Dhanbad News : धनबाद कोयलांचल में दुर्गोत्सव की धूम के बीच धनसार का पूजा पंडाल इस बार हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है. यहां मां दुर्गा का दरबार फूलों की सजावट से नहीं, बल्कि एक लाख पौधों की हरियाली से सजाया गया है.

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पंडाल में कदम रखते ही प्रकृति के बीच मां के दर्शन का अहसास होता है. पेड़ों के बीच मां दुर्गा विराजमान हैं, तो कहीं कृत्रिम बरगद के पेड़ से वन देवी के प्रकट होने का दृश्य तैयार किया गया है. समिति ने इस अनूठी थीम के जरिए एक पेड़ मां के नाम का संदेश देने के साथ कोयलांचल में पर्यावरण संरक्षण की जरूरत को भी रेखांकित किया है.


भगवान जगन्नाथ के स्वरूप में पंडाल

धनसार दुर्गापूजा समिति ने पंडाल के बाहरी हिस्से को भगवान जगन्नाथ के चेहरे का आकार दिया है. इसे तैयार करने में बांस के करीब 40 हजार छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. पंडाल की बनावट और प्राकृतिक सजावट श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है.
पंडाल के भीतर तीन अलग-अलग लेयर में पर्यावरण और सनातन संस्कृति से जुड़े संदेशों को दर्शाया गया है. पहली लेयर में पौधों की सजावट के साथ पर्यावरण संरक्षण और झरिया की आग जैसी गंभीर समस्या को प्रदर्शित किया गया है. इसके जरिए कोयलांचल की पर्यावरणीय चुनौतियों की ओर लोगों का ध्यान खींचने का प्रयास किया गया है.


बरगद से वन देवी का स्वरूप

दूसरी लेयर में कृत्रिम बरगद के पेड़ को वन देवी का स्वरूप दिया गया है. मिट्टी और पेड़ की जड़ों के बीच से वन देवी के प्रकट होने का दृश्य प्रकृति और जीवन के आपसी संबंध को दर्शाता है.


तीसरी और अंतिम लेयर में मां दुर्गा अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं. मां के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाओं को पेड़ों की पत्तियों और हरियाली के बीच सजाया गया है. मां दुर्गा की प्रतिमा के ठीक सामने तुलसी का पौधा स्थापित किया गया है, जो सनातन परंपरा में तुलसी के महत्व और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है.


1946 से हो रहा दुर्गोत्सव, 17 लाख रुपये खर्च

धनसार दुर्गापूजा समिति वर्ष 1946 से दुर्गोत्सव का आयोजन करती आ रही है. इस वर्ष पंडाल निर्माण और सजावट पर करीब 17 लाख रुपये खर्च किए गए हैं. समिति ने विद्युत सज्जा पर भी विशेष ध्यान दिया है ताकि पंडाल की खूबसूरती और आकर्षण बढ़ाया जा सके.

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