Hanuman Ansh Missed Oscar Race: नीम करोली बाबा पर बनी हनुमान अंश सिर्फ दो 2 करोड़ रुपये में बनी थी और इसने अब तक 280 करोड़ रुपये का दुनियाभर से कलेक्शन कर लिया है. इसके बावजूद भी ये फिल्म ऑस्कर की रेस में जगह नहीं बना पाई. आखिर बॉक्स ऑफिस की इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद फिल्म रेस में पीछे क्यों रह गई. आइए इसके पीछे का पूरा कारण समझते हैं.

Hanuman Ansh Missed Oscar Race: नीम करोली बाबा पर बनी हनुमान अंश सिर्फ दो 2 करोड़ रुपये में बनी थी और इसने अब तक 280 करोड़ रुपये का दुनियाभर से कलेक्शन कर लिया है. इसके बावजूद भी ये फिल्म ऑस्कर की रेस में जगह नहीं बना पाई. आखिर बॉक्स ऑफिस की इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद फिल्म रेस में पीछे क्यों रह गई. आइए इसके पीछे का पूरा कारण समझते हैं.

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Hanuman Ansh Missed Oscar Race: इंडियन सिनेमा की हिस्ट्री में जब भी रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली फिल्मों की बात होगी तो उस लिस्ट में इस साल यानी 2026 में रिलीज हुई फिल्म हनुमान अंश (Hanuman Ansh) का नाम जरूर शामिल किया जाएगा. करीब 2 करोड़ रुपये में बनी यह फिल्म शुरुआत में कमाई नहीं कर पा रही थी, इसने ओपनिंग डे पर सिर्फ 10 लाख रुपये कमाए थे. लेकिन धीरे-धीरे दर्शकों की जुबान और सोशल मीडिया ने इसकी ऐसी किस्मत बदल दी कि इसने कई बड़ी फिल्मों का रिकॉर्ड तोड़ दिया. अब तक अनुमान अंश ने दुनिया भर से 280 करोड़ रुपये का ग्रॉस लेकिन लिया है. हालांकि, इस फिल्म को पंसद करने वालों का दिल तब टूट गया, जब ये ऑस्कर 2027 (Oscar 2027) की रेस से बाहर हो गई. सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म को किसी जूरी ने बाहर नहीं किया. असल में इसकी वजह कुछ और है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं.

क्या 'Hanuman Ansh' को ऑस्कर कमेटी ने रिजेक्ट किया?

लोगों के मन में सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि इसे ऑस्कर कमेटी ने रिजेक्ट कर दिया. सोशल मीडिया पर 'ऑस्कर से बाहर' सुनते ही ऐसा लग सकता है कि फिल्म किसी कमेटी के सामने गई, यहां पर दूसरी फिल्मों से मुकाबला हुआ और फिर इसे रेस बाहर कर दिया. लेकिन 'Hanuman Ansh' के मामले में ऐसा नहीं हुआ. फिल्म की प्रोड्यूसर नम्रता सिंह के मुताबिक ने बताया कि भारत की ऑफिशियल एंट्री के लिए फिल्म समय पर सबमिट ही नहीं हो पाई. इसलिए इसे किसी जूरी का फैसला कहना सही नहीं होगा. ऐसे में यह फिल्म अब इस साल बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी के लिए इंडिया की ऑफिशियल एंटरी नहीं बन सकती, क्योंकि सबमिशन डेडलाइन निकल गई.

यह फर्क बहुत जरूरी है. अगर कोई फिल्म आवेदन करती है और सिलेक्ट करने वाली कमेटी उसे नहीं चुनती, तो वह सेलेक्शन कहा जाता. यहां तो मामला उससे पहले ही खत्म हो गया. भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए फिल्म चुनने का प्रोसेस में फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया यानी एफएफआई करती है. इसलिए हनुमान अंश (Hanuman Ansh) की बॉक्स ऑफिस कामयाबी भी उसे ऑस्कर की ऑफिशियल एंटरी नहीं बना सकती थी. 

7 सितंबर की डेडलाइन क्यों बनी भारी?

इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा मोड़ ही 7 सितंबर की डेडलाइन है. नम्रता सिंह ने बताया कि यही ऑस्कर सबमिशन की आखिरी तारीख थी और टीम से ये मिस हो गई. उन्होंने यह भी माना कि टीम बहुत छोटी है और फिल्म को अचानक मिली सेक्सेस के बाद कई काम एक साथ चल रहे थे. जिसमें तेलुगु डबिंग, दूसरी भाषाओं पर काम, एक्सेसिबिलिटी और फिल्म की ओवरसीज रिलीज शामिल थीं. उन्होंने यह भी कहा कि ऑफिस में उस टाइम बहुत कम लोग थे, जबकि फिल्म के आर्टिस्ट और डायरेक्टर टूर पर थे.

ऐसे में इसका यह मतलब नहीं है कि मेकर्स ने जानबूझकर ऑस्कर से दूरी बनाई. असल समस्या यह थी कि जिस फिल्म ने उम्मीद से ज्यााद अचानक कमाई करनी शुरू कर दी तो टीम उसी कामयाबी में बिजी हो गई. शुरुआत में फिल्म ने बहुत छोटा बिजनेस किया था, फिर तीसरे हफ्ते से इसकी कमाई में बहुत ज्यादा उछाल आया. जिससे की वजह से मेकर्स सभी चीजें अच्छे से मैनेज नहीं कर पाए. 

सिर्फ हिट होना नहीं है ऑस्कर का पैमाना

आपको यहां एक और जरूरी बात समझनी चाहिए. बॉक्स ऑफिस पर कमाई और ऑस्कर दो अलग-अलग चीजें होती हैं. अगर कोई फिल्म 200 करोड़, 500 करोड़ या 1000 करोड़ कमाए, इससे वह अपने आप ऑस्कर के लिए एलिजिबल या सेलेक्टेड नहीं हो जाती. ऑस्कर की इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में कोई देश अपनी ऑफिशियल एंटरी चुनता है. उसके बाद एकेडमी के रूल्स के हिसाब से उस फिल्म की एलिजिबिलिटी तय की जाती है.

एकेडमी के इंटरनेशनल फीचर के लिए कई शर्तें होती हैं. फिल्म फीचर-लेंथ होनी चाहिए, अमेरिका के बाहर की होनी चाहिए और उसकी डायलॉग ट्रैक में 50 प्रतिशत से ज्यादा गैर-अंग्रेजी डायलॉग होने चाहिए. इसके अलावा क्वालिफाइंग थिएट्रिकल एग्जिबिशन की भी कंडिशन होती है. 

फिल्म की सक्सेस कैसे बनी टीम के लिए समस्या?

हनुमान अंश के साथ सबसे अजीब तो यही हुआ कि टीम बहुत छोटी है. यह कोई ऐसा बड़ा स्टूडियो प्रोजेक्ट नहीं था जिसके पास हर काम का डिपार्टमेंट हो. फिल्म को करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया और इसकी सक्सेस मुख्य रूप से वर्ड ऑफ माउथ से बढ़ी हुई. जब फिल्म ने बड़ी कमाई करनी शुरू की तो छोटे सेटअप के सामने नए काम खुलते गए. ज्यादा थिएटर संभालना, ओवरसीज रिलीज की तैयारी करना. ये भी एक समस्या का कारण था. नम्रता सिंह ने खुद अपनी छोटी टीम को लेकर कहा कि वे एक समय में एक काम पूरा करने पर ध्यान दे रहे थे. यही वजह है कि ऑस्कर सबमिशन का प्रोसेस नहीं पूरा हो सका. 

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