Sep 10, 2026 06:53 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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मुख्य बातें

  • सरकार का यह कदम आगे चलकर पेट्रोल में एथनॉल की हिस्सेदारी बढ़ा सकता है
  • इससे देश की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू स्तर पर उपलब्ध ईंधन संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाने में मदद मिल सकती है
Supreme court says vehicles without valid third-party insurance no fuel at petrol pumps

पेट्रोल पर सरकार की बड़ी तैयारी

पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की मौजूदा E20 व्यवस्था के बाद सरकार अब इससे आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को कहा कि सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी से अधिक एथनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर काम कर रही है। हालांकि, ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन का इस्तेमाल फ्लेक्सी-फ्यूल व्हीकल्स (FFV) के जरिए किया जाएगा।

क्या है सरकार का प्लान?

एक कार्यक्रम में तरुण कपूर ने कहा कि E20 प्रोग्राम अबतक बहुत सफल रहा है और कई वाहन कंपनियों ने जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियां पेश करने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा, ''अब हमारा ध्यान फ्लेक्सी-फ्यूल गाड़ियों पर है और ऐसी सम्मिश्रण की मंजूरी देना है जो E20 से ज्यादा हो।'' उन्होंने कहा कि ऐसी गाड़ियों की पेशकश के साथ-साथ ईंधन बिक्री केंद्रों पर शुद्ध एथनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी। कपूर ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बीच जैव-ईंधन पर जोर देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट ने आपूर्ति में रुकावट डाली है और कच्चे तेल की कीमतों को लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा दिया है, साथ ही और बढ़ोतरी की आशंका भी बनी हुई है। उन्होंने कहा, ''यह जरूरी है कि हम देश में जो कुछ भी उपलब्ध है, उसका इस्तेमाल करने की कोशिश करें।''

उन्होंने कहा कि देश में एथनॉल उत्पादन की क्षमता पेट्रोल में इसे मिलाने की जरूरतों से ज्यादा हो गई है और इस अतिरिक्त क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के लिए उद्योग को एथनॉल के अन्य इस्तेमाल के तरीकों पर भी विचार करना होगा।

एथनॉल कितना, पेट्रोल कितना?

बता दें कि E20 में 80 फीसदी पेट्रोल और 20 फीसदी एथनॉल मिलाया जाता है। सरकार अब E20 से आगे जाकर एथनॉल की मात्रा बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, तरुण कपूर ने यह भी कहा कि इसका इस्तेमाल सामान्य पेट्रोल वाहनों के बजाय फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में करने की दिशा में काम किया जा रहा है। ये ऐसी गाड़ियां होती हैं, जिन्हें पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात में एथनॉल वाले ईंधन पर भी चलने के लिए डिजाइन किया जाता है।

डीजल के लिए भी है प्लान

डीजल सेग्मेंट के बारे में कपूर ने कहा कि सरकार जैव-ईंधन एडिटिव्स पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर आइसोब्यूटेनॉल के साथ किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह जैव-ईंधन के लिए एक 'बड़ा' नया रास्ता खोल सकते हैं, क्योंकि रिफाइनरी उत्पादन में डीजल का बड़ा हिस्सा होता है। उन्होंने सरकार की नई गोवर्धन योजना का भी जिक्र किया, जो संपींडित बायोगैस (सीबीजी) को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग मंत्रालयों से मिलने वाले मदद को एक साथ लाती है। इस क्षेत्र में अब तक सीमित प्रगति हुई है।