Delhi Fire Service: दिल्ली फायर सर्विस में 10,743 नए पदों को गृह मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। यहां पढ़ें किन पदों पर कितने पद खाली हैं।
दिल्ली फायर सर्विस में 10,743 नए पदों पर मंजूरी।
- Published: 10 Aug 2026, 06:45 PM IST
- Last Updated: 10 Aug 2026, 06:45 PM IST
Delhi Fire Service: दिल्ली में अग्निशमन व्यवस्था को मजबूत और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। गृह मंत्रालय के डायरेक्टरेट जनरल फायर सर्विस के पुनर्गठन प्लान को मंजूरी मिल गई है। इसके तहत दिल्ली फायर सर्विस (DFS) में 10,743 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसके बाद विभाग में कुल स्वीकृत पदों की संख्या मौजूदा 3,175 से बढ़कर 13,918 हो जाएगी।
दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर (CFO) एके मलिक के अनुसार, पदों का यह पुनर्गठन गृह मंत्रालय की स्टैंडिंग फायर एडवाइजरी काउंसिल (SFAC) के दिशानिर्देशों और दिल्ली में संचालित सभी 71 फायर स्टेशनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद प्रस्ताव को दिल्ली सरकार के एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स (AR) विभाग के पास भेजा गया है। वहां से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा।
ऑपरेशनल कैडर में 5,069 नए पद
पुनर्गठन के तहत दिल्ली फायर सर्विस के ऑपरेशनल कैडर में कुल 5,069 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें:
- फायर ऑपरेटर के 3,823 पद
- लीडिंग फायरमैन के 776 पद
- सब ऑफिसर (ST) के 294 पद
- स्टेशन ऑफिसर के 176 पद
- सुपरवाइजर के 47 पद शामिल हैं।
5 जोन, 13 डिवीजन और 39 सब-डिवीजन में होगा संचालन
दिल्ली के प्रशासनिक राजस्व जिलों के आधार पर अग्निशमन विभाग के पुनर्गठन की योजना बनाई गई है। इसके तहत राजधानी को 5 जोन, 13 डिवीजन और 39 सब-डिवीजन में बांटा गया है। बेहतर संचालन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के भी अतिरिक्त पद बनाए गए हैं।
- डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर (DCFO, लेवल-12): 4 पद
- डिविजनल ऑफिसर (DO, लेवल-11): 11 पद
- असिस्टेंट डिविजनल ऑफिसर (ADO, लेवल-10): 32 पद
स्पेशलाइज्ड रेस्पॉन्स के लिए हजारों पद
आधुनिक आपदाओं, रासायनिक हादसों और ऊंची इमारतों में राहत एवं बचाव कार्यों को बेहतर बनाने के लिए विशेष संसाधनों और टीमों का विस्तार किया जाएगा। हैजमेट वैन, CBRN रेस्पॉन्स व्हीकल और एरियल लेडर प्लेटफॉर्म जैसी विशेष गाड़ियों के संचालन के लिए 3,546 पद स्वीकृत किए गए हैं।
इसके अलावा ट्रेनिंग, प्रिवेंशन और स्पेशल बटालियन के लिए 608 पद, स्टाफ ट्रेनिंग सेंटर के लिए 294 पद और फायर प्रिवेंशन हेडक्वार्टर विंग के लिए 170 पद मंजूर किए गए हैं। सर्च एंड रेस्क्यू बटालियन के लिए 144 पद, तकनीकी एवं प्रशासनिक सपोर्टिंग विंग के लिए 320 पद और वर्कशॉप/ऑटोमोबाइल विंग के लिए 150 पद निर्धारित किए गए हैं। कम्युनिकेशन विंग में 137, लीगल विंग में 11 और ऑपरेशन्स बैंड के लिए 9 पद स्वीकृत किए गए हैं।
पहली बार बनेगा अलग आईटी विंग
दिल्ली फायर सर्विस में पहली बार अलग आईटी विंग बनाया जाएगा। इसके जरिए वर्कशॉप इन्वेंट्री सॉफ्टवेयर और 24x7 डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया जाएगा। इससे विभाग के कामकाज में पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।
फायर स्टेशनों पर चौबीसों घंटे तैनात कर्मचारियों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए 1,153 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) पद भी स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रसोइया, धोबी और मोची जैसे पद शामिल होंगे।
फायर ऑपरेटर भर्ती के नियमों में बड़ी राहत
युवाओं को भर्ती में अधिक अवसर देने के लिए फायर ऑपरेटर पद की पात्रता में भी बदलाव किया गया है। पहले आवेदन के समय हेवी मोटर व्हीकल (HMV) ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य था। अब केवल कार या हल्के वाहन का लाइसेंस रखने वाले अभ्यर्थी भी भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।
फायर ऑपरेटर पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास रखी गई है। उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा भी पास करनी होगी। चयन के बाद कर्मचारियों को दो साल के भीतर अपने LMV लाइसेंस को HMV लाइसेंस में अपग्रेड कराना होगा।
71 फायर स्टेशनों पर भारी स्टाफ की कमी
दिल्ली में फिलहाल 71 फायर स्टेशन हैं। विभाग के अनुसार इन्हें सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 12,000 से अधिक कर्मचारियों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में 3,175 पद स्वीकृत हैं और करीब 2,400 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
स्टाफ की कमी का सीधा असर फायर टेंडरों की तैनाती पर भी पड़ रहा है। नियमों के अनुसार एक फायर टेंडर पर कम से कम छह जवानों का क्रू होना चाहिए, लेकिन पर्याप्त मैनपावर नहीं होने के कारण कई बार वाहनों पर पूरा क्रू तैनात नहीं हो पाता। ऐसे में किसी घटना पर पर्याप्त फायरफाइटर्स भेजने के लिए एक से अधिक गाड़ियां भेजनी पड़ती हैं, जिससे दूसरे इलाकों में बैकअप प्रभावित होने का खतरा रहता है।
कर्मचारियों पर बढ़ रहा काम का दबाव
मैनपावर की कमी के बावजूद आग और अन्य आपात घटनाओं से निपटने के लिए मौजूदा कर्मचारियों को लंबे समय तक और अतिरिक्त दबाव में काम करना पड़ता है। इससे उन पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
10,743 नए पदों की मंजूरी को दिल्ली फायर सर्विस के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे एक ओर जहां विभाग की मानव संसाधन क्षमता मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में युवाओं के लिए सरकारी रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।