By Oneindia Staff

Time Published: Monday, September 28, 2026, 9:59 [IST]

Dharavi Redevelopment: मुंबई के धारावी पुनर्विकास प्रोजेक्ट में घर खाली करने को लेकर अब नया नियम सामने आया है। जो निवासी प्रोजेक्ट के लिए तय समय पर अपना घर या झोपड़ी खाली करने में जानबूझकर देरी करेंगे, उन्हें मिलने वाला ट्रांजिट रेंट कम कर दिया जाएगा। यह फैसला अडानी धारावी प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड यानी ANDPL ने लिया है।

ANDPL का कहना है कि यह बदलाव उन लोगों पर लागू होगा जो समझाने-बुझाने के बाद भी घर खाली करने में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। जो परिवार स्वेच्छा से अपना घर खाली कर रहे हैं, उन्हें पहले की तरह पूरा ट्रांजिट रेंट और शिफ्टिंग लाभ मिलता रहेगा।

Dharavi Redevelopment

धारावी में ट्रांजिट रेंट क्यों घटाया गया?

ANDPL के मुताबिक, प्रोजेक्ट के लिए घर खाली कराने की प्रक्रिया में ज्यादातर परिवार बातचीत और काउंसलिंग के बाद खुद आगे आ रहे हैं। लेकिन कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं, जहां लोग लगातार देरी कर रहे हैं। इससे निर्माण का काम अटकता है और दूसरे परिवारों को भी इंतजार करना पड़ता है।

कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "काउंसलिंग से ज्यादातर परिवार खुद घर खाली कर रहे हैं और यही हमारा तरीका बना रहेगा। लेकिन किसी साइट का एक हिस्सा भी खाली नहीं होने पर वहां पुनर्वास का निर्माण शुरू नहीं हो सकता। जानबूझकर देरी होने पर हजारों परिवारों का घर भी देर से तैयार होता है और मजदूरों, मशीनों और दूसरे खर्चों का बोझ भी बढ़ता रहता है।" इसी वजह से अब गैर-सहयोग करने वाले निवासियों के लिए ट्रांजिट रेंट की दर कम करने का फैसला लिया गया है।

16 घरों से लेकर 85 परिवारों तक क्या हुआ?

ANDPL ने हाल की घटनाओं को इस फैसले की वजह से जोड़ा है। कंपनी के मुताबिक, 16 झोपड़ियों को तोड़ने के नोटिस दिए गए थे। इसके बाद प्रभावित परिवारों से बातचीत की गई। इनमें से 12 परिवार खुद घर खाली करने को तैयार हो गए। बाकी चार परिवारों ने घर खाली नहीं किया। इसके बाद पुलिस की मदद लेनी पड़ी।

इसके उलट एक दूसरे मामले में 85 झोपड़ियों को हटाने की जरूरत सामने आई। यहां काउंसलिंग के बाद सभी 85 परिवारों ने बिना किसी बल प्रयोग के अपने घर खाली कर दिए। कंपनी का कहना है कि इन घटनाओं से पता चलता है कि बातचीत के जरिए ज्यादातर परिवारों को साथ लिया जा सकता है। लेकिन कुछ लोग जानबूझकर प्रक्रिया लंबी खींचते हैं।

किसे कितना कम ट्रांजिट रेंट मिलेगा?

गैर-सहयोग करने वाले निवासियों के लिए ट्रांजिट रेंट में अलग-अलग कटौती की गई है। नई दरें इस तरह हैं।

  • ग्राउंड फ्लोर के निवासी: 18,000 रुपये की जगह 15,000 रुपये प्रति माह
  • ऊपरी मंजिल के निवासी: 15,000 रुपये की जगह 12,000 रुपये प्रति माह
  • कमर्शियल और इंडस्ट्रियल जगह: 175 रुपये प्रति वर्ग फुट की जगह 145 रुपये प्रति वर्ग फुट
  • इसके अलावा गैर-सहयोग करने वाले परिवारों को मिलने वाला 5,000 रुपये का एकमुश्त शिफ्टिंग अलाउंस भी नहीं मिलेगा।

यानी कटौती सिर्फ मासिक ट्रांजिट रेंट तक सीमित नहीं है। शिफ्ट होने के लिए मिलने वाली एकमुश्त रकम भी ऐसे परिवारों को नहीं दी जाएगी।

क्या घर खाली न करने पर रेंट पूरी तरह बंद हो सकता है?

ANDPL का कहना है कि महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट, 1971 की धारा 33 और 38 के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की गुंजाइश है। इसके अलावा डीसीपीआर 2034 के रेगुलेशन 33(10ए) की क्लॉज 1।14(iii) और (iv) का भी हवाला दिया गया है।

कंपनी के मुताबिक इन प्रावधानों के तहत किसी अहम सार्वजनिक बुनियादी ढांचा परियोजना में जानबूझकर रुकावट डालने वालों के रेंट या ट्रांजिट आवास के लाभ तक वापस लिए जा सकते हैं। हालांकि, एएनडीपीएल ने कहा है कि फिलहाल गैर-सहयोग करने वालों को भी पूरी तरह ट्रांजिट रेंट से बाहर नहीं किया जा रहा। उन्हें कम दर पर भुगतान किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस बंदोबस्त, अतिरिक्त मजदूर और मशीनरी पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है।

करीब 10 लाख लोगों से जुड़ा है धारावी प्रोजेक्ट

धारावी पुनर्विकास परियोजना का दायरा काफी बड़ा है। एएनडीपीएल इसे ऐसा प्रोजेक्ट बता रही है, जिसमें पात्र लोगों को रहने, कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े लाभ दिए जाएंगे। कंपनी के मुताबिक, पहली बार उन पात्र ग्राउंड फ्लोर निवासियों को धारावी में ही 350 वर्ग फुट का घर मुफ्त मिलेगा, जिनके घर 1 जनवरी 2000 या उससे पहले मौजूद थे।

वहीं 1 जनवरी 2000 से 2011 के बीच की श्रेणी में आने वाले पात्र लोगों को शहर की सीमा में 300 वर्ग फुट का घर मिलेगा। इसके लिए 2।5 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। 1 जनवरी 2011 के बाद धारावी में आए लोगों और 15 नवंबर 2022 तक मौजूद ऊपरी मंजिल के पात्र निवासियों को धारावी से बाहर 300 वर्ग फुट के घरों के लिए किफायती किराये की नीति के तहत रखा जाएगा।

एएनडीपीएल का कहना है कि यह प्रोजेक्ट करीब 10 लाख लोगों की जिंदगी से जुड़ा है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, "कुछ लोगों की जानबूझकर की गई देरी की वजह से करीब 10 लाख लोगों के घर और दूसरे मिलने वाले लाभ अटकने नहीं चाहिए।"

फिलहाल धारावी में घर खाली कराने और पुनर्वास निर्माण की प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। जहां परिवार स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं, वहां पूरी सुविधा जारी रखने की बात कही गई है। वहीं जानबूझकर देरी करने वाले निवासियों के लिए कम ट्रांजिट रेंट का रास्ता अपनाया गया है।