख दल इस प्रभावशाली वोट बैंक को अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए अवधेश नायक को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि नायक किसी एक दल के पक्ष में खुलकर खड़े होते हैं, तो इसका असर केवल उनके समर्थकों पर ही नहीं, बल्कि इन प्रभावशाली सामाजिक वर्गों के वोटों पर भी पड़ सकता है, जिससे उपचुनाव की तस्वीर बदल सकती है।
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अब सबकी नजर अगले फैसले पर
फिलहाल दतिया की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवधेश नायक आखिर किसके साथ जाएंगे। बीजेपी और कांग्रेस दोनों उन्हें अपने पाले में बनाए रखने या लाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में उनका फैसला दतिया उपचुनाव का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है।
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