Zero FIR क्या है: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ हाल ही में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में एक युवती के खिलाफ Zero FIR दर्ज की गई. इसके बाद यह कानूनी शब्द फिर चर्चा में आ गया है. दरअसल, ये पूरा मामला दिल्ली में हुई कथित घटना का है लेकिन शिकायत नोएडा में दर्ज हुई थी. बाद में यह केस आगे की कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस को भेजा गया था.
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये Zero FIR होती क्या है? क्या यह सामान्य एफआईआर से अलग होती है? और अगर आपके खिलाफ Zero FIR दर्ज हो जाए तो उसके बाद क्या-क्या हो सकता है? ये नोएडा और दिल्ली पुलिस के बीच Zero FIR दर्ज करने और जांच करने का आखिर पूरा मामला क्या है समझने की कोशिश करते हैं.
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Zero FIR क्या होती है?
Zero FIR ऐसी एफआईआर होती है जिसे किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराया जा सकता है, भले ही घटना उस थाना क्षेत्र की न हुई हो. जानकारी के मुताबिक सामान्य तौर पर एफआईआर उसी थाने में दर्ज होती है जहां अपराध हुआ होता है. लेकिन अगर मामला संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) का है और समय बर्बाद होने की आशंका है, तो पुलिस पहले Zero FIR दर्ज करती है और बाद में उसे संबंधित थाना क्षेत्र में भेज देती हैत. इस व्यवस्था का मकसद केवल इतना है कि शिकायत दर्ज कराने में देरी न होना होता है.
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इसे 'जीरो' एफआईआर क्यों कहा जाता है?
इसका नाम "Zero" इसलिए पड़ा क्योंकि शुरुआत में इसे संबंधित थाने का नियमित केस नंबर नहीं दिया जाता था. दरअसल, इसे अस्थायी रूप से दर्ज किया जाता है और बाद में जिस थाने का अधिकार क्षेत्र होता है, वहां पहुंचने पर नियमित एफआईआर नंबर आवंटित किया जाता है. इसलिए इसे जीरो एफआईआर कहा जाता है.
Zero FIR की जरूरत क्यों पड़ी?
एक रिपोर्ट के मुताबिक 2012 के निर्भया कांड के बाद बनी जस्टिस जे.एस. वर्मा समिति ने सिफारिश की थी कि गंभीर मामलों में पुलिस क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का बहाना बनाकर शिकायत लेने से इनकार न करे. इसी सोच के आधार पर Zero FIR की व्यवस्था को मजबूत किया गया ताकि पीड़ित को तुरंत कानूनी सहायता मिल सके. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि यदि संज्ञेय अपराध की जानकारी मिलती है तो एफआईआर दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है.
Government has introduced the system of registering #eZero FIRs in cybercrime cases across 18 states and Union Territories. MoS for Home @bandisanjay_bjp says more than 12,000 cases have been registered under e-Zero #FIRs.
"The Centre has provided a platform to the States and…
— All India Radio News (@airnewsalerts) July 28, 2026
नए कानून में Zero FIR का क्या प्रावधान है?
1 जुलाई 2024 से लागू हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) में भी Zero FIR की व्यवस्था को कानूनी मान्यता दी गई है. जिसका मकसद समय से केस दर्ज करन और जांच करना है. बता दें अब कोई भी व्यक्ति किसी भी पुलिस स्टेशन में संज्ञेय अपराध की सूचना दे सकता है. संबंधित थाना बाद में केस को उस पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर करेगा जहां घटना हुई होगी.
क्या Zero FIR और सामान्य FIR में कोई फर्क है?
कानूनी रूप से दोनों का महत्व लगभग समान होता है. फर्क सिर्फ इतना है कि.....
- Zero FIR किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है.
- सामान्य FIR उसी थाने में दर्ज होती है जहां अपराध हुआ हो.
- Zero FIR बाद में संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दी जाती है.
अगर आपके खिलाफ Zero FIR दर्ज हो जाए तो क्या होता है?
बहुत से लोगों को लगता है कि Zero FIR दर्ज होते ही गिरफ्तारी हो जाती है. लेकिन यह धारणा सही नहीं है, ऐसा नहीं होता है बल्कि आमतौर पर जीरो एफआईआर होने पर ये प्रक्रिया होती है....
- शिकायत दर्ज होती है।
- पुलिस प्राथमिक तथ्यों की जांच करती है.
- केस संबंधित थाना क्षेत्र में भेजा जाता है.
- वहां नियमित एफआईआर नंबर दर्ज होता है.
- जांच अधिकारी नियुक्त किया जाता है.
- सबूत जुटाए जाते हैं।
- जरूरत पड़ने पर नोटिस, पूछताछ या गिरफ्तारी जैसी कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
क्या Zero FIR दर्ज होने का मतलब व्यक्ति दोषी है?
बिल्कुल नहीं, ऐसा नहीं है कि Zero FIR दर्ज होने पर आरोपी का दोष साबित हो गया या फिर वह दोषी करार दे दिया गया है. Zero FIR केवल आपराधिक न्याय प्रक्रिया की शुरुआत है.जब तक जांच पूरी न हो जाए और अदालत दोष सिद्ध न कर दे, तब तक किसी व्यक्ति को केवल एफआईआर के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता है.
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क्या पुलिस Zero FIR दर्ज करने से मना कर सकती है?
अगर शिकायत संज्ञेय अपराध से जुड़ी है तो सामान्य स्थिति में पुलिस केवल यह कहकर मना नहीं कर सकती कि घटना उसके थाना क्षेत्र की नहीं है. इसी उद्देश्य से Zero FIR की व्यवस्था बनाई गई थी ताकि अधिकार क्षेत्र का विवाद पीड़ित के लिए बाधा न बन सके.
किन मामलों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होती है Zero FIR?
हालांकि कानून किसी भी संज्ञेय अपराध पर लागू हो सकता है, लेकिन व्यवहार में इसका उपयोग अक्सर इन मामलों में ज्यादा देखा जाता है वह हैं...
- महिलाओं के खिलाफ अपराध
- यौन अपराध
- हत्या
- अपहरण
- सड़क हादसे
- गंभीर हिंसा
- कुछ साइबर अपराध
पीएम मोदी टिप्पणी वाले मामले में Zero FIR क्यों दर्ज हुई?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कथित टिप्पणी दिल्ली में हुई थी, जबकि शिकायत उत्तर प्रदेश के नोएडा में दी गई. ऐसे में स्थानीय पुलिस ने पहले Zero FIR दर्ज की और बाद में मामले को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस को भेज दिया, क्योंकि कथित घटना का क्षेत्राधिकार दिल्ली का था.
FAQ
सवाल: क्या Zero FIR और FIR अलग-अलग होती हैं?
जवाब: कानूनी प्रभाव लगभग समान है. फर्क केवल अधिकार क्षेत्र और शुरुआती पंजीकरण का होता है.
सवाल: क्या Zero FIR के बाद तुरंत गिरफ्तारी हो सकती है?
जवाब: नहीं. गिरफ्तारी अपराध की गंभीरता, सबूत और जांच पर निर्भर करती है.
सवाल: क्या Zero FIR किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है?
जवाब: हां, यदि मामला संज्ञेय अपराध का है.
सवाल: क्या Zero FIR बाद में बदली जाती है?
जवाब: इसे संबंधित थाना क्षेत्र में भेजकर नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया जाता है.
सवाल: क्या केवल Zero FIR होने से व्यक्ति अपराधी माना जाएगा?
जवाब: नहीं. अंतिम निर्णय केवल अदालत करती है.
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