भोपाल हरिभूमि-आईएनएच न्यूज़ के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी से विशेष बातचीत में भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने, अपने राजनीतिक भविष्य, दतिया उपचुनाव, भाजपा संगठन और कांग्रेस के आरोपों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मैं 30 साल विधायक और 15 साल मंत्री रहा, पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं, लेकिन पार्टी का फैसला सर्वोपरि है।

Narottam Mishra Exclusive Interview

यहां देखें डॉ. नरोत्तम मिश्रा का पूरा एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

  • Published: 22 Jul 2026, 10:54 AM IST
  • Last Updated: 22 Jul 2026, 10:54 AM IST

'पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, पूरी निष्ठा से निभाऊंगा'

डॉ. मिश्रा ने टिकट नहीं मिलने के सवाल पर कहा कि चुनाव हारने के बाद पार्टी समीक्षा करती है और संगठन तय करता है कि किसे कौन-सी जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो किसी तरह की नाराजगी है और न ही कोई शिकायत। भाजपा का कार्यकर्ता होने के नाते पार्टी जहां भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि "मैं 30 साल विधायक और 15 साल मंत्री रहा हूं। पार्टी ने मुझे जितना दिया, उससे ज्यादा मैं क्या मांग सकता हूं। इच्छाएं कभी खत्म नहीं होतीं, लेकिन पार्टी का फैसला सर्वोपरि होता है।"

'दतिया कांग्रेस नहीं जीती, मैं हारा'

दतिया विधानसभा चुनाव में लगातार दो हार पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि उनकी हार के पीछे कई कारण रहे। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी के अंदर अंतर्विरोध का भी असर पड़ा। साथ ही कांग्रेस द्वारा बनाया गया माहौल भी एक वजह बना।

उन्होंने कहा कि "आज भी मेरा मानना है कि दतिया में कांग्रेस नहीं जीती, बल्कि मैं हारा था। अंतर्विरोध के कारण मुझे नुकसान हुआ और कांग्रेस उस स्थिति का फायदा उठाने में सफल रही।"

'मैनेजमेंट की वजह से नहीं, अंतर्विरोध की वजह से हारा'

अपने विरोधियों द्वारा लगाए जाने वाले राजनीतिक मैनेजमेंट के आरोपों को खारिज करते हुए डॉ. मिश्रा ने कहा कि उन्होंने कभी राजनीति में मैनेजमेंट की राजनीति नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा होता तो कांग्रेस बाद में अपने प्रत्याशी का टिकट नहीं काटती।

उनका कहना था कि चुनावी हार का कारण संगठन के भीतर का अंतर्विरोध था, न कि किसी तरह का राजनीतिक मैनेजमेंट।

'टिकट नहीं मिलने से चंपरायम सिंह को टिकट मिला, ऐसा नहीं मानता'

दतिया उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि उनके चुनाव मैदान से बाहर रहने की वजह से किसी और को टिकट मिला। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनकी किसी से व्यक्तिगत चर्चा भी नहीं हुई।

उन्होंने बताया कि टिकट वितरण के दौरान उनकी मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और चुनाव संयोजक से चर्चा हुई थी। टिकट कटने के बाद वह भोपाल और दिल्ली गए और फिर अपने गांव लौट आए।

'सभी कार्यकर्ता पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं'

इस सवाल पर कि टिकट नहीं मिलने के बाद क्या उनके समर्थक पूरी सक्रियता से चुनाव में काम कर रहे हैं, डॉ. मिश्रा ने कहा कि उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को चुनावी काम में लगा दिया है और स्वयं भी लगातार सक्रिय हैं।

उन्होंने कहा कि मतभेद किसी भी संगठन में हो सकते हैं, लेकिन भाजपा में कार्यकर्ता पार्टी के निर्णय को सर्वोपरि मानते हैं। उनके अनुसार कोई भी कार्यकर्ता नाराज नहीं है और सभी मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।

कार्यकर्ता पर हमला देख हुए भावुक

चुनाव प्रचार के दौरान भावुक होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके सामने एक कार्यकर्ता के सिर पर हमला हुआ था। घायल कार्यकर्ता को देखकर वह भावुक हो गए थे। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मामले में कार्रवाई की है और कानून अपना काम कर रहा है।

रोजगार भर्ती मामले पर दिया जवाब

रोजगार भर्ती से जुड़े आरोपों पर डॉ. मिश्रा ने कहा कि यह वर्ष 1998 का पुराना मामला है। अदालत के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई हुई है और पूरा मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए कानून अपनी प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रहा है।

'दतिया में विकास सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा'

दतिया उपचुनाव के मुद्दों पर उन्होंने कहा कि विकास ही सबसे बड़ा मुद्दा है। उन्होंने जिले में औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं बताते हुए कहा कि बेहतर सड़क और रेल कनेक्टिविटी के साथ बड़े उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए।

डॉ. मिश्रा ने कहा कि दतिया में उद्योग लगने से युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा और क्षेत्र का आर्थिक विकास भी तेज होगा। उनके अनुसार दतिया में औद्योगिक क्रांति की पूरी संभावना है और आने वाले समय में इसी दिशा में काम होना चाहिए।

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