पटना18 मिनट पहले

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बिहार की मेधा और प्रबंधन ने एक बार फिर दुनिया के सामने मिसाल पेश की है। भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि बिहार ने चुनावी सुधारों और एसआईआर में जो राह दिखाई है, उसे अब अमेरिका समेत पूरी दुनिया सीखने की कोशिश कर रही है।

बिहार की इसी सफलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने देशव्यापी ‘निर्वाचन साक्षरता क्लब 2.0’ और ‘ECI NET’ का शुभारंभ भी बिहार की धरती से ही किया है। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने नालंदा में कहा कि बिहार में अपनाई गई एसआईआर प्रक्रिया से भारत ने सीखा और अब दुनिया इसे देख रही है।

युवा शक्ति और महिलाओं का दम

बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि बिहार देश की सबसे युवा आबादी वाला राज्य है, जहां 58 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम उम्र की है। बिहार में 67.25 प्रतिशत मतदान होना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी 71.77 प्रतिशत रही। चुनाव आयोग अब इन युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने पर ध्यान दे रहा है।

डिजिटल इंडिया का नया चेहरा: ECI NET

भ्रामक खबरों (फेक न्यूज) से निपटने के लिए आयोग ने ECI NET ऐप पर जोर दिया है। वर्तमान में इसके 11 करोड़ डाउनलोड हैं, जिसे 30 करोड़ तक ले जाने का लक्ष्य है। सीईसी ने सुझाव दिया कि प्राचीन लोकतंत्र की जननी वैशाली और ज्ञान की भूमि नालंदा के महत्व को देखते हुए नालंदा विवि में विशेष पाठ्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए।

बिहार ने रचा कीर्तिमान

रिकॉर्ड समय : बिहार के बीएलओ ने महज एक महीने में विशेष गहन पुनरीक्षण का काम पूरा किया। ग्लोबल लीडर : दुनिया के 85 लोकतांत्रिक देशों में से भारत सबसे आगे है, जो पारदर्शी मतदान की जानकारी अन्य देशों को दे रहा है। नया नाम : निर्वाचन साक्षरता क्लब का नाम बदलकर एएसडीडीएफ हुआ। नालंदा कनेक्शन : इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट और नालंदा विवि के बीच अकादमिक सहयोग।

बिहार बना इलेक्शन इनोवेशन हब

बिहार में चुनाव कराना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में बीएलओ स्तर पर जो माइक्रो-मैनेजमेंट हुआ है, उसने चुनाव आयोग का भरोसा जीता है। बिहार की 58% युवा आबादी चुनाव आयोग के लिए एक ‘फर्टाइल ग्राउंड’ है, जहां डिजिटल टूल (जैसे ECI NET) का प्रयोग सबसे सफल हो सकता है। जब अमेरिका जैसा देश बिहार के मॉडल को फॉलो करता है, तो यह केवल प्रशासनिक जीत नहीं बल्कि बिहार की ‘इलेक्शन लिटरेसी’ की वैश्विक स्वीकार्यता है। नालंदा विवि में चुनावी कोर्स शुरू करने का सुझाव इस मॉडल को संस्थागत रूप देने की बड़ी कोशिश है।

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