केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को जवाबदेही और राष्ट्रीय हित का उदाहरण बताया। NEET विवाद के बीच उन्होंने कहा कि मोदी सरकार छात्रों के हितों और परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है।

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अमित शाह, गृह मंत्री ( फाइल फोटो )

  • Published: 26 Jul 2026, 09:29 AM IST
  • Last Updated: 26 Jul 2026, 09:29 AM IST

केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके फैसले की सार्वजनिक रूप से सराहना की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए राष्ट्र, युवा और छात्र किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण हैं और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी भावना को दर्शाता है।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के छात्रों की भावनाओं का सम्मान करती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुधार जारी रहेंगे तथा पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

NEET विवाद के बीच सरकार ने दोहराई सुधारों की प्रतिबद्धता
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार के फैसलों से NEET परीक्षा से जुड़े प्रभावित छात्रों को न्याय मिलेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित की जाएगी।

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की भी की सराहना
अमित शाह ने अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के रूप में किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन, पीएम श्री स्कूलों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, कौशल विकास कार्यक्रमों को मजबूती और उद्योग तथा शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में उनके योगदान की प्रशंसा की।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और विद्यार्थियों के अनुकूल बनाने की दिशा में धर्मेंद्र प्रधान ने कई महत्वपूर्ण पहल कीं, जो विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक रहीं।

इस्तीफे पर जारी है राजनीतिक बयानबाजी
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन और जवाबदेही की मांग तेज है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विपक्ष इसे छात्रों के आंदोलन का असर बता रहा है, जबकि भाजपा इसे जवाबदेही और राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाला निर्णय बता रही है।