आदित्य धर 'धुरंधर' की सफलता के बाद महान अहोम जनरल लचित बोरफुकन पर बायोपिक बनाने की तैयारी में हैं। ...और पढ़ें

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'धुरंधर' (Dhurandhar) फ्रैंचाइजी की सफलता के बाद हर किसी के मन में ये सवाल था कि आदित्य धर (Aditya Dhar) अगला प्रोजेक्ट कौन सा लेकर आ रहे हैं। इसको लेकर सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। अब खबर आ रही है कि फिल्ममेकर जल्द ही महान अहोम जनरल लचित बोरफुकन की कहानी को बड़े पर्दे पर ला सकते हैं।

हिमंत बिस्वा ने किया खुलासा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himant Biswa Sarma) ने बताया है कि उन्होंने इस बड़े प्रोजेक्ट को डायरेक्ट करने के लिए डायरेक्टर से संपर्क किया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को एक फेसबुक लाइव सेशन में बताया कि उन्होंने इस बड़े प्रोजेक्ट पर बातचीत के लिए आदित्य धर से संपर्क किया है। फिल्ममेकर की हालिया सफलता की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा,'फिल्म 'धुरंधर' बहुत बड़ी हिट रही थी। आदित्य धर इसके डायरेक्टर हैं और वे अपने दौर के सबसे मशहूर नामों में से एक हैं।'

आदित्य धर को साथ लेने की वजह बताते हुए हिमंत ने कहा कि उन्हें यकीन है कि एक बड़े पैमाने पर बनने वाली हिंदी फिल्म में लचित बोरफुकन की असाधारण विरासत को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने की क्षमता है। उन्होंने जोर देकर कहा,'मुझे लगता है कि अगर हमारी सरकार लचित बोरफुकन पर फिल्म बनाती है, तो हम उनके वीरतापूर्ण कार्यों को दुनिया भर में मशहूर कर सकते हैं। और यह हमारे लिए एक खास उपलब्धि होगी।'

दूसरे फिल्ममेकर्स से भी संपर्क करेंगे बिस्वा

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर धर फिल्म को डायरेक्ट नहीं कर पाते हैं, तो वे दूसरे फिल्ममेकर्स से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा,'अगर आदित्य धर फिल्म को डायरेक्ट नहीं कर पाते हैं, तो हम दूसरे डायरेक्टर्स से संपर्क करेंगे। मकसद यह पक्का करना है कि लचित बोरफुकन पर एक शानदार बायोपिक बने।'

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदित्य के साथ उनकी शुरुआती बातचीत सकारात्मक रही और उम्मीद है कि डायरेक्टर अगस्त में असम का दौरा करेंगे ताकि बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। इसके बाद प्रोजेक्ट के क्रिएटिव विजन पर भी चर्चा की जाएगी।

Aditya (17)

कौन थे लचित बोरफुकन?

लचित बोरफुकन मध्यकालीन असम के अहोम साम्राज्य के एक महान सैन्य कमांडर थे। उन्हें 1671 की सरायघाट की लड़ाई में अपनी साहसी लीडरशिप के लिए जाना जाता है,जहां उनकी रणनीतियों ने मुगल सेना को हराने में मदद की, जो उनसे कहीं ज्यादा ताकतवर थी। इस जीत ने पूर्वोत्तर भारत में मुगलों के विस्तार को हमेशा के लिए रोक दिया। बोरफुकन का जन्म 1622 में हुआ था और 1672 में उनका निधन हो गया।