Ramlila viral video: दशहरे आते ही देशभर में रामलीलाओं का मंचन हो रहा है. कहीं राम-सीता के मिलन और रावण वध की पारंपरिक लीला हो रही है तो कहीं मंच पर फिल्मी गानों की धुन सुनाई दे रही है. शूर्पणखा लक्ष्मण को गुलाब देकर प्यार का इजहार कर रही है और कलाकार अपने संवादों में आधुनिक अंदाज जोड़ रहे हैं. उधर, रावण दहन के साथ कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना और राजनीतिक चेहरों को रावण के प्रतीक के रूप में दिखाने वाले पोस्टर भी चर्चा में हैं.
इन घटनाओं ने सोशल मीडिया पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या धार्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी के हिसाब से पेश करना जरूरी है या ऐसा करते हुए उनकी मूल भावना और मर्यादा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है?
Welcome to West Delhi 😉😂🤣 pic.twitter.com/j2hXL5Em7F
— GARRY ♠️ (@tru_indiann) October 17, 2026
बदलते दौर का मनोरंजन या लोक परंपराओं को लोकप्रिय बनाने का तरीका
एक तरफ कुछ लोग इसे बदलते दौर का मनोरंजन और लोक परंपराओं को लोकप्रिय बनाने का तरीका मानते हैं. दूसरी तरफ आलोचकों का कहना है कि रामलीला केवल मनोरंजन का मंच नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ा आयोजन है. ऐसे में हर तरह के प्रयोग को सही नहीं ठहराया जा सकता.
मुख्यमंत्री जी के संगी साथ और उनके ट्रूपर्स जो नीचताई वाली हरकत कर रहे हैं उसका जवाब अगर मिलने लगे..
तो FIR FIR मत खेलने लगना और ये मत विक्तमकार्ड खेलने लगना कि ये तो संन्यासी है.. pic.twitter.com/K0UlyAUG6W
— मनीष यादव रायबरेली (@YadavManish1001) October 18, 2026
मुजफ्फरनगर में शूर्पणखा ने लक्ष्मण को गुलाब देकर क्यों किया प्रपोज?
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की रामलीला का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इसमें शूर्पणखा का किरदार निभा रही कलाकार लक्ष्मण के सामने लाल गुलाब लेकर पहुंचती है और 1987 में आई फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के मशहूर गाने ‘काटे नहीं कटते ये दिन ये रात’ के अंदाज में अपने प्रेम का इजहार करती नजर आती है. यह वही प्रसंग है जिसमें शूर्पणखा राम और लक्ष्मण के सामने विवाह का प्रस्ताव रखती है. पारंपरिक रामलीला में इस दृश्य को संवादों और अभिनय के जरिए दिखाया जाता है लेकिन यहां फिल्मी संगीत और रोमांटिक अंदाज ने इसे अलग रंग दे दिया. वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ लोगों को यह प्रयोग मनोरंजक लगा, जबकि कुछ ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक मंचन में इस तरह के फिल्मी गानों का इस्तेमाल उचित है.
अरे यार,
— Versha Singh (@Vershasingh26) October 17, 2026
इस बार लक्ष्मण जी को मानना ही पड़ेगा, ऐसा लग रहा है... pic.twitter.com/B9ODmcIToE
हरियाणा में शूर्पणखा की एंट्री ने भी खींचा ध्यान
हरियाणा की एक रामलीला में शूर्पणखा की एंट्री भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी. यहां कलाकार स्कॉर्पियो गाड़ी से मंच पर पहुंची और लक्ष्मण को गुलाब देकर ‘I Love You’ कहती नजर आई. इस प्रस्तुति में पारंपरिक कथा के साथ आधुनिक मंचीय अंदाज जोड़ा गया. कुछ लोगों ने इसे दर्शकों को आकर्षित करने का तरीका माना जबकि कुछ ने धार्मिक आयोजन की प्रस्तुति पर सवाल उठाए.
#Ghaziabad के साहिबाबाद रेलवे स्टेशन के पास की आदर्श रामलीला कमेटी कितनी आदर्शवादी है ये उसके मंच पर होने वाले इस कार्यक्रम से पता चलता है, नुसरत फतेह अली ख़ान भी अगर ज़िंदा होते तो अपने गाने पर इन महिलाओं के ठुमको को देख कर दुखी जरूर होते, रामलीलाआयोजन को लेकर भी धार्मिक… pic.twitter.com/DwDwgZPqax
— Lokesh Rai (@lokeshRlive) October 16, 2026
क्या हर आधुनिक प्रस्तुति को अश्लील या धर्म का अपमान कहना सही है?
यह बहस केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश के अमरोहा में बीजलपुर गांव के एक धार्मिक कार्यक्रम में फिल्मी गानों पर डांस का वीडियो सामने आने के बाद नाराजगी की खबर आई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीणों ने आयोजकों से कार्रवाई की मांग की और पुलिस मामले की जांच कर रही थी. इसी तरह बिजनौर के पैहरूवाला गांव में भी रामलीला के दौरान डांस वीडियो को लेकर विवाद हुआ. इसके बाद रामलीला कमेटी ने मंच हटाकर मंचन बंद करने का ऐलान किया है. इस मामले ने आयोजन की स्वतंत्रता, स्थानीय विरोध और धार्मिक मर्यादा पर सवाल खड़े किए.
