Dur Muhurtam: दिन का वो अशुभ समय, जब रुक जाते हैं सारे शुभ काम… जानिए क्या है दुर्मुहूर्त

दुर्मुहूर्तImage Credit source: pexels

पंचांग में किसी भी शुभ काम को शुरू करने से पहले तिथि, नक्षत्र और मुहूर्त का ध्यान रखने की परंपरा है. इसी में एक खास समय दुर्मुहूर्त भी होता है. मान्यता के अनुसार, इस दौरान नए और मांगलिक काम शुरू करने से बचना चाहिए. लेकिन आखिर दुर्मुहूर्त क्या होता है, यह दिन में कब आता है और इसे अशुभ क्यों माना जाता है? क्या इस समय पूजा-पाठ या रोजमर्रा के काम भी नहीं किए जा सकते, आइए जानते हैं इससे जुड़ी सभी जरूरी बातों के बारे में.

दुर्मुहूर्त क्या होता है?

पंचांग में दिन और रात के अलग-अलग समय को शुभ और अशुभ मुहूर्त के आधार पर देखा जाता है. दुर्मुहूर्त भी पंचांग में बताए गए अशुभ समयों में से एक माना जाता है. जो आमतौर पर 48 मिनट का होता है. दिन में दुर्मुहूर्त की अवधि बहुत लंबी नहीं होती, लेकिन इस दौरान कुछ खास मांगलिक कार्यों को शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है.

दुर्मुहूर्त में कौन से काम करने से बचें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दुर्मुहूर्त के समय नए मांगलिक कार्य शुरू करने से बचना चाहिए. जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नई दुकान या प्रतिष्ठान का शुभारंभ, किसी बड़े काम की शुरुआत या अन्य महत्वपूर्ण शुभ कार्यों के लिए इस समय को टालने की सलाह दी जाती है. मान्यता है कि शुभ काम के लिए सही मुहूर्त चुनने से कार्य की शुरुआत सकारात्मक तरीके से होती है. इसलिए लोग पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त तय करते हैं.

क्या दुर्मुहूर्त में पूजा-पाठ नहीं कर सकते?

दुर्मुहूर्त को मुख्य रूप से शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए प्रतिकूल समय माना जाता है. इसका मतलब यह नहीं है कि इस दौरान रोज की पूजा, मंत्र जाप, ध्यान या सामान्य धार्मिक गतिविधियां करना पूरी तरह वर्जित है.अगर किसी व्यक्ति की नियमित पूजा का समय दुर्मुहूर्त में पड़ जाए तो केवल इसी वजह से पूजा छोड़ना जरूरी नहीं माना जाता. धार्मिक मान्यताओं में नियमित पूजा और विशेष मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त के बीच अंतर किया जाता है.

दुर्मुहूर्त और राहुकाल एक ही हैं?

राहुकाल और दुर्मुहूर्त पंचांग के अलग-अलग समय माने जाते हैं. दोनों की गणना और महत्व अलग है. जहां राहुकाल सीधे छाया ग्रह राहु से संबंधित होता है और सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को 8 बराबर हिस्सों में बांटकर तय किया जाता है, वहीं दुर्मुहूर्त दिन-रात के 24 घंटों को 30 अलग-अलग मुहूर्तों में विभाजित करके निकाला जाता है. समयावधि की बात करें तो राहुकाल हर दिन लगभग 1.5 घंटे का होता है और दिन में केवल एक बार आता है, जबकि दुर्मुहूर्त केवल 48 मिनट यानी एक मुहूर्त का होता है.

ये भी पढ़ें: मेन गेट पर गणेश जी की तस्वीर शुभ, लेकिन इन देवी-देवताओं की तस्वीर लगाने से क्यों बचना चाहिए?

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

Read More

google button