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  • Authored by: मेधा चावला
  • Updated Aug 17, 2026, 11:42 AM IST

Diabetes Care in Monsoon: बारिश में डायबिटीज के मरीजों को संक्रमण, फंगल इंफेक्शन और पैरों के घाव का खतरा बढ़ सकता है। डॉक्टर से जानें मानसून में ब्लड शुगर और पैरों की देखभाल कैसे करें।

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मानसून में शुगर के मरीज क्या बरतें सावधानी, किन मामलों में बढ़ जाती है परेशानी

Diabetes Care in Monsoon: डायबिटीज के मरीजों के लिए मानसून अपने साथ कुछ मुश्किलें भी लेकर आता है। हवा में नमी बढ़ जाती है। जगह-जगह पानी जमा होने लगता है। खाने और पीने का पानी दूषित होने का खतरा भी बढ़ता है। इन परिस्थितियों में फंगल इंफेक्शन, पेट का संक्रमण, बुखार और पैरों में घाव जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं।

एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए पैर में हुआ छोटा-सा कट शायद मामूली बात हो, लेकिन डायबिटीज में इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं। ब्लड शुगर बढ़ी हुई हो तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है और घाव भरने में अधिक समय लग सकता है। इसलिए बरसात में डायबिटीज मैनेजमेंट का अर्थ सिर्फ मीठा कम खाना नहीं है। इस मौसम में त्वचा, पैर, भोजन, पानी और रोज की दिनचर्या- हर चीज पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।

बारिश में डायबिटीज के मरीजों की परेशानी क्यों बढ़ सकती है

डॉ. राहुल पाराशर (कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा) बताते हैं कि मानसून में नमी, दूषित पानी और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और ये सभी फैक्टर्स ब्लड शुगर कंट्रोल को प्रभावित कर सकते हैं। बढ़े हुए शुगर लेवल में पैरों में हुआ छोटा कट, छाला या फंगल इंफेक्शन भी आगे चल कर गंभीर रूप ले सकता है।

ऐसे में 5 बातें डायबिटीज के मरीजों को बारिश के मौसम में ध्यान रखनी चाहिए

1. ब्लड शुगर की नियमित जांच करें

बारिश में दिनचर्या, खानपान और शारीरिक गतिविधि बदलने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के मुताबिक शुगर की नियमित जांच करें। बुखार या संक्रमण होने पर जांच की जरूरत और बढ़ सकती है। अपनी मर्जी से दवा या इंसुलिन बंद न करें।

2. पैरों को गीला न रहने दें

गीले जूते-मोजे फंगल इंफेक्शन और छालों का कारण बन सकते हैं। बाहर से लौटकर पैरों को धोएं और उंगलियों के बीच तक अच्छी तरह सुखाएं। नंगे पैर चलने से बचें और आरामदायक जूते पहनें। रोज पैरों में कट, लालिमा, सूजन या छाले की जांच भी करें।

3. साफ पानी और ताजा भोजन लें

बारिश में पानी और भोजन के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। सड़क किनारे मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ, कटे फल, गोलगप्पे और खुले जूस से दूरी रखें। घर का ताजा और अच्छी तरह पका भोजन खाएं। पर्याप्त पानी पिएं, लेकिन किडनी या दिल की बीमारी होने पर मात्रा डॉक्टर से पूछें।

4. त्वचा और कपड़ों की सफाई रखें

मानसून की नमी फंगल और बैक्टीरियल इंफेक्शन को बढ़ा सकती है। पसीने या बारिश से भीगे कपड़ों को तुरंत बदलें। त्वचा की सिलवटों और उंगलियों के बीच के हिस्से को सूखा रखें। खुजली, लाल चकत्ते या सफेद परत दिखाई दे तो बिना सलाह के कोई क्रीम लगाने की जगह डॉक्टर से बात करें।

5. एक्सरसाइज और दवाओं का रूटीन न बिगाड़ें

बारिश के कारण बाहर टहलना संभव न हो तो घर के अंदर वॉक, स्ट्रेचिंग या डॉक्टर द्वारा बताया गया हल्का व्यायाम करें। भोजन और दवाओं का समय भी नियमित रखें। घाव ठीक न हो, लगातार बुखार आए या शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

मानसून में डायबिटिक फुट केयर कैसे करें

बारिश में बाहर से लौटने के बाद सिर्फ जूते उतार देना काफी नहीं है। पैरों को साफ करके अच्छी तरह सुखाएं। खासतौर पर उंगलियों के बीच नमी नहीं रहनी चाहिए।

  • गीले मोजे और जूते तुरंत बदलें।
  • नंगे पैर घर से बाहर न निकलें।
  • आरामदायक और सही आकार के जूते पहनें।
  • पैरों को बहुत गर्म पानी में न डालें।
  • नाखूनों को बहुत अंदर तक न काटें।
  • रोज तलवों और उंगलियों के बीच की त्वचा देखें।
  • कट, छाला, सूजन या लालिमा पर घरेलू नुस्खे लगाने से बचें।
  • घाव पर गंदा कपड़ा, हल्दी या कोई अनजान क्रीम न लगाएं।

यदि पैरों के तलवे आसानी से दिखाई नहीं देते, तो आईने की मदद ली जा सकती है। परिवार का कोई सदस्य भी रोज जांच करने में मदद कर सकता है।

बारिश में ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के तरीके

किस बात का ध्यान रखेंक्या करें
ब्लड शुगरडॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करें
दवाएंसमय पर लें, अपनी मर्जी से खुराक न बदलें
पानीसाफ और सुरक्षित पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं
भोजनतला हुआ, ज्यादा मीठा और बाहर का खुला खाना सीमित रखें
एक्सरसाइजबाहर बारिश हो तो घर के अंदर हल्की वॉक या व्यायाम करें
पैरों की देखभालरोज कट, छाले, लालिमा और सूजन की जांच करें
त्वचात्वचा को साफ और सूखा रखें, गीले कपड़े तुरंत बदलें

डॉक्टर से कब तुरंत संपर्क करें

इन संकेतों को सामान्य मानकर इंतजार न करें -

  • पैर का घाव ठीक न होना
  • घाव से पस, पानी या बदबू आना
  • पैर में लालिमा, गर्माहट या सूजन
  • त्वचा का रंग काला या नीला पड़ना
  • बार-बार या लगातार बुखार
  • उल्टी-दस्त के साथ कमजोरी
  • ब्लड शुगर का बहुत बढ़ना या बार-बार कम होना
  • सांस लेने में परेशानी या अधिक सुस्ती

मानसून में डायबिटीज के मरीजों को डरने की नहीं, सतर्क रहने की जरूरत है। रोज कुछ मिनट पैरों की जांच, समय पर दवा, सुरक्षित भोजन और नियमित शुगर मॉनिटरिंग बड़ी परेशानी से बचा सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। दवा, इंसुलिन या डाइट में बदलाव अपने डॉक्टर की सलाह से ही करें।

Medha Chawla

मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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