Kamika Ekadashi Kab Hai: हर साल सावन महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर कामिका एकादशी पड़ती है. इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. सनातन धर्म में इस एकादशी के व्रत को महत्वपूर्ण बताया गया है. इस व्रत को करने से साधक की मनचाही इच्छा पूरी होती है. आइए जानते हैं कि एकादशी की तिथि कब की है.
Published byNamrata Mohanty
Kamika Ekadashi Kab Hai: हर साल सावन महीने के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर कामिका एकादशी पड़ती है. इस दिन श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. सनातन धर्म में इस एकादशी के व्रत को महत्वपूर्ण बताया गया है. इस व्रत को करने से साधक की मनचाही इच्छा पूरी होती है. आइए जानते हैं कि एकादशी की तिथि कब की है.
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Ekadashi Kab Hai Photograph: (ai generated)
Kamika Ekadashi Kab Hai: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को बेहद खास माना जाता है. इस दिन व्रत रखा जाता है और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. हर साल 24 एकादशियां पड़ती है जिनमे से एक कृष्ण पक्ष की एकादशी होती है तो वहीं दूसरी शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है. कामिका एकादशी सावम मास की पहली एकादशी होती है. यह एकादशी हर वर्ष सावन में कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन आती है. पंचांग के अनुसार, इस साल कामिका एकादशी की तिथि को लेकर काफी ज्यादा कंफ्यूजन बना हुआ है. ऐसे में हमें सही तारिख के बारे में जानना चाहिए. तो आइए जानते हैं कि सावन मास कि कामिका एकादशी का व्रत आज या कल, कब रखा जाएगा. साथ ही नोट करें शुभ मुहूर्त और व्रत के नियम.
आज या कल, कब है कामिका एकादशी? (Ekadashi Kab Hai)
द्रिक पंचांग के अनुसार, कामिका एकादशी की तिथि आज यानी 3 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 59 मिनट पर शुरू हो जाएगी. एकादशी तिथि का समापन 9 अगस्त को सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत इस साल 9 अगस्त 2026, रविवार को ही रखा जाएगा.
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कामिका एकादशी पारण मुहूर्त
कामिका एकादशी का व्रत यदि 9 अगस्त को रखा जा रहा है तो व्रत का पारण 10 अगस्त 2026, सोमवार के दिन किया जाएगा. पारण करने के लिए इस दिन सुबह 5 बजकर 50 मिनट से लेकर 8 बजे तक का समय उत्तम रहेगा.
कामिका एकादशी पूजन विधि
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करें और फिर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. व्रत का संकल्प लें. भगवान विष्णु को पीले वस्त्र पहनाएं. उन्हें पीले फूल, अक्षत, धूप, दीप और पंचामृत का भोग लगाएं. विष्णु भगवान की पूजा में तुलसी का प्रयोग जरूर करना चाहिए. इसके बिना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है. कामिका एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें और इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम और उनके मंत्रों का पाठ भी कर सकते हैं. एकादशी की संध्या में तुलसी पौधे के सामने देसी घी या दीया अवश्य जलाएं.
कामिका एकादशी व्रत के नियम
खान-पान से जुड़े नियम
- अन्न का त्याग करें- इस दिन अन्न या चावल नहीं खाया जाता है.
- फलाहार- जो लोग बिना जल के व्रत नहीं रख सकते हैं. वे फल और दूध खा सकते हैं.
- दशमी का नियम- एकादशी का व्रत रख रहे हैं तो दशमी की रात से चावल का त्याग कर दें.
पूजा के नियम
- भगवान विष्णु को तुलसी जरूर अर्पित करें.
- इस दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें.
- संभव हो तो एकादशी की रात में सोने से बचे और भजन-कीर्तन करें.
आचरण से जुड़े नियम
- व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें.
- इस दिन किसी की चुगली या निंदा बिल्कुल न करें.
- दिनभर सोने से बचें और धार्मिक पुस्तकों का पाठ करें.
पारण के नियम
- व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि पर होता है. इसलिए, सूर्योदय के बाद पारण किया जाएगा.
- पारण के समय पहले भगवान को भोग लगाएं. जरूरतमंद और ब्राह्मणों को दान दें और फर खुद भोजन खाएं.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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