Published: Monday, July 27, 2026, 19:17 [IST]
NEET Paper Leak Case में धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) न्यूट्रल नजर आ रही है। लेकिन, सोशल मीडिया पर मामला अभी भी गरमाया गया है। इसी कड़ी में, 2019 से लंबित अपने IAS इस्तीफे को लेकर कन्नन गोपीनाथन ने पीएम मोदी को तंज भरे लहेजे में एक पोस्ट किया।
गोपीनाथन ने X (पूर्व में ट्विटर) में लिखा कि प्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अब जब आप इस्तीफे स्वीकार करना शुरू कर दिए हैं, तो कृपया मेरा भी स्वीकार कर लीजिए। सात साल हो गए हैं। इसमें पीएम मोदी को टैग करते हुए सवाल उठाया है। यह मामला अब डिजिटल बहस का केंद्र बन गया है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं पूर्व IAS कन्नन गोपीनाथन ? जिनका 7 साल से अटका इस्तीफा....
Who Is Kannan Gopinathan: कन्नन गोपीनाथन कौन हैं?
कन्नन गोपीनाथन केरल के 41 वर्षीय पूर्व IAS अधिकारी हैं। वे 2012 बैच के AGMUT कैडर (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) से ताल्लुक रखते हैं। सेवा के दौरान उन्होंने दादरा और नगर हवेली में पावर, शहरी विकास और टाउन प्लानिंग विभागों के सचिव के रूप में काम किया।
2018 के केरल बाढ़ के दौरान उन्होंने गुमनाम रूप से स्वयंसेवा करके सुर्खियां बटोरीं। 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण और जम्मू-कश्मीर में लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। बाद में वे नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के खिलाफ भी सक्रिय रहे। अक्टूबर 2025 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) जॉइन कर ली।
IAS Kannan Gopinathan Resignation Reason: इस्तीफा क्यों दिया और क्या हुआ?
21 अगस्त 2019 को गोपीनाथन ने इस्तीफा भेजा। उनका मुख्य मुद्दा था कि आर्टिकल 370 निरस्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर में लगाए गए कर्फ्यू, इंटरनेट बंदी, नेताओं और पत्रकारों की हिरासत। उन्होंने कहा था कि सरकार का फैसला हो सकता है, लेकिन पूरे राज्य को बंद करना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता छीनना लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
इस्तीफे के बाद सरकार ने उन्हें ड्यूटी जॉइन करने को कहा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। सरकार ने कर्तव्य में लापरवाही और मीडिया में आलोचना के आरोप में कार्रवाई शुरू की। UPSC ने वेतनमान कम करने की सिफारिश की, लेकिन गोपीनाथन कहते हैं कि उन्हें वेतन मिल ही नहीं रहा, तो कटौती किस आधार पर होगी? सात साल बीत गए, लेकिन इस्तीफा अभी तक स्वीकार नहीं हुआ है। मामला गृह मंत्रालय (Amit Shah) के पास लंबित है और DoPT (कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग) तक नहीं पहुंचा, जिसका सीधा नियंत्रण PMO के पास है।
हालिया पोस्ट और तंज क्या है?
मार्च 2026 में गोपीनाथन ने PM मोदी को टैग करते हुए लिखा कि इस्तीफा न स्वीकार करने से वे केरल विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाए। उन्होंने इसे 'Pure Harassment' बताया। जब एक यूजर ने पूछा कि क्या सरकार वेतन दे रही है, तो जवाब दिया कि न वेतन, न निलंबन, कुछ नहीं। बस चुपचाप बैठे हैं। इंस्टाग्राम पर PM की सक्रियता पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कैमरा एंगल, टेलीप्रॉम्प्टर और मेकअप आर्टिस्ट तक का जिक्र किया। ये तंज राजनीतिक मुद्दों को हाइलाइट करते हैं, लेकिन आलोचक उन्हें 'सरकारी सेवा में रहते हुए राजनीति' का उदाहरण बताते हैं।
अब अन्य मामलों से तुलना में समझें...
- शशिकांत सेंथिल: 2019 में इस्तीफा दिया, 2022 में स्वीकार हुआ। अब कांग्रेस सांसद हैं।
- शाह फैसल: 2019 में इस्तीफा, बाद में वापस सेवा में शामिल हुए।
- के. अन्नामलाई: 2019 में इस्तीफा स्वीकार, भाजपा में शामिल हुए, अब अलग संगठन।
गोपीनाथन का केस अनोखा है क्योंकि इतनी लंबी देरी का कोई पूर्व उदाहरण कम है।
IAS नियम और इस्तीफे की प्रक्रिया क्या है?
IAS अधिकारी All India Services Rules, 1954 के तहत काम करते हैं। इस्तीफा देने पर सरकार स्वीकार कर सकती है या मना कर सकती है। आमतौर पर 3 महीने की नोटिस पीरियड होता है, लेकिन संवेदनशील मामलों में देरी हो सकती है। विवादास्पद इस्तीफों में सरकार सतर्क रहती है, क्योंकि अधिकारी गोपनीय जानकारी रखते हैं।