Hollywood Vs Bollywood Movies: फिल्म प्रेमी यह बात अच्छी तरह से जानते हैं कि हॉलीवुड और बॉलीवुड की तुलना कई सालों से होती आ रही है. एक तरफ जहां कई लोगों को बॉलीवुड के सॉन्ग, इमोशन और फैमिली ड्रामा पसंद आता है, तो कई लोग हॉलीवुड फिल्मों का एक्शन, स्टोरी और जबरदस्त टेक्नोलॉजी के फैन हैं. लेकिन दोनों फिल्म इंडस्ट्री के बीच कंपैरिजन किया जाए तो कई ऐसी कई वजहें हैं जिन कारण से हॉलीवुड को आज दुनिया की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री माना जाता है. इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बॉलीवुड बढ़िया नहीं बनाता है. 'दंगल', बाहुबली '3 इडियट्स' और आरआरआर जैसी फिल्मों ने दुनिया भर में इंडिया का नाम रोशन किया है. हालांकि, ऐसे भी कई फैक्ट हैं, जिससे हॉलीवुड की फिल्मों को अलग पहचान मिलती है. आइए यहां पर जानते हैं कि आखिर हॉलीवुड की फिल्में कई मामलों में बॉलीवुड से आगे क्यों मानी जाती हैं.

1. हॉलीवुड फिल्मों पर होता है मोटा पैसा खर्च

बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के बीच सबसे बड़ा फर्क खर्चे यानी बजट का होता है. हॉलीवुड की बड़ी फिल्मों पर हजारों करोड़ रुपये में बनकर तैयार होती हैं. वहीं बॉलीवुड फिल्मों का बजट इसके मुकाबले काफी छोटा होता है.किसी भी फिल्म पर ज्यादा बजट लगाने से उसका सीधा फायदा यह होता है कि फिल्म में बेहतर कैमरे, शानदार सेट, बड़ी लोकेशन, अच्छे आर्टिस्ट और दुनिया की नई टेक्नोलॉजी यूज की जा सकती है. आप 'अवतार', 'एवेंजर्स' और 'मिशन इम्पॉसिबल' जैसी फिल्मों को देखकर इसका अंदाजा लगा सकते हैं. बड़े बजट की वजह से हर सीन ज्यादा रियल और भव्य लगता है. 

2. वीएफएक्स और टेक्नोलॉजी का जवाब नहीं

आज के समय में वीएफएक्स किसी भी बड़ी फिल्म के लिए बहुत ही अहम हो गया है. सुपरहीरो, एलियन, बड़े धमाके, स्पेस या डायनासोर जैसे सीन बिना वीएफएक्स के तैयार नहीं किए जा सकते हैं. हॉलीवुड की कई कंपनियां पिछले कई सालों से सिर्फ इसी काम में लगी हुई हैं. उनके पास एक्सपीरियंस भी है और नई टेक्नोलॉजी भी मौजूद है. इसलिए स्क्रीन पर दिखाई देना वाला हर सीन असली जैसा लगता है. बॉलीवुड ने वीएफएक्स और मॉर्डन टेक्नोलॉजी में काफी तरक्की की है, लेकिन अभी भी कई फिल्मों में वीएफएक्स उतना बढ़िया नहीं दिखता जितना हॉलीवुड में होता है. 

3. फिल्म की स्टोरी पर की जाती है मेहनत

हॉलीवुड में किसी भी फिल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले उसकी स्टोरी पर बारीकी से काम किया जाता है. इसके लिए कई राइटर स्टोरी के बारे में सोचते हैं फिर लिखते हैं. हर सीन को बार-बार पढ़ा और उसमें बदलाव किए जाते हैं ताकि स्टोरी में कोई कमी न रह जाए.वहीं,  बॉलीवुड में कई बार शूटिंग शुरू होने के बाद भी स्टोरी और डायलॉग बदलते रहते हैं. हालांकि, कुछ फिल्मों के लिए यह तरीका काम करता है लेकिन कई बारे इससे स्टोरी कमजोर भी हो जाती है. फिल्म की बेहतरीन स्टोरी ही उसकी असली जान होती है और हॉलीवुड इंडस्ट्री में इस बात पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है. 

4. स्टार नहीं बल्कि किरदार को दी जाती है इंपोर्टेंस

आपने गौर किया होगा कि बॉलीवुड फिल्मों की टिकटें अक्सर स्टार के नाम से बिकती हैं. कई बार लोग फिल्म की कहानी पर ज्यादा इस बात  पर ध्यान देते हैं कि हीरो कैसा दिखेगा और उसकी एंट्री कितनी दमदार होगी. वहीं, दूसरी तरफ हॉलीवुड फिल्मों को लेकर ऐसा कम ही देखने को मिलता है. वहां के कलाकार खुद को फिल्म के किरदार के मुताबिक खुद बदलते हैं. जरूरत पड़ने पर वजन बढ़ाते हैं, घटाते हैं या महीनों तक ट्रेनिंग करते हैं. उनका पूरा फोकस इस बात पर होता है कि ऑडियंस  को उनका किरदार रियल लगे. यही वजह है कि वहां के कई कलाकार हर फिल्म में बिल्कुल अलग नजर आते हैं.

