Published: Friday, July 31, 2026, 18:25 [IST]
BJP MLC Devesh Kumar Resignation: बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भाजपा के विधान पार्षद (MLC) देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। माना जा रहा है कि उनके इस्तीफे से बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद पहुंचने का रास्ता साफ हो गया है। संवैधानिक नियमों के तहत मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य होना जरूरी होता है।
ऐसे में देवेश कुमार का यह फैसला राजनीतिक और संवैधानिक दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर देवेश कुमार कौन हैं, उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा और उन्होंने यह बड़ा फैसला क्यों लिया।
दीपक प्रकाश के लिए क्यों दिया इस्तीफा?
देवेश कुमार के इस्तीफे के पीछे सबसे बड़ा कारण मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी माना जा रहा है। दीपक प्रकाश फिलहाल बिहार सरकार में मंत्री हैं, लेकिन वे विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुसार मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद इस प्रक्रिया ने गति पकड़ी और अब देवेश कुमार के इस्तीफे से उनके लिए एमएलसी बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
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पत्रकारिता से शुरू हुआ सार्वजनिक जीवन
देवेश कुमार का नाम बिहार की राजनीति में लंबे समय से जाना-पहचाना रहा है। हालांकि उनकी पहचान की शुरुआत पत्रकारिता से हुई थी। उन्होंने वर्षों तक पत्रकार के रूप में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर काम किया। इसी दौरान उन्हें बिहार की राजनीति, प्रशासन और जनसरोकारों को करीब से समझने का मौका मिला। पत्रकारिता के अनुभव ने उन्हें जनजीवन की चुनौतियों से जोड़ने का काम किया। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति का रास्ता चुना और भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कीं।
समस्तीपुर से लेकर भाजपा संगठन तक का सफर
30 अगस्त 1964 को समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड के मोहम्मदपुर देवपाट गांव में जन्मे देवेश कुमार स्वतंत्रता सेनानी और किसान नेता यमुना कारजी के पोते हैं। उन्होंने पटना के सेंट माइकल हाई स्कूल और रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से शिक्षा हासिल की। इसके बाद एमए और एमफिल की पढ़ाई पूरी की। पारिवारिक सामाजिक विरासत और अपनी शिक्षा के दम पर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई। भाजपा से जुड़ने के बाद वे संगठन के भरोसेमंद नेताओं में शामिल हो गए।
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2021 में राज्यपाल कोटे से बने थे विधान पार्षद
देवेश कुमार को 17 मार्च 2021 को राज्यपाल के मनोनीत कोटे से बिहार विधान परिषद का सदस्य बनाया गया था। विधान परिषद में रहते हुए उन्होंने भाजपा की ओर से कई मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। सदन के भीतर उनकी उपस्थिति संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय के रूप में देखी जाती रही। करीब पांच वर्षों तक एमएलसी रहने के बाद अब उन्होंने स्वेच्छा से अपना पद छोड़ दिया, जिससे बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।