किसी प्रस्तुति को लेकर सभी दर्शकों की राय एक जैसी नहीं होती
इन घटनाओं से एक बात स्पष्ट होती है कि किसी प्रस्तुति को लेकर सभी दर्शकों की राय एक जैसी नहीं होती. किसी के लिए वही दृश्य मनोरंजन हो सकता है तो दूसरे के लिए धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर विषय है. हालांकि, किसी कार्यक्रम को लेकर विरोध होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसमें धर्म का अपमान हुआ है. इसके लिए प्रस्तुति के वास्तविक संदर्भ, इस्तेमाल किए गए संवाद, आयोजकों की मंशा और कार्यक्रम की प्रकृति को देखना जरूरी है.
— Shubham Shukla (@Shubhamshuklamp) October 16, 2026
शूर्पणखा के नृत्य का बचाव करने वालों ने क्या तर्क दिया?
हरियाणा के जींद जिले के नरवाना में शूर्पणखा प्रसंग के दौरान हुए नृत्य को लेकर उठे सवालों पर कलाकार पक्ष ने अपना बचाव किया. किन्नर समाज की महंत रेशमा माई ने मीडिया में बयान देते हुए कहा कि शूर्पणखा के अलग-अलग रूपों का वर्णन मिलता है और मंचन में उसी पक्ष को ध्यान में रखा गया था.
दिल्ली में रावण के साथ कॉकरोच का पुतला क्यों जलाया जाएगा?
रामलीला को लेकर चर्चा केवल मंच पर होने वाले अभिनय तक सीमित नहीं है. दिल्ली के पीतमपुरा में केशव रामलीला समिति ने रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ 30 फुट ऊंचे कॉकरोच का पुतला जलाने की योजना बताई है. समिति के मुताबिक कॉकरोच गंदगी का प्रतीक है और इस पहल का उद्देश्य स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना है. इसके जरिए स्वच्छ भारत और स्वच्छ दिल्ली का संदेश देने की बात कही गई.
यूपी:बुलंदशहर में रामलीला के मंच पर ऐसा कांड हुआ कि रावण की लंका भी शर्मा जाए
जी हां, खानपुर थाना क्षेत्र के अमरपुर गांव में रामलीला के मंच से अश्लील डांस और शराब परोसने के आरोप लगे हैं।
वायरल वीडियो में रावण और दरबारियों के सामने शराब की महफिल और महिला कलाकार का राणा जी माफ़… pic.twitter.com/Ypfr3Z6X5k
— Mukesh Rajput Journalist (@Mukeshk92294988) October 18, 2026
रावण के पुतले पर अतीक अहमद और नेताओं की तस्वीरें क्यों?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दशहरे से पहले राजनीतिक पोस्टरबाजी भी चर्चा में आई. यहां ‘भारत विरोधी दशानन रावण’ नाम से लगाए गए पोस्टरों में माफिया अतीक अहमद को मुख्य रावण के रूप में दिखाया गया. पोस्टर में राहुल गांधी, अखिलेश यादव, मुख्तार अंसारी और कुछ अंतरराष्ट्रीय हस्तियों की तस्वीरें भी हैं.
क्या युवा पीढ़ी रामलीला को नए अंदाज में देखना चाहती है?
युवा दर्शकों के बीच छोटे वीडियो, तेज संवाद, हास्य और फिल्मी संदर्भ लोकप्रिय हैं. ऐसे में रामलीला का कोई अलग दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से फैलता है तो आयोजकों को भी बड़ा दर्शक वर्ग मिल सकता है. लेकिन यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि पूरी gen z पीढ़ी आधुनिक प्रस्तुतियों का समर्थन करती है या उसे पारंपरिक मंचन पसंद नहीं है.
हरियाणा में आयोजित रामलीला में सूर्पणखा की एंट्री स्कॉर्पियों पर बैठकर कराई गई है. pic.twitter.com/vAVEWEjT3r
— Ashutosh shukla (@Ashu9621101476) October 17, 2026
क्या रामलीला में पहले से बदलाव होते रहे हैं?
रामलीला केवल एक लिखित पाठ का मंचन नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में स्थानीय भाषा, संगीत, वेशभूषा और लोक परंपराओं से जुड़ी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है. अलग-अलग इलाकों में इसकी प्रस्तुति का अंदाज बदल सकता है. इसलिए हर बदलाव को परंपरा का पतन कहना उतना ही एकतरफा होगा, जितना हर प्रयोग को सही मान लेना. किसी प्रस्तुति का मूल्यांकन इस बात से होना चाहिए कि वह कथा और पात्रों के साथ कितना न्याय करती है, दर्शकों के प्रति कैसी संवेदनशीलता रखती है और धार्मिक आयोजन की प्रकृति के अनुकूल है या नहीं.
जो समय के साथ नहीं बदलता है, वो पीछे छूट जाता है...
इसका सबसे सटीक उदाहरण मुजफ्फरनगर जिले की जानसठ कस्बे में रामलीला के आयोजन में देखने को मिल रहा है...एक तरफ जहां रामलीला के आयोजन में आजकल भीड़ घटती जा रही है, वहीं इस रामलीला कमेटी वालों ने भीड़ जुटाने के लिए रावण के दरबार में… pic.twitter.com/ytyFQE9qC9
— Amit Tomar (@AmitNationlist) October 16, 2026
आखिर रामलीला की मर्यादा तय कौन करेगा?
धार्मिक आयोजनों में स्थानीय परंपरा, आयोजक समिति, कलाकारों की भूमिका और दर्शकों की अपेक्षाएं सभी महत्वपूर्ण हैं. लेकिन किसी एक दर्शक की असहमति को सभी की राय नहीं माना जा सकता और न ही लोकप्रियता को किसी प्रस्तुति की गुणवत्ता का अंतिम पैमाना बनाया जा सकता है. आयोजकों को यह तय करना होगा कि वे दर्शकों को आकर्षित करने के लिए किस तरह के प्रयोग करना चाहते हैं.
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