5. हॉलीवुड में बनाई जाती हैं हर तरह की फिल्में

हॉलीवुड में सिर्फ एक्शन या सुपरहीरो फिल्में ही नहीं बनती हैं. वहां साइंस, स्पेस, इतिहास, वार, स्पोर्ट्स, हॉरर, कॉमेडी, थ्रिलर, बायोपिक और रियल इंसिडेंट पर बेस्ड फिल्में बड़ी संख्या में बनती हैं. ऐसे में लोगों को हर साल कुछ नया और खास देखने के लिए मिलता है. यहीं वजह की वहां के प्रोड्यूसर नए आइडिया पर पैसा लगाने से पीछे नहीं हटते हैं. बॉलीवुड में ऐसा कम देखने को मिलता है. लेकिन अब बदलाव हो रहा है, यहां पर भी अलग-अलग मुद्दों पर फिल्में बनाई जा रही हैं लेकिन यहां लंबे से रोमांस, एक्शन और फैमिली ड्रामा पर आधारित फिल्मों पर ज्यादा फोकस रहा है. ऐसे में कई बार लोगों को स्टोरी एक जैसी लगती है. 

6. सभी को ध्यान में रखकर बनाई जाती है फिल्म 

हॉलीवुड की फिल्में केवल अपने देश के लोगों के लिए नहीं बनती हैं. मेकर्स शुरू से ही इस बात को ध्यान में रखते हैं कि उनकी फिल्म भारत, जापान, चीन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में भी देखी जाएगी. इसलिए स्टोरी ऐसी रखी जाती है, जिससे दुनिया का कोई भी इंसान जुड़ाव महसूस करे. यही वजह है कि हॉलीवुड की एक फिल्म कई भाषाओं में कई देशों में रिलीज होती है और दुनियाभर से कमाई करती है. वहीं, दूसरी तरफ बॉलीवुड की कई फिल्में इंडियन स्टाइल,फैमिली और यहां के कल्चर पर बेस्ड होती है. ऐसी फिल्मों को इंडियन ऑडियंस तो पसंद करती है लेकिन विदेशी लोग इससे पूरी तरह जुड़ नहीं पाते हैं. 

7. फिल्म की रफ्तार नहीं टूटती

बॉलीवुड की फिल्मों  की पहचान गानों से होती है. कई गाने आज भी लोगों की जुबान पर मौजूद हैं. लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि स्टोरी के बीच अचानक गाना आ जाता है और फिल्म की स्पीड धीमी पड़ जाती है. हॉलीवुड में ऐसा कम देखने को मिलता है.हॉलीवुड फिल्मों ऐसा नहीं होता है, उनमें बैकग्राउंड म्यूजिक इस्तेमाल किया जाता है, जिससे फिल्म लगातार आगे बढ़ती रहती है. यही कारण है कि हॉलीवुड की फिल्मों की स्टोरी से लोग जुड़े रहते हैं और उनका ध्यान नहीं भटकता.

8. कलाकारों का काम करने तरीका होता है अलग

हॉलीवुड में फिल्म बनाना किसी बड़ी कंपनी की तरह होता है.हर किसी का काम पहले से ही तय होता है. शूटिंग कब होगी, कितना टाइम लगेगा, किसे क्या करना है,सब कुछ पहले ही तय कर लिया जाता है. वहां के कलाकारों से लेकर टेक्निकल टीम तक सभी के लिए रूल्स बने हुए हैं. टाइम पर शूटिंग शुरू होती है और समय पर फिनिश भी होती है. बॉलीवुड में भी अब काफी बदलाव आया है, लेकिन कई बार आखिरी टाइम में बदलाव, शूटिंग में देरी या दूसरी दिक्कतें देखने को मिल जाती हैं. इसका असर फिल्म पर भी पड़ता है.

9. प्रोड्यूसर नए आइडिया पर पैसा लगाने से नहीं डरते

हॉलीवुड की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वहां हर साल नई तरह की स्टोरी पर फिल्में बनती हैं. अगर किसी राइटर के पास अलग आइडिया है और स्टूडियो या प्रोड्यूसर को भरोसा है, तो उस पर करोड़ों रुपये खर्च करने से पीछे नहीं हटते हैं. बॉलीवुड में भी ओरिजिनल फिल्में बनती हैं, लेकिन लंबे टाइम तक यहां रीमेक और पुराने फॉर्मूले पर ज्यादा फोकस किया जाता रहा है. कई फिल्मों पर कॉपी करने के आरोप भी लगे. हालांकि अब ऐसा कम देखने के लिए मिलता है और नए डायरेक्टर और राइटर अलग-अलग स्टोरी आइडियाज लेकर आ रहे हैं. फिर भी इस मामले में हॉलीवुड अभी काफी आगे माना जाता है.

10. डिस्ट्रीब्यूशन करने का तरीका है अलग

किसी के लिए भी अच्छी फिल्म बनाना ही काफी नहीं होता. फिल्म बनान के बाद उसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी होता है. हॉलीवुड इस काम में भी मजबूत है. हॉलीवुड में किसी भी फिल्म की मार्केटिंग कई महीने पहले शुरू हो जाती है. ट्रेलर, पोस्टर, इंटरव्यू, सोशल मीडिया, फैन इवेंट और प्रमोशन पर मोटा पैसा खर्च किया जाता है. फिर फिल्म एक ही दिन  दुनिया के कई देशों में हजारों स्क्रीन पर उसे रिलीज किया जाता है. इससे पहले ही हफ्ते में बड़ी कमाई कर लेती है. यही पैसा आने वाली फिल्मों को और बेहतर बनाने में लगाया जाता है.

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