बागेश्वर धाम पहुंची 16 साल की नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप वाले मामले में नया मोड़ आया है। आरोपी राजू जाटव का DNA भ्रूण से मैच नहीं होने और कोर्ट में नाबालिग के अपने बयान से मुकरने के बावजूद हाईकोर्ट ने उसकी दूसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मा

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परिवार वालों से नाराज होकर 16 साल की नाबालिग 16 मार्च को बागेश्वर धाम पहुंची थी। अगले दिन 17 मार्च को उसकी मुलाकात राजगढ़ निवासी राजू जाटव से हुई। आरोप है कि राजू ने उसे घर छोड़ने का कहकर पास के खेत में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद वह किशोरी को करीब 15 दिन तक अपने साथ रखकर पचोर स्थित घर ले आया।

मामले की जानकारी राजू की पत्नी को हुई तो वह नाबालिग को लेकर पुलिस के पास पहुंची। किशोरी ने पुलिस और बाल कल्याण समिति के सामने घटना की जानकारी दी। इस दौरान पता चला कि वह गर्भवती है। राजगढ़ पुलिस ने जीरो पर मामला दर्ज कर केस डायरी छतरपुर पुलिस को भेज दी।

छतरपुर पुलिस ने राजू जाटव को गिरफ्तार किया। नाबालिग की चिकित्सकीय जांच में उसके करीब दो महीने की गर्भवती होने की पुष्टि हुई। बाद में गर्भपात कराया गया और भ्रूण को सुरक्षित रखा गया। आरोपी का ब्लड सैंपल भी लिया गया, ताकि डीएनए जांच के जरिए भ्रूण के जैविक पिता की पहचान की जा सके।

सागर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने प्लेसेंटा ऊतक, भ्रूण और नाबालिग के रक्त के नमूनों की जांच के बाद 29 अगस्त 2026 को रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में सामने आया कि राजू जाटव भ्रूण का जैविक पिता नहीं है।

हाईकोर्ट ने छतरपुर एसपी को SIT गठित कर यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि नाबालिग का यौन उत्पीड़न किसने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।

हाईकोर्ट ने छतरपुर एसपी को SIT गठित कर यह पता लगाने के निर्देश दिए हैं कि नाबालिग का यौन उत्पीड़न किसने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है।

कोर्ट में बयान से मुकर गई नाबालिग

मामले की सुनवाई के दौरान नाबालिग ने अभियोजन के आरोपों का समर्थन नहीं किया। जिरह में उसने कहा कि राजू ने उसके साथ दुष्कर्म नहीं किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया।

राजू जाटव की दूसरी जमानत याचिका पर 25 सितंबर को जस्टिस अजय निरंकारी की कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि भले ही आरोपी का डीएनए भ्रूण से मैच नहीं हुआ है, लेकिन यह तथ्य सामने आया है कि नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बने और वह गर्भवती हुई। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि नाबालिग ने बीएनएसएस की धारा 180 और 183 के तहत दर्ज शुरुआती बयानों में आरोपी पर बागेश्वर धाम में दुष्कर्म का आरोप लगाया था।

हाईकोर्ट ने SIT गठित करने के दिए निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की पूरी कड़ियों को जोड़ने के लिए विस्तृत जांच जरूरी है। कोर्ट ने छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसपी ने एसडीओपी खजुराहो के नेतृत्व में टीम गठित कर दी है।

SIT को यह पता लगाना है कि नाबालिग का यौन उत्पीड़न किसने किया और भ्रूण का जैविक पिता कौन है। कोर्ट ने जांच दो महीने में पूरी कर रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, घटना के समय नाबालिग की उम्र 16 साल, 2 महीने और 16 दिन थी।

3 अक्टूबर को धीरेंद्र शास्त्री ने महिलाओं को सावधान रहने की अपील की

3 अक्टूबर को धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने महिलाओं और माताओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने अनजान लोगों और यहां तक कि सेवादारों पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करने की सलाह दी। साथ ही मंदिर और हॉल के अलावा अन्य जगहों पर नहीं जाने और धाम में ज्यादा दिनों तक नहीं रुकने की बात कही थी।

हालांकि, धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी अपील में इस मामले का कोई जिक्र नहीं किया था। नाबालिग से जुड़े मामले के बीच उनकी अपील को सुरक्षा के लिहाज से देखा जा रहा है।